कथा कोरोना देव के परायण की
| -RN. Feature Desk - Mar 30 2020 12:15PM

दिसंबर 2019 माह को कोविड-19 कहते हैं। इस माह से ही इसने पूरे विश्व में कोरोना वायरस के रूप में बड़ी धूम मचाई। कहीं-कहीं इस काल को जनवरी व फरवरी 2020 के नाम से भी जाना जाता है। दिसंबर 2019 को कोरोना काल तिथि भी कहते हैं। कोरोना मनुष्यों के द्वारा मनुष्यों के ही संपर्क में आने से बहुत ज्यादा तेज गति से फैलता है। अतः इसे मनुष्य बहुत प्यारे लगते हैं। कोरोना देव की कहानी- चहुं दिशिखंडे भरतेवृता एक साहूकार निवास करता था। उसके दो बेटे और दो बेटियां थी। दोनों बेटे शादीशुदा थे और वे विदेशों में रहा करते। दोनों बेटियां साहूकार के साथ ही आर्यवर्त में ही निवास करती।

पूरे विश्व में कोरोना वायरस के कारण जब अफरा-तफरी मच गई तो साहूकार के दोनों बेटों ने आर्यावर्त में जाने का निश्चय किया। उस समय पूरी दुनिया में आइसोलेशन एवं क्वॉरेंटाइन जैसे कर्म कोरोना वायरस के पारायणी उद्यापन किए जा रहे थे। बड़े बेटे ने आइसोलेशन व क्वॉरेंटाइन संबंधी विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दिए गए आदेशों के अनुसार उद्यापन पारायण किया। लेकिन छोटे बेटे ने इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया और लापरवाह बन वह चुपचाप से अपने गांव चला गया। कालांतर में जब कोरोना देव ने अपना उग्र रूप दिखाया तो पता लगा कि बड़ा बेटा 14 दिन तक आइसोलेशन में रहने के बाद हंसी-खुशी अपने घर लौट आया। छोटे बेटे को कोरोना ने जकड़ लिया। वह कोरोना देव के प्रकोप से वह बच न सका।

कोरोना देव के उद्यापन की कथा- साहूकार की जो दोनों बेटियां थी वे दोनों एक दूसरे से विपरीत विचारधारा रखने वाली थी। छोटी बेटी कोरोना देव में विश्वास रखती और विश्व स्वास्थ्य संगठन, शासन व प्रशासन द्वारा बताए गए नियमों के अनुसार ही घर पर ही रहती। वह टीवी माता पर कोरोना देव के बारे में जागरुकता कथा-कहानियों का श्रवण करती व उनके अनुसार ही आचरण करती। वह कोरोना जागरुकता कथा का प्रचार करती। घर में ही रहकर वह अपनी रुचि के अनुसार पढ़ती-लिखती और बागवानी किया करती। घर से एक बार भी बाहर नहीं निकलती और यथासमय यथोचित साबुन से हाथ धोती रहती। लॉकडाउन मंत्र का पूर्ण पालन करती। साहूकार की बड़ी बेटी इस प्रकार देखती तो वह उसे कहती- 'मुझे घर में पड़े रहना बहुत बुरा लगता है।'

यह कहकर बड़ी बेटी घर से बाहर निकल गई। वह सड़कों पर इधर-उधर भटकने लगी। ऐसा करने पर कालांतर में पुलिस प्रकट भई। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया; कोरोना देव ने उसे तत्काल सजा दी। छोटी बेटी ने घर में ही रहकर फेसबुक, व्हाट्सएप, फोन आदि से कोरोना माता की कथा बताई-सुनाई। घर में ही रहकर हाथ धोने के तरीके पर ही बात करने लगी। ऐसा करने पर काल ने उसे युग-युगांतर जीने का आदेश दिया। हे कोरोना देव! जैसे तूने छोटी बेटी व बड़े बेटे का कष्ट काटा। उसी तरीके से पूरे संसार का कष्ट काटना। कोरोना देव की कथा कहने-सुनने वाले और विश्व स्वास्थ्य संगठन, शासन व प्रशासन द्वारा दिए निर्देशों की पूर्ण पालना करने वाले को दीर्घायु प्रदान करना।



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