कोरोना बाबा के शब्दों की घचाघची!
| -RN. Feature Desk - Apr 7 2020 12:51PM

कोरोना वायरस डिजीज से कोविड-19 पैदा कर कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को सड़क चटा दी है। दिन के सपने से लेकर रात के टेली विजनबाजी तक धमाल मचा रखा है। कोरोना ने अपना आतंक सजा रखा है। कोरोना से काहे को रोना! कोरोना काल में घर में ही रहो ना! सेनीटाइजर-साबुन से हाथ मलो ना! घर में ही रहो बाहर निकलने के लिए मरो ना! डरो ना! वर्क फ्रॉम होम करो ना! कोरोना ने शब्द दिया- 'वर्क फ्रॉम होम।'

घर में पड़े काम करते रहो। घर में पड़े-पड़े काम कैसे करें? घर में ऑफिस जैसी सुविधा है ही कहां? ऑफिस में मरियल चाल चलता पंखा और थूकने के लिए बकेट! यह सब आखिर घर में है कहां? थूकने की सुविधा ऑफिस के अलावा कहीं नहीं है। चाहे दीवार पर थूको चाहे बॉस पर! चाहे जनता पर थूको या फिर फाइल पर। थूकमय ऑफिस है सारा।

शब्द दिया क्वॉरेंटाइन! यह शब्द कोरोना ने बार-बार ऐसा गुंजाया कि ऐसा लगता है जैसे सभी लोग कुंवारे बनकर टाइम से घर में पड़े रहो। क्वॉरेंटाइन शब्द ऐसा लगता है जैसे यह वैलेंटाइन का विरोधी हो। सच में वैलेंटाइन का विलोम शब्द है क्वॉरेंटाइन! कोरोना बाबा ने कई तरह के नए शब्द और दिए हैं- 'आउटब्रेक, सोशल डिस्टेंसिंग, पैंडेमिक, लॉकडाउन, सेल्फ आइसोलेशन आदि अनादि।' यह जो आउटब्रेक शब्द है अगर इसकी व्याख्या करने लगूं तो हड्डियां छूटने लगेगी क्यों कि पसीना तो पिछले पचास दिन से छूट छुटाकर छूट गया है।

इसका मतलब होता है कि ब्रेक आउट हो जाना या ब्रेकों में फंस जाना। टीवी माता पर बार-बार ब्रेकिंग न्यूज़ दिखा-दिखाकर घर में ब्रेकिंग न्यूजों का विस्फोट हुआ जा रहा है। गूगल बाबा को आउटब्रेक का मतलब पूछा तो अर्थ बताया- 'विस्फोट, धड़ाका, विद्रोह, विप्लव!' ऐसे-ऐसे अर्थ बताकर गूगल बाबा मुझे डरते हुए को फिर से डरा रहा है। खुद डरा-डरा रहकर आउटब्रेक का मतलब समझा रहा है। कोरोना बाबा ने यह शब्द दुनिया को इसलिए दिया कि दुनिया अब आउटब्रेक हो गई है और अब उसके आउट हुए ब्रेकों पर कोरोना ने कसकर एयर ब्रेक लगा दिए हैं। कहो ना प्यार से! घर में पड़े रहो आराम से!

सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब तो कोरोना ने साबुनी झागों से समझा ही दिया है। इसका अर्थ है सौ साल तक डिस्टर्ब नहीं होने वाली चीजों को भी डिस्टर्ब करने का टाइम! कोरोना बाबा ने अनसोशल करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग रखने की बात घर में सोशल बने रहकर करने की कह दी। बड़ी चक्करदार सोशल डी स्टैंडिंग की बात कह दी है! अब यह जो शब्द है न- 'आइसोलेट!' इसने तो जबरदस्त घचाघच मचा दी है। जैसे आइस में पड़ी हो प्लेट! सुनो ना! आइसोलेट से सेल्फ आइसोलेट की कथा करो ना! आइसोलेट व्यवस्था इस प्रकार की है कि इसमें आइस में लेटकर आराम करो ना। मतलब होता है चुप्पी, अलग-थलग, पृथक होकर थक थकाकर थक! या कहो आई एम सो मच लेट इन कोरोना डिबेट!

कोरोना बाबा ने एक शब्द और दिया है- 'पैंडेमिक!' डेढ़ सयानों के मुताबिक डब्ल्यूएचओ ने पैंडेमिक शब्द को लाने में बहुत देरी की है। कोरोना बाबा यह चाहता था कि पैंडेमिक शब्द जल्दी से जल्दी इस दुनिया में आ जाए। लेकिन यह शब्द जितना देरी से आया उतना ही कोरोना ने धमाल मचाया। सयाने अर्थ बताते हैं- 'सर्वव्यापी, विश्वव्यापी, विश्वमारी, महामारी!' हे कोरोना! नाराज ना होना! अब हमने पैंडेमिक शब्द को अपने जीवन में उतार लिया है। इधर कई देशों ने लॉकडाउन को अपना राष्ट्रीय गीत बना रखा है। इसमें जहां कहीं भी लॉकडाउन करना होता है वहां पर लॉक लगाकर उसे डाउन कर देना होता है।

ताला लगा कर उसको उल्टा लटका दो! सीधे-सीधे कहें तो उल्टा ताला लटका देना! लॉकडाउन का अर्थ होता है कि यह खुलने में बड़ा मुश्किल होता है। जब खुलता है तो वह धीरे-धीरे से बड़ी तरकीब और बड़ी चतुराई से ही खुलता है। तो हे देश-दुनिया वासियो! आप लॉकडाउन में लगे हैं और इस उल्टे ताले को अगर खोलेंगे तो आहिस्ता-आहिस्ता, धीरे-धीरे, सावधानी से बहुत चतुराई से खोलना! लॉकडाउन काल में जाति-धर्म के ऊपर केवल लॉकडाउन संहिता का ही पालन करना। अगर ऐसा नहीं किया तो कोरोना बाबा अपना डांस दिखाने के लिए फिर आ धमकेगा! फिर मुझे मत कहना कि जांगिड़ साहब आपने बताया ही नहीं!



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