विक्रम बेताल की कोरोना कथा
| -RN. Feature Desk - Apr 3 2020 12:36PM

कोरोना काल था। राजा विक्रमादित्य सावधानी से अपनी छत पर चक्कर लगा रहे थे। एक हाथ में मोबाइल और दूसरे हाथ में तलवार लिए राजा इस समय कोरोना के कहर से घर में ही आइसोलेट सो रहे थे। तभी उनके फोन पर वीडियो कॉल आया। उन्होंने उठाया तो देखा कि उधर से बेताल पुराने बरगद के पेड़ पर उल्टा लटक रहा था। लटके-लटके ही कहकहा लगा रहा था। विक्रमादित्य ने देखा कि बेताल उल्टा लटके-लटके ही अपने हाथों को सैनिटाइज कर रहा था। बार-बार हाथों को साबुन से धो रहा था। अब उसने अपने दोनों हाथों में ग्लव्ज पहन लिए हैं। मुंह पर मास्क लगा रखा है। बेताल ने इस बार फिर से भयंकर अट्टहास लगाया और कहा- 'हे राजन! मैं तुम्हें फिर कोई कहानी सुनाऊंगा। अगर तूने कहानी का जवाब सही दिया तो मैं बरगद पर फिर उल्टे लटक जाऊंगा। अगर तुमने गलत जवाब दिया तो मैं तुम्हें कोरोना के हवाले कर दूंगा।'

तब राजा विक्रमादित्य ने मोबाइल को सैनिटाइजर से धोते हुए कहा- सुन बेताल! तुमने मुझे बहुत कहानियां सुनाई है। आज मेरी बारी है। मैं तुम्हें कहानी सुनाऊंगा। मैं पूरे दिन भर घर में पड़ा रहता हूं। घर में ही अड़ा रहता हूं। घर में बर्तन मांजने के कारण मेरे हाथों की रेखाएं धुल गई है। हाथ इतनी बार धोने लगा हूं कि लगता है कि पूरा हाथ ही बह कर नाली में चला गया है। तुम्हारे को पता है ना! अब तो नाक भी छिपी-छुपी रहती है। नाक को दिन में 10 बार छुपाना पड़ता है। नाक अब नाक न रही शत्रु के प्रवेश का मुख्य द्वार बन गई है। घर में अब मुझे भयदायक आराम करना पड़ता है। आराम कर मैं उठता हूं। फिर आराम करता हूं। आराम करने के बाद फिर उठकर आराम से आराम करता हूं। आराम करने के बाद फिर से आराम करता हूं। बार-बार साबुन से हाथ धो-धोकर आराम करने का काम करता हूं। बताओ बेताल! मैं यह कहानी किस देश की सुना रहा हूं। सही-सही जवाब देना वरना तुझे जिंदगी भर के लिए इसी बरगद के पेड़ की डाली नंबर 155 पर क्वॉरेंटाइन कर दूंगा।'

तभी बेताल ने अपने मुंह पर लगे मास्क को और ज्यादा कसकर ठीक किया और कहा- 'हे राजा विक्रम! मुझे क्या तू मूर्ख समझता है? मुझे यह सब पता है कि क्वॉरेंटाइन व आइसोलेशन कितना जरूरी है। सिर्फ सोशल डिस्टेंस ही कोरोना को भगाने में महत्वपूर्ण है। यह तथ्य न केवल मैं जानता हूं बल्कि मेरे श्मशान के सभी भूत भी ये सब जानते और मानते हैं। यह बात किसी एक देश की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की है। दुनिया में कोरोना नामक एक जीव-अजीव ने हाहाकार मचा रखा है। तुम भी इसी समय कोरोना प्रिवेंशन के लिए कोरोना योद्धा बने हुए हो। मैं तुम्हें यह भी कहे देता हूं कि तुम विश्व स्वास्थ्य संगठन, शासन और प्रशासन की बातें मानते रहो। इसी तरह से घर में अपने आप को मजे से काम-आराम में लगाए रखो।' कहकर बेताल ने जोरदार कहकहा लगाया। उसने देखा कि श्मशान के सारे भूत अपनी-अपनी कब्रगाह में आइसोलेटिव पोजीशन में सैनिटाइजर का प्रयोग कर रहे थे। तब विक्रम ने बेताल से कहा- 'बेताल! अब तू बहुत सयाना हो गया रे!'



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