आबकारी अधिकारी अतुल कुमार का दंग कर देने वाला रवैय्या.....
| - RN. Network - Mar 5 2020 2:09PM

जिले में कई सरकारी विभागों के विभागाध्यक्षों की कुर्सी पर विराजमान ऐसे मानव भी हैं जिनसे बात करने पर पता चलता है कि ये स्वयं से खीझे हुए हैं। सरकारी सेवा की लम्बी अवधि गुजारने के उपरान्त अब इनमें झुंझलाहट स्पष्ट रूप से देखी जाने लगी है। इनका सम्पूर्ण व्यक्तित्व इस तरह के रोग जैसे तनाव और झुंझलाहट, एंग्जाइटी के प्रभाव से ग्रसित हो चुका है। कभी गलती से यदि किसी ने इन लोगों से बात करने की कोशिश किया तो ये लोग अचेतन अवस्था में क्या कुछ बोल देंगे जिसके बारे में कुछ कहा ही नही जा सकता। इसी तरह का एक महकमा आबकारी। इसके अम्बेडकरनगर के मुखिया हैं अतुल कुमार श्रीवास्तव। जो जिला आबकारी अधिकारी पद पर यहाँ तैनात हैं। हमने देखा तो नहीं है, परन्तु दूरभाष पर इनके लहजे को सुनकर यह महसूस हुआ कि ये जबरिया इस ओहदे पर बैठे हुए हैं। इनके बात करने का तरीका कुछ नहीं बहुत कुछ अन्य अधिकारियों से अलग है।

रंगोत्सव होली आसन्न है, इनसे दूरभाषीय सम्पर्क पर हमने जनहित में इनके टिप्स संदेश और विभाग द्वारा की जाने वाली कार्रवाई के बावत जानकारी चाही तो.........अतुल कुमार ने प्रश्न किया कि आप जिस मीडिया से हैं उसे कितने लोग जानते हैं, आप द्वारा प्रकाशित की जाने वाली खबरें लोग कैसे पढ़ेंगे, कितने लाख लोग यहाँ पाठक हैं आदि.......आदि........आदि। अतुल कुमार जिला आबकारी अधिकारी से जब यह बताया गया कि हम वेब और प्रिन्ट दोनों के लिए सक्रिय रूप से काम करते हैं तब इन्होंने उक्त बातें कहीं थीं। इसके उपरान्त उन्होंने कहा कि वह व्हाट्सएप्प ऑपरेट करते तो हैं परन्तु सक्रिय नहीं रहते। हमारी बात उनके विभाग के सी.यू.जी. नम्बर पर हो रही थी। 

जिला आबकारी अधिकारी अतुल कुमार से संक्षिप्त दूरभाषीय वार्ता से ही पता चल गया कि यह व्यक्ति या तो शारीरिक रूप से अवस्थ रहते हैं अथव इनके ऊपर अन्य प्रकार के झमेलों, झंझटों का भार है जिससे ये तनावग्रस्त रहते हैं। जिस तरह इन्होंने पहली अल्प दूरभाषीय वार्ता में अपनी छाप छोड़ा उससे इनको लेकर हम स्वयं सोच में पड़ गये। शायद हमारे द्वारा टिप्स, संदेश और एचीवमेन्ट व कम्पेन के बावत पूछे जाने पर इन्होंने यह समझा हो कि खबर प्रकाशन के एवज में उन्हें कोई शुल्क देना पड़ेगा और इसी लिए उपरोक्त तरीके से अपनी बात कही हो। 

अतुल कुमार को बता देना चाहेंगे कि हम भी थोड़ा बहुत जानते-समझते हैं, क्योंकि सरकार द्वारा सजावटी विज्ञापन बजट लगभग समाप्त कर दिया गया है, टेण्डर आदि का प्रकाशन पंजीकृत मीडिया माध्यमों में सशुल्क होता है। बहरहाल हम यह क्यों कहें कि पूरे जिले में प्रतिदिन लाखों रूपए की अवैध शराब, ताड़ी, गांजा, भांग व अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री विभाग की कृपा से की जा रही है। जब-जब त्योहार आते हैं, तब-तब दिखावे के लिए प्रायोजित तरीके से लहन, कच्ची शराब बनाने के उपकरण, भट्ठियाँ आदि कथित रूप से चिन्हित स्थानांे पर जाकर विभाग द्वारा पुलिस की मदद से अपने कब्जे में लिये जाते हैं और कागजी कोरम पूरा करने हेतु उनको नष्ट कराया जाता है।

म्बेडकरनगर जिले में कच्ची शराब, गांजा, भांग, ताड़ी एवं अन्य नशीले पदार्थों का व्यवसाय मुगलकाल से होता चला आ रहा है जो वर्तमान में फल-फूलकर वट वृक्ष सदृश्य हो चुका है। सुना गया है कि होली तक आबकारी महकमा अभियान चला रहा है इसमें वह स्थानीय पुलिस से मदद ले रहा है। कच्ची शराब बनाने के कुटीर औद्योगिक क्षेत्रों में जाकर दिखावे के तौर पर लहन, उपकरण, बर्तन, भट्ठियाँ नष्ट कर रहा है। होली उपरान्त यह कुटीर उद्योग फिर से रक्तबीज की तरह स्वस्थ होकर पहले से अधिक क्षेत्रों में सक्रिय हो जायेगा। 
तात्पर्य यह कि हाईटेक पत्रकारिता और सोशल मीडिया के युग में अम्बेडकरनगर जैसे जिले में अतुल कुमार जैसा कोई सरकारी अहलकार और भी होगा.......? इसके लिए दिन के उजाले में भी दीया लेकर ढूंढने की आवश्यकता है। अतुल कुमार श्रीवास्तव के इस क्षणिक व्यवहार ने बहुत कुछ सोचने पर विवश कर दिया है। 

-रीता विश्वकर्मा



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