ज़िंदगी
| -RN. Feature Desk - Apr 30 2020 2:41PM

                                                                                                                      -ए.आर. आज़ाद

ज़िंदगी क्या है
एक फूल है

फूल बनकर खिले तो ज़िंदगी
खिलकर मिले तो ज़िंदगी
मिलकर जिए तो ज़िंदगी
कांटों के संग रहे तो ज़िंदगी

ख़ुशबू बिखेरे तो ज़िंदगी
चमन में खिले तो ज़िंदगी
खिलकर खिलखिलाए तो ज़िंदगी
खिलखिलाकर हंस पड़े तो ज़िंदगी

ज़िंदगी 
अगर फूल नहीं 
तो फिर वो ज़िंदगी नहीं
ज़िंदगी में
अगर कांटे नहीं
तो फिर वो ज़िंदगी नहीं

कांटे 
ज़िंदगी के हौसले हैं
और
फूल ज़िंदगी की रूहानियत
दोनों का संगम
हमें जिलाती
दिल में तमन्ना पैदा करती है
एक आरज़ू देती है
एक पहल करती है
दुनिया को अपने जैसा बंनाने की
खिलखिलाने की
चिड़ियों की तरह चहचहाने की
मोर की तरह मगन होकर नाचने की
बहार की तरह चमन को गुलज़ार करने की

हम
पहले फूल बने
सुगंध बिखेरना आ जाएगा
हम 
कोयल बनें
चहचहाना आ जाएगा
हम
मोर बनें
नाचना आ जाएगा
हम
बहार बनें
चमन को गुलज़ार होना आ जाएगा

हम
कांटों के साथ रहना सीखें
मुहब्बत में जीना आ जाएगा

ज़िंदगी
नफ़रत नहीं
मुहब्बत का नाम है
यही है ज़िंदगी
यही ज़िंदगी का पैग़ाम है....!



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