कोरोना और हम
| -RN. Feature Desk - Mar 23 2020 5:21PM

साहसी बनिए पर सिर्फ़ हम ही बुद्धिमान हैं, ऐसा समझने की बेवकूफ़ी मत कीजिए। ये WHO, अमेरिका, यूरोप, प्रधानमन्त्री कार्यालय, IIM, IIT अन्य सभी को बेवकूफ़ मत समझिए, जो स्कूल, कॉलेज, मॉल बन्द करवा रहे हैं। बहुत आवश्यक हो तो बाजार से सामान जरूर लें, पर शर्ट या जूते एक महीने बाद भी खरीदे जा सकते हैं। रेस्टोरेंट एक महीने बाद भी जा सकते हैं। यह मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि कई जानकारों को ऐसा करते देखा है। यह बहादुरी नहीं मूर्खता है। ऐसे लोग अब भी गम्भीरता को नहीं समझ रहे हैं।

लापरवाही से आप अपने साथ उन अनेक लोगों की जान लेने का प्रयास कर रहे हैं, जो देश के लिए या अपने लिए जीना चाहते हैं। इन्क्यूबेशन पीरियड का खेल समझिए, जिसे न समझने से इटली श्मशान बनकर बर्बाद हुआ है! आप हम में से कोई भी कोरोना से इन्फेक्टेड हुआ, तो ऐसा होते ही तुरन्त उसमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं होंगे। उसे खुद भी मालूम नहीं होगा कि उसे कोई परेशानी है या वायरस का इन्फेक्शन हो गया है, परन्तु उससे अन्य व्यक्ति में इन्फेक्शन ट्रांसमिट हो सकता है। वायरस से इन्फेक्टेड होने से 14 दिन बाद तक कभी भी लक्षण आ सकते हैं।

इसलिए आप और हम स्वस्थ लगने वाले व्यक्ति के साथ बैठे हों, तब भी हो सकता है, वह इन्क्यूबेशन पीरियड में हो। ऐसे में हो सकता है, हम कोई इन्फेक्शन अपने साथ ले आएं, और अपने परिवार के सदस्यों या अपने कलीग्स को दे आएं। यह हमें भी पता तब चलेगा, जब बीमारी के लक्षण दिखने लगेंगे। मैं किसी पैथी की बुराई नहीं कर रहा हूँ, लेकिन कोई कितने ही दावे करे, सच यह है कि COVID-19 का इलाज़ नहीं है। जिस दिन बीमारी दिखेगी, उस दिन उस व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता और वायरस की बीमार करने की क्षमता तथा उसके फेफड़ों, हार्ट, गुर्दे जैसे अंगों की सामर्थ्य तय करेगी कि वह ज़िन्दा बचेगा या नहीं।

इस तरह यह दुस्साहस दिखाने वाले लोग अपने ही घर के लोगों के हत्यारे साबित होंगे, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गई है। मास्क, ग्लव्ज़, सैनिटाइज़र कोई भी प्रोटेक्टिव नहीं है, सिर्फ़ सहायक हो सकते हैं। अपनी नहीं भी करते हों, पर अपनों की चिंता कीजिए। आपको जिन्होंने जीवन दिया है, उन्हें मौत मत दीजिए।अभी भी वक़्त है सावधान हो जाइए। जो लोग इतनी कवायद कर रहे हैं, उन सबको बेवकूफ़ मत समझिए, वरना भारत में आंकड़ा किस कदर भी पार कर जाए तो भी आश्चर्य नहीं होगा।

चीन और इटली के हालात देखने के बावजूद जो बड़ी ग़लती स्पेन ने की, वह अब भारत में न दोहरायें। पिछले सप्ताह कोरोना मरीज़ों की संख्या देखते हुए सरकारी आदेश से स्पेन के स्कूल कॉलेज बंद करवा दिये गये, तो कई बच्चे और उनके माता पिता, दादा दादी नाना नानी आदि पार्क में पिकनिक करने लगे। इसका नतीजा यह हुआ कि अचानक से मरीज़ों की संख्या बढ़ने लगी। तब सख़्ती से और दंड से लोगों को समझाया गया कि यह छुट्टियों का समय नहीं बल्कि आपातकाल है।

सख़्ती से घर पर रहने के आदेश दिये गये। किंतु इस बीच इनफ़ेक्शन कहाँ तक और कितना फैल गया, फ़िलहाल इसका अंदाज़ा नहीं है। आगे आने वाले दो सप्ताह में इसका पता लग ही जायेगा। भारत के अपनों से खास निवेदन  इन बड़ी बड़ी ग़लतियों से सबक़ लें, अभी से जागरूक हो जायें। अपने कॉमन सेंस का प्रयोग करें। याद रखिये समझदारी से उठाया गया आपका प्रत्येक क़दम इस महामारी से लड़ने में अत्यंत प्रभावशाली तौर से सहायक हो सकता है। आप हैं तो जगत है, जान है तो जहांन है।



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