वो लोग अब नही मिलते।
| -RN. Feature Desk - Mar 12 2020 2:13PM

शाम को साथ बैठने वाले, अपने अनुभव बांटने वाले
रात को देर में सोने वाले, सुबह जल्दी जागने वाले
बिना पनही चलने वाले, भोर में घूमने वाले
बिना जूते अब नही चलते,वो लोग अब नही मिलते ।

आंगन की तुलसी को पूजने वाले, पूजा के लिए डांटने वाले
पौधों को नि:स्वार्थ पानी देने वाले, पूजा के बाद प्रसाद बांटने वाले
पैदल मन्दिर जाने वाले, मन्दिर में प्रात: भजन गाने वाले
अब कानों मेें ईयरफोन दे चलते,वो लोग अब नही मिलते ।

सबको राम राम कहने वाले, बिना पहचान के पहचानने वाले
सबका सुख दुख पूछने वाले,सबके बारे मे सोचने वाले
पालथी मारकर खाने वाले, पूजा बगैर भोजन न करने वाले
अब लोग खड़े खड़े खाते हुए चलते,वो लोग अब नही मिलते ।

सिर पर हाथ फेरने वाले, रिश्तों में पहुंचते ही घेरने वाले
बिना घबराये मुसीबत झेलने वाले, गुल्ली डण्डा कबड्डी खेलने वाले
तीज त्योहार में ईश्वरीय गुणगान करने वाले, मेहमानों का बखान करने वाले
रिश्तों का अपमान आज समाज में करते, वो लोग अब नही मिलते ।

पुराने फोन पर मोहित होने वाले, फोन नम्बर डायरी में नोट करने वाले
समाचार पत्र कई बार पढ़ने वाले, रांग नम्बर पर भी बात करने वाले
अमावस्या पूर्णिमा को दान करने वाले, एकादशी को याद रखने वाले
आज वैलेन्टाइन डे नही भूलते,वो लोग अब नही मिलते ।

खेत खलिहान गुलजार करने वाले, गुजरे जमाने की बात करने वाले
नाड़ी पकड़ रोग बताने वाले, रोगों का घरेलू उपचार बताने वाले
समाज का डर पालने वाले, पुरानी चप्पल टूटे चश्मे फटी बनियान वाले
लोग हर सामान का अब ब्रांड पूछते,वो लोग अब नही मिलते ।

सिर पर साफा बांधने वाले, तन पर कमीज धोती तानने वाले
टायर के चप्पल चश्मे में रस्सी वाले, चप्पल मेें रस्सी साल अस्सी वाले
जागरण के शौकीन कानों मेें लुरकी वाले, खुले दरवाजे खुली खिड़की वाले
फिर भी हम खोने का एहसास नही करते,वो लोग अब नही मिलते ।

 

हम होली के हमजोली हैं

हम होली के हमजोली है, इस होली में हमजोली है
जीवन भर खुशियों के रंग से, हम होली के हमजोली है
उल्लास भरी पिचकारी से, इक दूजे पर हम वार करें
लें हाथ पकड़ इक दूजे का, ये जीवन नैया पार करें
ना बन्धन ना कोई पहरा है,दिल मेरा तेरी ही खोली है
जीवन भर खुशियों के रंग से, हम होली के हमजोली है

हाथों में रंग गुलाल लिए, क्यो दूर खड़ी शरमाती हो
नैंनों से बाण चलाती हो, यूं देख मुझे इठलाती हो
बस दूर दूर रह करके क्यूं, तू यूं कर रही ठिठोली है
जीवन भर खुशियों के रंग से, हम होली के हमजोली है

अधरों का रंग अलग दिखता, आंखें रंगीन सी लगती है
हाथों की मेंहदी रंग अलग, और पांव महावर दिखती है
तेरे पैरों की छाप जहां, यूं लगे बनी रंगोली है
जीवन भर खुशियों के रंग से, हम होली के हमजोली है

आज रहूं मैं ना खुद मैं, तू भी तो खुद को ना पाये
इक दूजे में यूं खो जायें, कि मै और तुम हम हो जायें
मिल करके यूं मदहोश हुआ, तू लगे भांग की गोली है
जीवन भर खुशियों के रंग से, हम होली के हमजोली है
 
ना रंग लगा उन गालों पर ,बस छूने से ही लाल हुए
बाहों का हार उन्हें पहना कर हम तो आज निहाल हुए
आलिंगन से यूं शरमा गई, जैसे वो बैठी डोली है
जीवन भर खुशियों के रंग से, हम होली के हमजोली है

अपने अधरों का रंग लगा कर, अपने रंग में रंग गई वो
रंग लगा पर दिखता ना, जाने क्या जादू कर गई वो
इक बूंद कहीं ज्यादा न गिरा, यूं लगे कि जैसे तोली है
जीवन भर खुशियों के रंग से, हम होली के हमजोली है

ना लाल लगा ना पीला कर, ना ही वस्त्रों को गीला कर
ना गाल गुलाल लगाया कर, ना ब्यूटी पार्लर जाया कर
तेरे सुर्ख कपोलों के आगे, फीके सब कुमकुम रोली हैं
जीवन भर खुशियों के रंग से, हम होली के हमजोली है

पीड़ा अन्तर्मन की छोड़ों खुशियां ही खुशियां हो जायें
आ प्यार के रंग में ऐसे रंग, हम इक दूजे में खो जायें
बस रंग ही रंग भरें इसमें, जीवन रंगो की झोली है
जीवन भर खुशियों के रंग से, हम होली के हमजोली है

अब भाव समर्पण का रखकरहम खुद को यूं तैयार करें
सांसों से सांस मिला करके, आ जा नजरों से प्यार करें
मायूस लगे मासूम दिखे, सूरत वो कितनी भोली है
जीवन भर खुशियों के रंग से, हम होली के हमजोली है

आज लिखूं अंगो पे तेरे, मैं होठों से अपने कविता
कितना सुखदायक मंगलमय, होली का ये पल बीता
होली पावन 'एहसास' किया,होली हो मुबारक बोली है
जीवन भर खुशियों के रंग से, हम होली के हमजोली है

- अजय एहसास

सुलेमपुर परसावां 

अम्बेडकर नगर (उ०प्र०)



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