....इतिहास गवाही है
| -RN. Feature Desk - Apr 1 2020 1:35PM

हर शूल जिन्दगी का पलभर की खताही है।
अनुभव बता रहे है, इतिहास गवाही है।।
पंथी सम्हलकर चलना पग-पग पे कसाले है।
पलभर की चूक बनती सदियों की तबाही है।।
जिन्हें देवता पुकारा और दूध भी पिलाया है।
अवसर कभी न चूके, जब पाया डसाही है।।
मैं ढूंढता हूं उसको कब से अधीर होकर।
पहचान न ही उसका न उसका पता ही है।।
अस्तित्व न ही उसका कब जाने फूट जाये।
आखिर यह खिलौना भी मिट्ठी का बना ही है।।

बाबा राम अधार शुक्ल 'अधीर', पूरे नन्दू मिश्र, जखौली पटरंगा फैजाबाद



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