हे नाथ! अब सीधे ऑफिस चले जाओ
| -RN. Feature Desk - Apr 20 2020 1:27PM

-रामविलास जांगिड़

हे सखी! मेरे प्रियतम को कहो ना कि वे अब ऑफिस चले जाएं। मैं तो उनकी कुल ललना हूं। मैं उनके कुल के इसी दीपपुत्र की वधू हूं। अतः इस विषय में मेरा सीधे-सीधे उनको ऑफिस जाने के लिए निवेदन करना अनुचित है; तथापि मैं यह अनुचित कार्य भी करूंगी। अतः तुम भी एक अच्छी पड़ौसन की भांति उन्हें यह उपदेश दे दो। उन्हें कहो कि वे शीघ्र ही ऑफिस गमन करें, क्योंकि अब मॉडिफाइड लॉकडाउन आ चुका है। सभी लोग कोरोना वॉरियर के रूप में अपना काम कर रहे हैं। उनसे कहो कि हे फ्रैंड! अब यह घर में पड़े रहने का समय नहीं है। जरा मुस्कान भरे रसीले शब्दों में कहना। हे सखी!

वो तुम्हारे हर वचन का बड़ा आदर करते हैं। उनके घर में पड़े रहने से बारंबार किचन में खड़े रहकर इतना कष्ट पा चुकी हूं कि अब दुर्जन व्यक्ति भी हमारे कष्ट का अनुमान नहीं लगा सकते हैं। हे सखी! तुम्हीं मेरे प्रियतम के अति निकट हो इसलिए मैं तुम्हें अरदास कर रही हूं। उनसे कहो कि अब आपने घर में भयानक रूप से निवास कर लिया है। इतना आराम कर लिया है कि अब आराम भी घबराने लगा है। बिस्तर तकिया तक रोने लगा है। इसलिए उन्हें कहो कि वे तुरंत ही ऑफिस भाग जाएं। मुझे थीम पार्टी, किटी पार्टी, मेगा शॉपिंग और लॉन्ग ड्राइव का खूब मन कर रहा है। अभी इनके घर में रहने पर मैं जिरह वेदना में घुटती चली जा रही हूं। हर घड़ी इनके द्वारा की गई जिरह चक्की में पीसी जा रही हूं।

हे प्रियतम! अब तुम भी तो समझ जाओ। तुम भी अपने ऑफिस चले जाओ। यदि तुम घर से ऑफिस चले जाओगे तो मुझे थोड़ा शांति और आराम मिलेगा। अपने प्यारे पड़ोसी वर्मा जी से सीखो, कितने भले व्यक्ति हैं! मैं अभी लॉकडाउन की अवस्था में पूरे रात-दिन, दिन-रात किचन में ही लेटी-बैठी रहती हूं। आप ऑफिस चले जाओ मैं आपसे हीरा, मणि, माणिक्य आदि रत्न भी नहीं मांगती हूं। मैं तो केवल यह चाहती हूं कि आप ऑफिस चले जाएं। कामना यह है कि देर शाम से काम करते हुए ऑफिस से फिर घर आएं तब आप शाम को अपने साथ सब्जी, आटा और चावल आदि लेते आएं। फल-फ्रूट शहर की सबसे बड़ी मंडी से ही लेकर आएं।

ऑफिस में जाने वाले मनुष्य की बुद्धि कुछ और तेज हो जाती है; और मैं चाहती हूं कि आपकी बुद्धि और तेज हो जाए। इसलिए भी आपका ऑफिस जाना जरूरी है। हे नाथ! लॉकडाउन की लंबी अवधि में मैंने अपने नेत्रों में गहरे-गहरे आंसू भी भर लिए हैं। मैंने आपको जी भर कर के आंखों में उतार भी लिया है। मैंने तुम्हें पूरा जी भर कर के घनघोर रूप से देख भी लिया है। आपसे रात दिन जिरह की आग में जल भी चुकी हूं। हे नाथ! अब मैं आपको किस विधि समझाऊं? मेरा ह्रदय अब बड़ा कठोर हुआ जा रहा है। प्रियतम तुम्हारी जिरह में मेरा यह जी अब फटा ही जा रहा है। रात्रि को आप व्हाट्सएप की दुनिया में गोते लगाते रहते हैं। जाने कहां प्रेम पंथ निपटाते रहते हैं। हे नाथ! अब यह भोर भई है। आज के यह बर्तन मांज कर सीधे ऑफिस चले जाओ। देखो ये कोरोना भी अब दुम दबाकर भाग जाने के लिए अपना बैग जमा चुका है। अब तुम कोरोना वॉरियर का अपना रूप दिखाओ; तुरंत ऑफिस चले जाओ।



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