लॉकडाउन क्या और कैसे?
| -RN. Feature Desk - Apr 1 2020 1:27PM

लॉकडाउन मूलतः 1970 के दशक में अमेरिका में एक प्रशासनिक आदेश के रूप में  उभर कर सामने आया। दरअसल अमेरिका का संविधान अमेरिकी नागरिकों को शस्त्र रखने का अधिकार देता है। वहाँ पर शस्त्र रखने के अधिकार को मूलभूत अधिकार माना गया है। फलस्वरूप वह प्रत्येक नागरिक अपने  साथ शास्त्र रख सकता है, परिणामस्वरूप कई बार ऐसा होता था की मानसिक रूप से विक्षिप्त लोगों के हाथों में हथियार आ जाते थे तो वे कहीं भी, कभी भी अंधाधुंध  गोली चला देते थे या हिंसा कर देते थे। जिससे स्कूल में मासूम बच्चे व सार्वजनिक स्थलों पर निर्दोष लोगों की हत्या हो जाती थी। इससे बचने के लिए लॉकडाउन (तालाबंदी) एक प्रशासनिक आदेश के रूप में प्रयोग किया जाने लगा। गौरतलब है कि लॉकडाउन के साथ दो और शब्दों का जिक्र किया जा रहा है, धारा 144 तथा कर्फ्यू –

धारा 144 क्या है

प्रथम: धारा 144 औपनिवेशिक काल में बने कानून दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के अंतर्गत एक कानून है, धारा 144 को जिला मजिस्ट्रेट उप-विभागीय मजिस्ट्रेट या राज्य सरकार द्वारा किसी कार्यकारी मजिस्ट्रेट को कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका या उसे व्यवस्थित करने  संबंधित प्रावधान लागू करने का अधिकार देता है।
मजिस्ट्रेट एक लिखित आदेश के माध्यम से किसी व्यक्ति विशेष या स्थान विशेष या स्थान विशेष पर रहने वाले व्यक्तियों या साधारणतया किसी विशेष स्थान या क्षेत्र में आने जाने के संबंध में लोगों को निर्देशित कर सकता है। आपातकालीन परिस्थिति में मजिस्ट्रेट बगैर पूर्व सूचना के भी इससे संबंधित आदेश पारित कर सकता है। जिस स्थान पर या राज्य में यह धारा लगाई जाती है, वहां पर चार या उससे अधिक लोग इकट्ठे नहीं हो सकते।

कर्फ्यू क्या है

सीआरपीसी, दंड प्रक्रिया संहिता के धारा 144 के तहत कर्फ्यू लगाया जाता है। कर्फ्यू में जरूरी सेवाओं जैसे पुलिस, अग्निशमन, मेडिकल, पैरामेडिकल, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल्स, बस स्टैंड, पानी, बिजली, ग्रॉसरी और दूध आदि सेवाओं को लेकर छूट दी जाती है। इससे जुड़े लोग काम की वजह से बाहर निकल सकते हैं, परंतु कर्फ्यू के दौरान जरूरी सेवाओं के लिए पास जारी किया जाता है। पास नामित अधिकारी द्वारा जारी किया जाता है, बगैर पास की बाहर जाने पर सजा हो सकती है।

भारत में लॉकडाउन

लॉकडाउन या तालाबंदी भारत के लिए एक नया अनुभव है, भारत के प्रधानमंत्री द्वारा घोषित लॉकडाउन  का कानूनी आधार कानूनों में मिलता हैं -

प्रथम ब्रिटिश काल मैं बना कानून महामारी अधिनियम, 1897 (Epidemic Disease Act ,1897 ) इस अधिनियम का प्रयोग किसी विकट समस्या के दौरान होता है, जब केंद्र या राज्य सरकार को यह विश्वास हो जाए कि कोई विकट संकट या बीमारी  देश या राज्य में फैल चुकी है और सभी नागरिकों को अपनी चपेट में ले सकती है। तब केंद्र व राज्य दोनों इस अधिनियम को लागू कर सकते हैं। इस अधिनियम की धारा 2 राज्य सरकार को कुछ शक्तियां प्रदान करती है। जिसके माध्यम से केंद्र व राज्य सरकार महामारी से निपटने या रोकथाम के लिए अस्थाई नियम बना सकती हैं। ऐसे नियम जो महामारी से निपटने या रोकथाम के लिए कारगर साबित हों।

द्वितीय: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत व्यवस्था है, कि एक राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण होगा जिसका अध्यक्ष भारत का प्रधानमंत्री होगा इस अधिनियम की धारा 6 में प्राधिकरण की शक्तियों की व्याख्या की गई है; तथा धारा 6 की उप धारा 2(झ) में प्राधिकरण को शक्ति दी गई है कि आपदा से निपटने या रोकथाम या आपदा की आशंका की स्थिति या आपदा से निपटने के लिए तैयारी और क्षमता निर्माण के लिए ऐसे अन्य उपाय कर सकेगा जिन्हें वह आवश्यक समझे।

धारा 6 की उपधारा 3 यह व्यवस्था करता है कि प्राधिकरण का अध्यक्ष आपात स्थिति में प्राधिकरण की किन्हीं या सभी शक्तियों का प्रयोग कर सकता है। लॉकडाउन एक प्रशासनिक आदेश होता है, इसे किसी आपदा या आपात स्थिति के समय सरकारी तौर पर लागू किया जाता है। इसमें लोगों को घर में रहने का आह्वान वह अनुरोध किया जाता है। इसमें जरूरी सेवाओं के अलावा सारी सेवाओं को बंद कर दिया जाता है। कार्यालय, दुकान, फैक्ट्रियां और यातायात सेवाएं बंद कर दी जाती हैं। जहां तक संभव हो लोगों को घर से ही काम करने के लिए कहा जाता है।

जरूरी नहीं है की लॉकडाउन के साथ सजा का प्रावधान होगा ही। इसके लागू होने के बाद भी यदि लोग बाहर आते हैं, तो पुलिस उन्हें समझा-बुझाकर वापस घरों में भेज सकती है, उन्हें जेल या जुर्माना नहीं हो सकता। हालांकि सरकार लॉकडाउन में भी सख्ती कर सकती है। एक तरह से लॉकडाउन बिना सजा के प्रावधान वाला कर्फ्यू कहा जा सकता है। यदि कानूनी रूप से देखा जाए तो कर्फ्यू की स्थापित प्रक्रिया रही है; और भारतीय प्रशासन को इसे लागू करने का एक लंबा अनुभव भी रहा है। परंतु लॉकडाउन एक नया प्रयोग है। अतः व्यवहारिकता में कुछ नई बातें सामने आ रही हैं,भविष्य में इसकी भी एक प्रक्रिया उभर कर सामने आएगी। लॉकडाउन के समय भी जरूरी आवश्यकता तथा मेडिकल से संबंधित लोग तथा  इससे जुड़े वाहन बाहर आ सकते हैं। 

धर्मेन्द्र कुमार, एम.ए. (राजनीति विज्ञान), बर्धा- महाराष्ट्र



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