अपने विधायक रखना जरा संभाल के
| -RN. Feature Desk - Mar 12 2020 2:29PM

समकालीन भारतीय राजनीति में दृश्य चकाचक नजर आ रहे हैं। कोई एक तरफ विधायकों को बचा रहे हैं तो दूसरी तरफ कोई किसी और के विधायकों पर डोरे डाल रहे हैं। होली धमाल जारी है और फिजां में पड़ोसन अपनी मुर्गी रखना संभालके मेरा मुर्गा हुआ दीवाना, हे पार्टी वालो! अपने विधायक रखना जरा संभाल के, जैसे होली गीत गाए जा रहे हैं। सत्ता के लिए, कुर्सी के लिए विधायकों के रूठने-मनाने के कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। राजनीति में सत्ता प्राप्ति के लिए कुर्सी के सूत्र इन्हीं विधायकों की बाड़े-बंदी से निकल रहे हैं। इसलिए विधायक रातों-रात गुरुग्राम, बेंगलुरु, दिल्ली, मानेसर, जयपुर भिजवाए जा रहे हैं।

विधायकों के जोड़-तोड़-फोड़-मोड़ के कुर्सी सिद्धांत को मौके पर लगा दिया है। इसके लिए विधायकों को सीधे घर से उठाया जा रहा है। उन्हें बसों में डालकर, चार्टर प्लेन से होटल रिसॉर्ट में भिजवाया जा रहा है। आंकड़ों के इस खेल में, सत्ता मंडियों के इस व्यापार में विधायकों की गिनती का काम जारी है। भविष्य में होटल-रिसॉर्ट के धंधे चमकने की भारी उम्मीदें है। कोई भी होटल और रिसॉर्ट यह विज्ञापन दे सकता है।

'आइए! आइए! रातों रात इधर आ जाइए! यहां हमारे होटल-रिसॉर्ट में शिफ्ट हो जाइए। हमारे होटल-रिसॉर्ट में शिफ्ट होने वाले विधायक सीधे कुर्सी दिलाते हैं और वे सीधे मंत्री पद भी खरीद कर ले आते हैं। तो आइए हमारे रिसॉर्ट में... तुरंत ही विधायकों को उठाकर यहां जमा करा जाइए! अगर आपके पास में बस या चार्टर प्लेन की सुविधा नहीं है, तो यह सब सुविधा हमारे पास है। मीडिया से दूर रखने की पूरी गारंटी। विधायकों को टूट से बचाने का असली गम हमारे पास। सिर्फ आप एक बार हां बोलिए और सीधे विधायकों को हमारे यहां सेट कीजिए!' बाड़ा-बंदी के लिए उठाए गए विधायकों के अलग-अलग बोल सुनाई पड़ रहे हैं।

कोई कह रहा है कि हमें होली मनाने के लिए बुलाया जा रहा है। कोई बता रहा है कि हम दिल्ली जाएंगे। कोई चहक रहा है कि हमें संसद भवन दिखाया जाएगा। वैसे किसी को कुछ भी नहीं मालूम है कि उनको कहां ले जाया गया है और कैसे उठाया गया है। सामूहिक रूप से उठाए गए इन जीवों को कहां जाना है, कुछ पता नहीं। आजकल हर कोई विधायक बनना चाहता है और राजनीति में अपना केरियर चमकाना चाहता है। कोई भी अनपढ़ व्यक्ति इस क्षेत्र में अपना रोजगार जमा सकता है।

बस उसमें सिर्फ इतनी सी बात होनी चाहिए कि वह अपना मोल भाव कैसे कर सकें? राजनीति की मंडी में वह अपने आप को कैसे सेल कर सकें। समय आने पर गिरगिट की तरह कैसे रंग और अपने बयान बदल सकें? बयान जारी करने वाले, बयान देने वाले, बयान बदलने वाले, बयानों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने वाले बयानवीर विधा में माहिर नेता की हर जगह जरूरत होती है। फिलहाल सामने एक बस दिखाई पड़ रही है, जिसमें कुछ विधायक भरे पड़े हैं। उन्हें संसद भवन दिखाने के बहाने सियासी होली के रंग लगाए जा रहे हैं। सियासी रंगों से भरी हुई पिचकारी हाथों में थामे सब मौके की तलाश में अलर्ट है।



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