शब-ए-बारात पर घर में नमाज अता कर सोशल डिस्टैन्सिंग नियम का करें पालन : सूरज गुप्ता
| - RN. Network - Apr 8 2020 12:58PM

संकल्प मानव सेवा संस्था के प्रमुख ने शब-ए-बारात पर की अपील

अम्बेडकरनगर। शब-ए-बारात इस्लाम धर्म का पर्व है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार इस दिन इबादत करने वाले लोगों के सारे गुनाह माफ हो जाते हैं। इसलिए लोग नमाज में अपने गुनाहों की माफी मांगने के लिए जाते हैं। लेकिन संकट की इस घड़ी में देश पर और विपत्ति न आये इसका ध्यान देना भी अत्यन्त आवश्यक है। मैं हमारी संस्था की तरफ से मुसलमान भाइयों से अपील करता हूँ कि शब-ए-बारात (8/9 अप्रैल 2020) पर घर से बाहर न निकलें। उक्त बातें संकल्प मानव सेवा संस्था के प्रबन्धक सूरज गुप्ता उर्फ बन्टी गुप्ता ने रेनबोन्यूज से वार्ता करते हुए कहीं।

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस का प्रकोप पहले से ही देश में बढ़ता जा रहा है। हाल ही में तब्दलीगी जमात के कार्यक्रम ने इसके संक्रमण की रफ्तार को और बढ़ा दिया है। हम नहीं कहते कि धार्मिक पर्व और त्योहार न मनाये जायें परन्तु जब मानव और मानवता के ऊपर खतरा बढ़ रहा हो तब ऐसी परिस्थिति में हम सबको एक जुट होकर इससे बचाव के लिए हर सम्भव प्रयास करना चाहिए। सूरज गुप्ता ने कहा कि इस समय पूरे देश में लाकडाउन चल रहा है। सरकार/सरकारें प्रशासन, पुलिस, एन.जी.ओ. सभीं लाकडाउन में नियम का पालन करने/कराने की अपील कर रहे हैं। हम भी संकल्प मानव सेवा संस्था की तरफ से यह कहना चाहेंगे कि सोशल डिस्टैन्सिंग के दृष्टिगत हमें भीड़ एकत्र नहीं करनी चाहिए। यदि हम कुछ दिन लाकडाउन में संयमित होकर घर पर रहेंगे तो आने वाले दिनों में कोरोना वायरस के कहर से बच जायेंगे। 

संकल्प मानव सेवा संस्था के प्रमुख ने कहा कि हालांकि सोशल डिस्टैन्सिंग पर प्रशासन व पुलिस महकमा तो गम्भीर है ही साथ ही इस्लाम धर्म के कई पैगम्बरों ने भी लोगों से नियम का पालन करने को कहा है। कोरोना वायरस-कोविड-19, वैश्विक महामारी-लाकडाउन और बचाव के लिए नियम के बावत कुछ भी नहीं कहना है क्योंकि ये सब तो पूरे विश्व के लोगों को अच्छी तरह नित्य प्रति खबरों/समाचारों के जरिये मालूम होता रहता है। बस हम तो चाहते हैं कि मानव जीवन के रक्षार्थ मानवता के कल्याणार्थ हम जो भी और जितना भी कर सकते हैं करें। हमें आपसी भेदभाव भूलकर एकजुटता का परिचय देते हुए एक मात्र लक्ष्य कोरोना भेदन का होना चाहिए। इसी में पूरे मानव समाज का कल्याण है। बीमारी या फिर महामारी अथव वायरस का प्रकोप जाति और धर्म देखकर नहीं होता। हम सभी मानव हैं। मानव शरीर हाड़, मांस और रक्त का बना होता है। इसकी कोई कौम, धर्म, जाति नहीं होती। 

सूरज गुप्ता ने आशा व्यक्त की है कि हम लाकडाउन में कानून का उल्लंघन नहीं करेंगे। हमारे मुसलमान भाई जमात से भी बचेंगे। शब-ए-बारात के मौके पर सोशल डिस्टैन्सिंग मेनेटेन करने के दृष्टिगत इस पर्व को अपने-अपने घरों में ही मनायेंगे। ऐसा करने से पर्व के मौके पर अता की गई नमाज में उनके गुनाह तो माफ होंगे ही साथ ही स्वयं व समाज को भी सुरक्षित रखने में योगदान देंगे। नियम कानून का पालन करने से हम जागरूक नागरिक कहलायेंगे। हमें शासन/प्रशासन/पुलिस व समाज का सहयोग करना चाहिए। इसके अलावा भ्रामक समाचारों/खबरों की अनदेखी की जानी चाहिए। ऐसा करने से हम सब के बीच का आपसी सौहार्द्र बना रहेगा। हमें धार्मिक पर्व-त्योहार संयमित रहकर मनाने की जरूरत है। 



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