विभिन्न विषयक विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन
| - RN. Network - Feb 27 2020 5:11PM

विभिन्न जगहों पर प्ली बारगेनिंग एवं 436ए, किशोर न्याय एवं लैंगिक न्याय व घरेलू हिंसा विषयक  विधिक साक्षरता शिविर का हुआ आयोजन

अम्बेडकरनगर। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2019-20 के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर अमरजीत त्रिपाठी के निर्देशानुसार दिनांक 27.02.2020 को जिला कारागार, अयोध्या में प्ली बारगेनिंग एवं 436ए के लाभ विषय पर, बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या में किशोर न्याय एवं लैंगिक न्याय विषय पर तथा महिला शरणालय, अयोध्या में घरेलू हिंसा विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।

      इन शिविरों में श्रीमती पूजा विश्वकर्मा, अपर जिला जज, पाक्सो अधिनियम, अम्बेडकरनगर, श्री अशोक कुमार, सचिव/सिविल जज(सी0डि0) जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर, सुश्री प्रीती भूषण, सिविल जज जू0डि0 टाण्डा, अम्बेडकरनगर, श्री बृजेश कुमार, जेल अधीक्षक, जिला कारागार अयोध्या, श्री कृष्ण भगवान मिश्र, अधीक्षक, बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या, श्रीमती भारती शुक्ला, अधीक्षिका, नारी शरणालय, अयोध्या, प्रदीप एवं विकास सिंह सहित कर्मचारीगण आदि उपस्थित थे।

        शिविर को सम्बोधित करते हुये श्री अशोक कुमार, सचिव/सिविल जज सी0डि0, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर ने प्ली बारगेनिंग विषय पर बोलते हुये कहा कि भारतीय संसद ने दण्ड प्रक्रिया संहिता में संशोधन अधिनियम 2/2006  द्वारा एक नया अध्याय 21(ए) (धारा 265-ए से 265-एल) प्ली बारगेनिंग नामक शीर्षक जोड़कर दांडिक अभियोजन व पीड़ित पक्ष आपसी सामंजस्य से प्रकरण के निपटारे हेतु न्यायालय के अनुमोदन से एक रास्ता निकालते हैं जिसके तहत अभियुक्त द्वारा अपराध स्वीकृति पर उसे हल्के दण्ड से दण्डित किया जाता है जो अन्यथा कठोर हो सकता है।

       प्ली बारगेनिंग समझौते का एक तरीका है। इसके तहत अभियुक्त कम सजा के बदले में अपने द्वारा किये गये अपराध को स्वीकार करके और पीड़ित व्यक्ति को हुये नुकसान और मुकदमें के दौरान हुये खर्चे की क्षतिपूर्ति करके कठोर सजा से बच सकता है। प्ली बारगेनिंग केवल उन अपराधों पर लागू होता है जिनके लिये कानून में सात वर्ष तक सजा का प्राविधान है। यदि अभियुक्त उसी अपराध में पूर्व में सिद्धदोष हुआ हो तो वह प्ली बारगेनिंग के लिये अयोग्य होगा। आवेदन प्राप्त होने के पश्चात न्यायालय लोक अभियोजक पीड़ित एवं अनुसंधानकर्ता अधिकारी को न्यायालय में उपस्थित रहने के लिये नोटिस जारी करेगा। न्यायालय उक्त पक्षों को आपसी संतोषजनक हल निकालने के लिये समय देगा।

        कार्यक्रम को संबोधित करते हुये बृजेश कुमार, जेल अधीक्षक, जिला कारागार, अयोध्या ने बताया कि विचाराधीन कैदियों की संख्या को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2006 में दण्ड प्रक्रिया संहिता में एक महत्वपूर्ण संशोधन करके प्ली बारगेनिंग का नया अध्याय जोड़ा गया। इसके तहत सात साल तक की सजा के मामले में आपसी सहमति से मुकदमों का निपटारा करने का विकल्प प्रदान किया गया है। अभियुक्त अपना अपराध स्वीकार करने के एवज में सजा में आधी से अधिक छूट प्राप्त करके रिहा हो सकता है। इन प्राविधानों को व्यवहारिक बना कर विचाराधीन बंदियो की संख्या कम की जा सकती है।

        उक्त शिविर के साथ-साथ जिला सम्प्रेक्षण गृह किशोर अयोध्या में किशोर न्याय एवं लैंगिक न्याय विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया तथा बच्चों के अधिकार विषय पर सचिव महोदय द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त महिला शरणालय अयोध्या में घरेलू हिंसा विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। संवासिनियों को सचिव महोदय द्वारा उपरोक्त विषय पर विस्तृत जानकारी दी गई।



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