आधार की तरह यूनिक नंबर से जोडे जा रहे पशु
| - RN. Network - Mar 16 2020 6:22PM

पशुपालन विभाग ने शुरू किया टैगिंग अभियान

आलापुर–अम्‍बेडकरनगर। (अखिलेश जायसवाल)। सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं सहित अब दुधारू गाय-भैंस के कान में टैग लगाकर उनको नंबर एलाट करने का कार्य आलापुर तहसील क्षेत्र में शुरू हो गया। अब तक करीब 22 हजार से अधिक पशुओं का टैगिंग हो चुका है इसके साथ ही अन्य पशुपालकों के लिए भी टीम लगी हुई है, जो 31 मार्च तक शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण कर पशुओं की टैगिंग करेंगी। इसमें पशु पालक व पशु की संपूर्ण जानकारी इंफॉर्मेशन नेटवर्क प्रोडक्शन एंड हेल्थ (इनाफ) सॉफ्टवेयर में अपलोड की जा रही है।जिससे यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि आवारा पशुओं का मालिक कौन है. सड़कों से पकड़े गए आवारा पशुओं को पशुशालाओं में रखा जाएगा, जहां पर इनके चारा और पानी की व्यवस्था प्रदेश सरकार उपलब्ध कराएगी।
     
     वहीं किसानों की समस्‍या बने बेसहारा पशुओं से निजात दिलाने के लिए उपजिलाधिकारी आलापुर धीरेन्‍द्र श्रीवास्‍तव के निर्देश पर तहसील के पशुधन प्रसार अधिकारी डा0 विवेक सिंह ने रामनगर में सिंचाई विभाग के डाक बंगला परिसर व जयराम जनता जूनियर हाई स्‍कूल के प्रांगण में डेरा जमाये आवारा पशुओं को पकड कर चहोडा शाहपुर पशु आश्रय स्‍थल भेजा गया। इसके लिए क्षेत्र के दस सफाई कर्मियो सहित नगर पालिका किछौछा के वाहन को भी लगाया गया। अभियान में 30 से अधिक आवारा पशुओं का टैगिंग करके पशु आश्रय स्‍थल भेजा गया।

एक क्लिक में मिलेगी पूरी जानकारी: पशु पालन विभाग के पशुधन प्रसार अधिकारी डा0 विवेक सिंह ने बताया कि योजना के तहत प्रजनन के साथ दुधारूओं की यूनिक आईडी बनाई जा रही है। इस योजना से अब पशुओं के चोरी व गुम होने पर तुरंत पता लग सकेगा। यह आईडी पशु के कान में लगाई जा रही है। जिसमें 12 अंकों का कोड डाला गया है। इसमें पशु पालक व पशु की संपूर्ण जानकारी इंफॉर्मेशन नेटवर्क प्रोडक्शन एंड हेल्थ (इनाफ) सॉफ्टवेयर में अपलोड की जा रही है।

यूनिक नंबर से यह मिलेगा फायदा: पशु पालन विभाग के डा0 विवेक सिंह ने बताया कि किसानों के पशुओं के स्वास्थ्य के साथ दुग्ध उत्पादन को बढावा देने के लिए यह कोड जारी किया जा रहा है। डेरी उद्योग एक महत्वपूर्ण सेक्टर है। लेकिन हमारे पशुओं की संख्या ज्यादा होने के बावजूद दूध उत्पादन कम हो रहा है। पशुओं की टैगिंग के बाद जारी यूनिक नंबर में पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान, इलाज, उत्पादकता के आंकलन के लिए रिकार्ड रहेगा। इससे पशुओं का अनुवांशिक डाटा भी शामिल रहेगा। आनुवांशिक सुधार कार्यक्रमों की निगरानी बेहतर हो सकेगी। पशुओं के आहार संतुलन, पशुओं के स्वास्थ्य की जानकारी मिल सकेगी जिससे किसान के उत्पादन में वृद्धि मदद मिलेगी। अब कृत्रिम गर्भाधान पर जोर दिया जा रहा है।

31 मार्च तक चलेगा विशेष अभियान

"योजना के मुताबिक अब दुधारू गाय-भैंस समेत सड़कों पर घूमने वाले सभी आवारा पशुओं को भी टैगिंग के द्‍वारा उनके कान में टैग लगाकर नंबर अलॉट किए जा रहे है। सड़कों से आवारा पशुओं को हटाने की कवायद भी शुरू की गई है। सड़कों पर घूमने वाले सभी आवारा पशुओं की टैगिंग होनी है और उनके कान में टैग लगाकर नंबर अलॉट किए जाएंगे और उन्हें पकड़कर पशुशालाओं में रखा जाएगा।

यही नहीं अभी तक करीब 22 हजार से अधिक पशुओं की टैगिंग कराया जा चुका है इसके साथ ही अन्य पशुपालकों के लिए भी टीमों को लगाया गया है, जो 31 मार्च तक शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण कर पशुओं की टैगिंग करेंगी। किसानों के पशुओं के स्वास्थ्य के साथ दुग्ध उत्पादन को बढावा देने के लिए यह कोड जारी किया जा रहा है। पशुओं की टैगिंग के बाद जारी यूनिक नंबर पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान, इलाज, उत्पादकता के आंकलन के लिए रिकार्ड रहेगा ।"

-डा0 विवेक सिंह (पशुधन प्रसार अधिकारी आलापुर)



Browse By Tags



Other News