कोरोना, लाकडाउन पर प्रभास घोष ने क्या कहा
| - RN. Network - Apr 4 2020 1:06PM

प्रभास घोष

“कोरोना-वायरस संक्रमितों और मृतकों की संख्या खतरनाक रूप से दिन-ब-दिन बढ़ रही है। यह पता चला है कि अस्पतालों में इसकी जांच, जांच केंद्र, वेंटिलेटर और अन्य चिकित्सा सामग्री के अलावा डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए पीपीई बेहद खराब किसम के हैं। दूसरी ओर करोड़ों बेरोजगार श्रमिक, प्रवासी मजदूर, दैनिक वेतन भोगी, गलियों में सामान बेचने वाले, रिक्शा चालक, छोटे व्यापारी, घरेलू कामगार अचानक लाकडाउन के बाद देश में भुखमरी से रहे हैं।

वैसे ही देश में कई लोग भुखमरी से मरते रहे हैं, आगे इनमें दर्द से वृद्धि होगी ही होगी। आम लोगों को उम्मीद थी कि 3 अप्रैल को प्रधानमंत्री स्थिति का मुकाबला करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण घोषणा करेंगे। लेकिन उन्होंने जो घोषणा की वह न केवल निराशाजनक है, बल्कि वास्तव में एक क्रूर मजाक है। उन्होंने लोगों से 5 अप्रैल, 2020 को रात 9 बजे घरों की रोशनी बन्द कर कमरों में अन्धेरा करने और दरवाजों पर 9 मिनट के लिए टॉर्च, मोमबत्ती जलाकर रोशनी करने के लिए कहा है।

इस नुस्खा किस विज्ञान या चिकित्सा विज्ञान ने प्रदान किया है? यह लोगों का ध्यान सरकार की वास्तविक ज़िम्मेदारी से हटा कर धार्मिक रहस्यवाद की ओर ले जाने और सरकार और सत्ताधारी पार्टी के अंध-आज्ञापालन के लिए एक चतुर चाल है जैसा कि इसने कुछ दिन पहले ही लोगों से थाली व घंटी बजाने के लिए कहा था। हम लोगों से अपील करते हैं कि वे सतर्क रहें, अपनी आवाज उठाएं और सरकार को मौजूदा गंभीर परिस्थितियों का मुकाबला करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए मजबूर करें।”

- Ad. Virendra Tripathi, Lucknow (U.P.)



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