फिर लॉकडाउन 2.0 बढ़ा, अब नई कड़ाही चढ़ा
| -RN. Feature Desk - Apr 14 2020 12:42PM

-रामविलास जांगिड़ 

पलंग पर तकिया कचरा-कचरा हुआ पड़ा है। तकिया खून के आंसू रोने लगा है। वह चिल्लाकर, दहाड़ कर, पेट पकड़कर जोर से रोने लगा है। हे भगवान! इस हाथी को कोई और काम लगा दे; फिर ये लॉकडाउन बढ़ा दे। यह जो बंदा पूरे दिन भर घर पर पड़ा रहता है। वह मुझ पर ही छाती, गर्दन, टांग सब धरे सड़ा रहता है। मुझे सोए हुए एक अरसा बीत गया है। यह हाथी नुमा जीव मुझ पर इतना आतंक मचा रहा है कि मेरे फेंफड़े अब हवा हो गए हैं। सांसें गले में अटकी पड़ी है। हर समय, हर अवस्था में दबाया-दबोचा जा रहा हूँ जैसे कोई बंधुआ मजदूर बना हूँ। हे भगवान! उठा ले रे, इस लॉकडाउन से कहो ये जंतु झाडू-बुहारी उठा ले।

तकिए ने जब जोर-जोर से रोना, चीखना, चिल्लाना शुरू किया तब इसी समय मोबाइल भी छाती पीटने लगा। वह हाथा जोड़ दंडवत कर रोने लगा चिल्लाने लगा। कहने लगा- हे मेरे बाप! रात के 2:00 बज गए हैं, अब तो मुझे छोड़, मुझे सोने दे। टांगों में तूने गरीब तकिये को फंसा रखा है। मुझे दोनों हाथों में जकड़ रखा है। मेरी गर्दन भारी अंगूठे में धंसा रखी है। उंगलियों को मेरी स्क्रीन में फंसा रखी है। मेरे पेट में पिछले 75 घंटों से चार्जर खौंस रखा है। मेरे सारे ऐप 12 बार खून की उल्टी कर चुके हैं। हे मेरे हाथी बाप! अब तो मुझे छोड़! ये क्या हुआ तुझे? अगला या अगली, जाने कौनसी पगली! तुझे फेसबुक व्हाट्सएप आदि पर 10 बार गुड नाइट कह चुकी है। मैंने भी 8 बार तो तुझे गुड नाइट कह दिया है। अभी तक तो मेरी छाती पर खड़ा है। हे भगवान! उठा ले रे! कहो इसे ये कागज-कलम उठा ले रे।

इसी समय जीव ने तकिया तुरंत पीठ के नीचे धर दिया। मोबाइल अब एक हाथ में कसमसाने लगा। तकिए का हार्ट घबराने लगा। लेकिन यह हाथी जैसा जीव छोड़े तो! गर्दन में फंसा-फंसा तकिया रो कर फिर से रोया। एक हाथ में फंसा मोबाइल और दूसरे हाथ में रिमोट! टीवी देवी का रिमोट रोने लगा। बिलबिलाने लगा। गरीब की जोरू सा सबकी भाभी बना। कभी हाथी के हाथ में तो कभी हथनी के हाथ में। बच्चों-बड़ों की छीना झपटी में उलझा रिमोट! दिन रात परेशान! दिन में 50 बार रिमोट का चीर हरण किया जाता। उसे हाथों से ठोक-ठोक कर फिर से ठोका जाता। उसे पीट-पीट कर फिर से पीटा जाता। कई बार शरीर पर गुदगुदी चलाकर। रिमोट के मास्क को उधेड़ा जाता।

एक हाथ से दूसरे हाथ, दूसरे से तीसरे और सभी हाथों में हैंडबॉल बना रिमोट। खील-खील हुआ जा रहा है। देवी टीवी भी बहुत परेशान हो गई है। न्यूज़ न्यूज़ न्यूज़ कोरोना कोरोना कोरोना! फिल्में सीरियल! दिखा-दिखा कर टीवी की आंखें सूज गई। मुंह कलेजे को आ गया। ये सब मिलकर कह रहे हैं भगवान उठा ले रे! लॉकडाउन की नई घड़ी में कोई और खिचड़ी पका ले रे! इधर किचन में गैस का चूल्हा लगातार जल रहा है। हर पल कुछ न कुछ उबल रहा है। हाथी खाए जा रहा है; हथिनी खिलाए जा रही है। हथिनी खाए जा रही है; हाथी खिलाए जा रहा है। तकिया, रिमोट और मोबाइल दबाए जा रहे हैं। हे जीव! देख अब फिर लॉकडाउन 2.0 बढ़ा, अब फिर कोई नई सी कड़ाही चढ़ा।



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