लाकडाउन इफेक्ट
| -RN. Feature Desk - Apr 4 2020 12:51PM

-डॉ. अविनाश कुमार झा

अब मुर्गियों के अंडे देने पर तो लाकडाउन नही लगा है न, और न ही गाय -भैंस के दूध देने पर।  दूध का एक बड़ा हिस्सा मिठाइयों मे खपत होता है ,जो अभी लाकडाउन है। तो भला ये दूध कहां जाये? इसी तरह इन अंडो का क्या किया जाय? बकरे तो भला अपनी खैर मना लेंगे पर मुर्गियों की जिंदगी ज्यादा लंबी नही होती । वो काटे नही गये तो खुद की मौत मर जायेंगे, उनके शवों का निस्तारण भी समस्या है। इंसानी लाकडाउन की ज्यों ज्यों अवधि बढ़ेगी, फूड चेन बिगड़ता जाएगा। इतना ही नही इंसानी फूड हैबिट का क्या होगा? पहले ही कई पियक्कड़ शराब न मिलने से डिप्रेशन मे जा चुके हैं।

लाकडाउन ने आदमी की जीवनशैली पर प्रभाव डाला है। मै कई ऐसे लोगों को जानता हूँ, जिनके बारे मे कहा जाता था कि इनके पांव मे भंवर पड़े हैं, अर्थात यह हमेशा घूमते रहते हैं। वो घरों मे बंद हैं, खैनी, पान ,बीड़ी, सिगरेट पीनेवाले, चौक की चाय को पिये बिना संडास न जानेवाले तड़प रहे हैं पर बाहर वायरस का खौफ है। भले वो कहते रहें कि राजा परीक्षित तो शीशे का घर मे बंद था जहाँ हवा भी नही जाती थी, वहाँ तक्षक पहुंच गया, तो हमारे घर क्या सब्जी, नोट, पेपर, राशन, दुध आदि से कोरोना नही पहुंच जाएगा। फिर भी वो घरों से निकल नही रहे हैं, हां जानवर जरूर उनके घरों तक पहुंच रहा है।

पिछले एक सप्ताह मे पीलीभीत मे बाघों ने चार लोगों को उनके घरों, खेतों मे मार दिया। लाकडाउन मे चहल पहल कम होने के कारण उन्हे जंगल और गांव सब एक जैसे लग रहा है। इतना ही नही अब घरेलू पशु भी जंगल मे नही जा रहे हैं, बाघ समझ नही पा रहे हैं कि क्या हो रहा है? इंसानों ने ही जंगल काट काटकर वहाँ गांव या शहर बसाया है। जो जगह पहले कभी जंगल हुआ करता था, उसे जानवर अपना नेचुरल हैबिटेट मानता है। आज जब इंसान घरों मे बंद है तो जानवर के अंतर्मन मे छुपी बातें उसे सड़कों पर ले आयी है। शायद इसीलिए सरकार ने भी कहा है कि बंदरों, कुत्तों और सड़कों पर घूमनेवाले पशुओं के खिलाने की व्यवस्था की जाय, वरना ये एग्रेसिव होकर इंसानों से जंग शुरू कर देंगे।

ज्ञात जानकारी के अनुसार यह वायरस जानवरों के लिए खतरनाक नही है, सिर्फ इंसानों का दुश्मन है। होगा भी क्यों नही, जब चमगादड़, पैंगोलिन, सांप, चींटी और चूहों को इंसान अपने भोजन का हिस्सा बना लेगा तो स्वाभाविक रुप से प्रकृति बैलेंस करते हुए उसके विरुद्ध ऐसे  वायरस बनाएगी ही। इंसान इस धरती का सबसे बुद्धिमान और ताकतवर प्राणी है, उसे प्राकृतिक संतुलन बनाये रखने की जिम्मेवारी उठानी होगी वरना ऐसे वायरसों के डर से वह घरों मे छिपता रहेगा और जानवर बेखौफ सड़कों पर घूमेंगे।

#स्टेहोमस्टेसेफ#



Browse By Tags



Other News