सांसत में डी.एफ.ओ. अम्बेडकरनगर
| - RN. Network - Mar 5 2020 2:53PM

प्रदेश सरकार के अधिकांश महकमे ऐसे हैं जिनमें पूर्णकालिक विभागाध्यक्षों की तैनाती न करके विभाग का प्रभार अन्य अधिकारियों को सौंपा गया है। इसके पीछे कारण यह बताया जाता है कि विभागाध्यक्ष पद हेतु योग्यता रखने वाले सरकारी अधिकारियों की कमी है। ऐसे में शासन ने महत्वपूर्ण पदों पर अन्य अधिकारियों को प्रभारी के रूप में अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। पूर्णकालिक और प्रभारी सरकारी मुलाज़िमों में काफी अन्तर देखा जाता है। उनके हाव-भाव, काम करने के तरीकों से ही परिलक्षित होता है कि इनको जबरिया इस कुर्सी पर बैठा दिया गया है। जिसकी पात्रता इनमें नही है। ऐसा कई सरकारी महकमों के प्रभारी विभागाध्यक्षों को देखकर प्रतीत हुआ। 

उत्तर प्रदेश का अम्बेडकरनगर एक ऐसा जिला है जहाँ के वन विभाग के मुखिया डी.एफ.ओ. की कुर्सी पर बीते वर्ष से अब तक आई.एफ.एस. की तैनाती पूर्णकालिक प्रभागीय वनाधिकारी के रूप में नहीं हुई है। ऐसा न होने से इस महकमे का काम-काज अवश्य ही प्रभावित हुआ है। बता दें कि आई.एफ.एस. गंगा प्रसाद के स्थानान्तरण के बाद जिले के वन विभाग के हाकिम की कुर्सी पर एस.एन. यादव को डी.एफ.ओ. के रूप में कार्य करने हेतु प्रभार देकर बिठाया गया था। वह एस.डी.ओ. स्तर के अधिकारी थे। उनकी सेवानिवृत्ति उपरान्त टी.एन. सिंह को यहाँ का डी.एफ.ओ. बनाया गया। 

इस साल 2020 के शुरूआती महीने में डी.एफ.ओ. के रूप में जिले में तैनात किए गए टी.एन. सिंह गोरखपुर वन विभाग में एस.डी.ओ. पद पर नियुक्त हैं। वह यहाँ के प्रभारी डी.एफ.ओ. बनाये गये हैं। दो-दो जगह का कार्य एक जगह की पूर्णकालिक नियुक्ति तो दूसरे जगह का प्रभार उन्हें असमंजस्य में डाले हुए है। विभाग का काम-काज भले ही प्रभावित न दिखाई दे परन्तु प्रभारी डी.एफ.ओ. की तैनाती से महकमे के अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों में अवश्य ही ताल-मेल की कमी व कार्य के प्रति उदासीनता दिखाई पड़ने लगी है। ऐसा इसलिए क्योंकि विभाग एक तरह से नेतृत्व विहीन चल रहा है। पुराने घाघ किस्म के अधिकारी व कर्मचारी प्रभारी डी.एफ.ओ. की अहमियत भी कमतर आंकते हैं। 

बीते दिवस हमने प्रभारी डी.एफ.ओ. टी.एन. सिंह से उनके कार्यालय कक्ष में मुलाकात किया। उनके बात से ही पता चला कि वह दो जगहों पर काम करने की दी गई जिम्मेदारी को सीने पर पत्थर रखकर निभा रहे हैं। बात-बात पर उन्होंने कहा कि वह आई.एफ.एस. नहीं हैं। उनकी मूल तैनाती गोरखपुर वन विभाग के एस.डी.ओ. पद पर है। आई.एफ.एस. की कमी की वजह से शासन ने उन्हें इस जिले का अतिरिक्त प्रभार दे रखा है। ऐसा तब तक चलता रहेगा, जब तक प्रदेश में आई.एफ.एस. की कमी पूरी नहीं हो जाती। वह यहाँ के जिलाधिकारी से अपनी प्राब्लम बता चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चूँकि वेतन हम गोरखपुर से लेते हैं इसलिए वहाँ के कार्यों का सम्पादन, निष्पादन करना उनकी जिम्मेदारी है। दो जगहों की नियुक्ति और अतिरिक्त प्रभार से मैं इस जिले और महकमे के कार्यों के बारे में पूर्णतया समझ पाने में असमर्थ सा हूँ। बड़ी द्विविधा की स्थिति में हूँ।   

टी.एन. सिंह (डी.एफ.ओ.) की बातें सुनकर प्रतीत हुआ कि इनके कथन में काफी हद तक सच्चाई है। इनके द्वारा किसी एक जगह पूरा समय न दे पाने से दोनों जगहों का कार्य अवश्य ही प्रभावित हो रहा है। प्रदेश शासन को चाहिए कि अम्बेडकरनगर जैसे जिले के वन विभाग के मुखिया के रूप में आई.एफ.एस./प्रोन्नति प्राप्त अधिकारी की तैनाती करे। 

-रीता विश्वकर्मा



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