UP : अम्बेडकरनगर में अब रूह-अफज़ा ने किया सभी को भयग्रस्त
| By- R.N. Associate - Apr 25 2020 4:07PM

डेढ़ साल बाद पाक रमज़ान पर एकाएक रूह-अफज़ा की बिक्री बनी चर्चा का विषय

कोरोना वायरस और लाकडाउन के बीच तरह-तरह की आशंकाओं का बाजार गर्म

-रीता विश्वकर्मा

अम्बेडकरनगर। इस समय पूरा विश्व जब कोरोना संकट से जूझ रहा है और देश में इससे बचाव हेतु तरह-तरह के उपाय किये जा रहे हैं, साथ ही लाकडाउन घोषित कर दिया गया है, तब ऐसे में रूह-अफज़ा नामक शर्बत की बिक्री किया जाना हर वर्ग के लोगों में कौतूहल और जिज्ञासा का सबब बन गया है। बता दें कि रूह-अफज़ा बीते साल रमज़ान के मौके पर नहीं मिल रहा था। इसका सेवन करने वाले रोज़ेदारों को बगैर रूह-अफज़ा शर्बत के ही त्योहार मनाना पड़ा था। 

तत्समय मिली खबरों के अनुसार मुख्य रूप से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में हमदर्द नामक कम्पनी द्वारा रूह-अफज़ा जैसे सर्वप्रिय स्वादिष्ट शर्बत का निर्माण किया जा रहा था। जहाँ से इसका आयात करके भारत देश में जनता की बेहद मांग पर बेंचा जाता था। 750 एम.एल. क्षमता वाली बोतल की कीमत 125 रूपए हुआ करती थी। हमदर्द कम्पनी के मालिकों/साझीदारों में सम्पत्ति विवाद के चलते रूह-अफज़ा का निर्माण बन्द हो गया था। यही कारण था कि रूह-अफज़ा देश की बाजारों से गायब हो गया था। वर्षों तक रमज़ान के महीने में इफ्तार का हिस्सा रहा रूह-अफज़ा की अनुपलब्धता में रोज़ेदार और इसके चाहने वालों को मायूश होना पड़ा था। 

बीते वर्ष 2019 से गायब रूह-अफज़ा 2020 के 25 अप्रैल से चलने वाले पाक रमज़ान शुरू होने के पूर्व से ही बाजारों में बिकने लगा। रोज़ेदारों की खुशी का ठिकाना नहीं। वह लोग कोरोना वायरस के खौफ को भूलकर परचून की दुकानों से रूह-अफज़ा की 750 एम.एल. की बोतल 150 रूपए छपे एम.आर.पी. में खरीद रहे हैं। और रोज़े के दिन में इफ्तार और सहरी में इसका भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। इस सब के बावजूद हमदर्द कम्पनी की अधिकृत एजेन्सियों से सम्पर्क करने पर बताया गया कि पिछले डेढ़ साल से कम्पनी बन्द हो चुकी है, उनके यहाँ स्टाक में रूह-अफज़ा नहीं है। प्रश्न अब यह उठता है कि जब अधिकृत डीलर्स/एजेन्सियों के स्टाक में रूह-अफज़ा की बोतलें डेढ़ साल से नहीं हैं तब बाजारों की दुकानों पर इसकी बिक्री कैसे हो रही है? 

रेनबोन्यूज को अम्बेडकरनगर जनपद के मुख्यालयी शहर अकबरपुर/शहजादपुर की कई परचून की दुकानों पर रूह-अफज़ा की बिक्री होते हुए दिखी। इस बावत दुकानदारों ने स्पष्ट तो कुछ नहीं बताया बस इतना ही कहा कि शुक्र है कि डेढ़ साल बाद इस बार रमज़ान में यह उपलब्ध हो गया। रूह-अफज़ा जिसके चाहने वाले हर जाति-धर्म के लोग हैं, डेढ़ साल से विलुप्त एकाएक मार्केट में आये रूह-अफज़ा को लेकर सशंकित हैं। 

एक तरफ कोरोना महामारी, देश में लाकडाउन दूसरी तरफ रूह-अफज़ा का एकाएक बाजार में उपलब्धता। ऐसे में तरह-तरह की चर्चाएँ जोर पकड़ने लगी हैं। चर्चाओं में लोगों ने आशंका जाहिर किया है कि कहीं यह रूह-अफज़ा नकली तो नहीं, या पुराने स्टाक पर नया लेबल तो नहीं, या फिर वैश्विक महामारी के जनक कोरोना वायरस के प्रसार हेतु कोई साजिश तो नहीं।रूह-अफज़ा का देश में पुर्नजन्म होने से लोगों में तरह-तरह की आशंकाएँ बलवती हो गई हैं। लोग इसका सेवन करें या न करें यह नहीं समझ पा रहे हैं। 

रेनबोन्यूज रूह-अफज़ा की मार्केट में आवक, लोगों द्वारा सेवन और उत्पन्न आशंकाओं के बीच होने वाली चर्चाओं को इस लिए प्रकाशित कर रहा है शायद कोरोना वायरस या फिर जन जीवन/स्वास्थ्य से सरोकार रखने वाले सरकारी ओहदेदार इसे गम्भीरता से लेंगे। हो सकता है कि रूह-अफज़ा को लेकर लोगों की आशंका निर्मूल हो या फिर कोई और बात। बहरहाल इस समय कोरोना त्रासदी के समय खान-पान पर विशेष ध्यान देने वाले प्रबुद्ध वर्गीय जागरूक लोगों में रूह-अफज़ा की एकाएक उपलब्धता, बिक्री होना और लोगों द्वारा इसका इस्तेमाल किया जाना चिन्ता का विषय बना हुआ है। 

-रीता विश्वकर्मा



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