लाकडाउन में लाइसेन्सी असलहे जमा कराये जायें: सूरज गुप्ता
| - RN. Network - Apr 7 2020 4:17PM

संकल्प मानव सेवा संस्था के प्रमुख ने घरेलू हिंसा पर जताया अफसोस

सी.एम. और डी.एम. से की जोरदार मांग

अम्बेडकरनगर। लाकडाउन की स्थिति में घरेलू हिंसा में वृद्धि की संभावना बलवती हो गई है। घरेलू हिंसा रोकने के लिए जिले के सभी लाइसेन्सी आयुद्ध जमा कराये जाने की आवश्यकता है। हालांकि अभी तक हमारे जिले में लाकडाउन अवधि में इस तरह का कोई अपराधिक मामला (एक मामले को छोड़कर) प्रकाश में नही आया है। वह मामला जो घरेलू हिंसा की श्रेणी में आता है, मालीपुर थाना क्षेत्र के सुरहुरपुर बाजार में गत दिनों पेश आया, उसकी पुनरावृत्ति न हो इसके बावत जिला प्रशासन को इधर ध्यान देने की जरूरत है। जिला प्रशासन को बस इतना करना है कि वह अविलम्ब सभी लाइसेन्सी आयुद्धों को लाकडाउन की स्थिति तक जमा करा ले।  

उक्त बातें संकल्प मानव सेवा संस्था के संस्थापक/अध्यक्ष/प्रबन्धक सूरज गुप्ता उर्फ बन्टी ने रेनबोन्यूज से कहीं। संकल्प प्रमुख ने कहा कि घरों में परिवार के साथ रहने वाले सदस्य बातों-बातों में उत्तेजित होकर हिंसा जैसे अपराध करने लगे हैं। इनके अनुसार बीते सोमवार 6 अप्रैल 2020 को जिले के मालीपुर थाना क्षेत्र में एक दम्पत्ति में घर-गृहस्थी के संचालन को लेकर आपसी विवाद हो गया, उत्तेजित पति ने अपनी पत्नी पर लाइसेन्सी बन्दूक से फायर कर दिया। पत्नी के तहरीर पर थाना मालीपुर में नामजद रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस फरार अभियुक्त (पीड़िता के पति) की तलाश में जुट गई है। 

सूरज गुप्ता ने कहा कि मालीपुर थाना क्षेत्र के सुरहुरपुर बाजार निवासी अशोक कुमार जायसवाल जो कपड़ा व्यवसाई हैं ने इस दुःखद घटना को अंजाम दिया था। उन्होंने अपनी पत्नी से वाद-विवाद के दौरान आक्रोश में आकर यह काण्ड किया। जैसा कि समाचारों से पता चला है कि क्रुद्ध अशोक जायसवाल ने अपनी पत्नी पर बन्दूक से 2 फायर किया था परन्तु संयोग अच्छा था कि निशाना चूक गया अन्यथा उनकी पत्नी की दर्दनाक मौत भी हो सकती थी। अशोक जायसवाल के इस कृत्य को घरेलू हिंसा का एक बड़ा उदाहरण माना जा सकता है। 

संकल्प के अध्यक्ष ने रेनबोन्यूज से कहा कि लाकडाउन में प्रायः संख्या में हर बड़े परिवारों में मतभिन्नता की स्थिति उत्पन्न हो गई है और आपसी तू-तू, मैं-मैं, हमसे बड़ा ज्ञानी कोई नहीं, हमारा लाइफ फण्डा ही अलग है, खाओ-पीयो मौज करो, कोरोना से मरने के पहले जिन्दगी जी लो के अलावा मितव्ययी प्रवृत्ति के पारिवारिक सदस्यों का विरोध करने पर झगड़़ा-झंझट बढ़ जाता है और यही झगड़ा बाद में घरेलू हिंसा का स्वरूप ले लेता है। आज-कल गाँव, शहर, कस्बों में इसी तरह की स्थिति बनी हुई है। हर परिवार में लगभग कपर-ठैं-ठैं सुनी जा रही है। कुछ लोग घरेलू पारम्परिक अस्त्र-शस्त्रों का इस्तेमाल कर आपस में मार-पीट कर रहे हैं तो कुछ लाइसेन्सी बन्दूक का। 

कुल मिलाकर तात्पर्य यह कि मुन्डे-मुन्डे मतिरभिन्ना यानि जितने लोग उतने मत/विचार। तब क्यों न हो पारिवार में कलह और मार। सूरज गुप्ता ने इस तरह की स्थिति पर अफसोस जाहिर किया है। उनका कहना है कि इस बावत यानि घरेलू हिंसा के वर्तमान स्वरूप के बारे में लोगों को जागरूक कैसे किया जाये। हम तो कोरोना वायरस जैसी जंग से लोहा लेने के लिए समाज के हर तबके को मानसिक और आर्थिक रूप से स्वस्थ रखने का प्रयास कर रहे हैं। इस दौरान यदि जिले के घर-परिवारों में घरेलू हिंसा उत्पन्न हो जाये तो हम कर ही क्या सकते हैं। बेहतर यह होगा कि जिला प्रशासन अविलम्ब जिले के समस्त लाइसेन्स धारकों के असलहे जमा करा ले। ऐसा होने से सुरहुरपुर (मालीपुर थाना) जैसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी। 

संकल्प मानव सेवा संस्था के प्रबन्धक सूरज गुप्ता उर्फ बन्टी गुप्ता ने रेनबोन्यूज के माध्यम से जिलाधिकारी अम्बेडकरनगर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ध्यान इस तरफ आकृष्ट कराते हुए मांग किया है कि लाकडाउन अवधि तक सभी लाइसेन्सी असलहे जमा कराये जाये। इससे छोटी-छोटी बातों में दुःखद घरेलू हिंसा जैसी वारदातें नहीं होंगी। 



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