सवाल
| -RN. Feature Desk - Apr 27 2020 6:05PM

                                                                                                        -ए0 आर0 आज़ाद

लाज़मी है सवाल
जब मन दुखी हो
और
कोई रास्ता नज़र नहीं आता हो

सवाल 
वक़्त ने दिल पे ऐसे चस्पा कर दिया है
जैसे
इन्कम टैक्स का नोटिस

सवाल
मन में कौंधता है
जब बिलखता है कोई बच्चा,
भूख-भूख
और 
रोटी- रोटी कहकर एड़ियां रगड़ता है

फिर 
सवाल मन में कौंधता है
जब बच्चे के एड़ियां रगड़ने से
पानी निकल पड़ता है
तो फिर रोटियां क्यों नहीं?

सवाल फिर वही 
नामुराद बदनसीब बच्चे की मां
अपनी चप्पलें घिसने के बावजूद
दो जून की रोटी क्यों नहीं जुटा पाती है

फिर सवाल 
यक्ष प्रश्न बन जाता है
सरकार
सारे वादों के बावजूद
लोगों की भुखमरी दूर क्यों नहीं कर सकती

सवाल ज़हन में घेरा बनाता है
रोटी और पेट का रिश्ता
मधुर होते हुए भी विषैला कैसे हो गया

रोटी 
कब से अमीरी और ग़रीबी देखकर 
थाल की शोभा बढ़ाने लगी

सवाल
नाना प्रकार के मन में उठते है
रोटी को धुआं क्यों बना दिया गया
जो सिर्फ़ दिखती है
और 
पेट में आग लगाकर
धुएं की तरह आसमान में उड़ जाती है

लॉक डाउन में
रोटी का तमाशा सरकारें दिखा रहीं हैं

अखबार में अनाज है
गेहूं और चावल है
चीनी और तेल है
चैनल पर भी यही खेल है

तस्वीर दिखाकर
पेट भरने की तकनीक सरकार ने खोज ली है
हमारी देशप्रेमी मीडिया
इसे पांच हज़ार वर्षों की
सबसे बड़ी उपलब्धि मान रही है

उपलब्धि
देशप्रेमी मीडिया ने तब भी मानी थी
जब थाली पिटी गई थी
जब 
घर को अंधकारमय कर
आसमान से प्रकाश फैलाकर
धरती को सुनहरी रौशनी 
प्रदान करने वाले चांद को 
टॉर्च दिखाया जा रहा था
कोरोना की मौत,
मातम
और
महामारी पर पटाखे फोरे जा रहे थे
बन्दूकों से गोली दागी जा रही थी

सवाल
फिर मन में उठता है
अगर देशप्रेमी मीडिया नहीं होती 
तो कैसे समझ पाते इसका महत्व

देशप्रेमी मीडिया
देश के लिए वरदान है
जब तक मीडिया देशप्रेमी बनी रहेगी
लोग
भूख से नहीं मरेंगे
आपदा से नहीं मरेंगे
महामारी से नहीं मरेंगे
किसी संकट से नहीं मरेंगे

इसलिए कि
देशप्रेमी मीडिया ने भी शपथ ली है
सच नहीं बोलेंगे
सच नहीं सुनेंगे
सच का साथ नहीं लेंगे
सच का साथ नहीं देंगे
सच को सामने आने नहीं देंगे
और
सच का सामना नहीं करेंगे

ग़लती से सच सामने आ भी गया 
तो ब्रेकिंग से उसका खंडन करेंगे
और
इसमें पड़ोसी देश का हाथ बताकर
किसी बड़े साज़िश से इंकार भी नहीं करेंगे

ज़ाहिर है
जबतक है देशप्रेमी मीडिया
चैन से बंसी बजाइए

बस रोज़गार की बात मत कीजिए
राशन की बात मत कीजिए
सड़कें टूटी होने की शिकायत मत कीजिए
अस्पताल बीमार हो
तो किसी को कानों कान खबर मत होने दीजिए

कहने का लब्बोलुआब है
मुंह सी लीजिए
डरने की आदत डाल लीजिए
शिकायत करना छोड़ दीजिए
और
जो हो रहा है उसे अपनी नियति समझिए

अगर
नहीं डरे 
और रहे डटे
तो फिर कहां जाएंगे?
कौन सुनेगा !
मंदिर में क़ैद कर दिए गए ईश्वर!

चर्च बंद
कैसे करेंगे प्रभु ईशा से विनती!

क्या लगता है
बाहेगुरु सुन लेंगे आपकी आवाज़!
जान लीजिए 
वो भी गुरुद्वारे में क़ैद कर दिए गए हैं!

बचे अल्लाह
उनपर तो ख़ास नज़र रखी गई है
किसी मुसलमान को तड़पता देखकर
निकल न सकें बाहर
इसलिए उन्हें
इतने तालों में जर दिए गए हैं कि
किसी चीत्कार को वो सुन न सकें
किसी ज़ुल्म का उन्हें पता न चल सके
किसी नाइंसाफ़ी पर
उनका क्रोध किसी का बाल बांका न कर सके

यही समझ रहा है देशप्रेमी मीडिया
आपको भी यही समझा रहा है
आप समझिए...!



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