तोड़ना ही होगा नेताओं-पूंजीपतियों और नौकरशाह का गठबंधन
| Rainbow News - Jun 14 2017 1:57PM

आज की तारीख में राजनीतिक रूप से देश सबसे नाजुक दौर से गुजर रहा है। राजनीतिक दल यदि वोटबैंक की राजनीति तक सिमट कर रह गए हैं तो सामाजिक फंडिंग तक। स्थिति यह है कि लोग देश को चलाने वाले तंत्रों विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया पर विश्वास करने को तैयार नहीं। केंद्र सरकार इन तंत्रों को अपने नियंत्रण में रखना चाहती है तो पूंजीपति सरकारों को और नौकरशाह का यह हाल है कि जहां कोई भी बैठा हैं बस लूटने में लगा है। ऐसे में यदि कोई ईमानदार व्यक्ति कहीं से आ भी जाए तो उसे इतना परेशान कर दिया जाता है कि या तो वह इस व्यवस्था में ढल जाता है या फिर उसे वहां से हटना पड़ता है नहीं तो हटा दिया जाता है।

लोगों का भी यही हाल हो गया है गलत काम का विरोध करने की क्षमता उनमें कम होती जा रही है। हर कोई प्रभावशील व्यक्ति के ओर खड़ा दिखाई दे रहा है। स्वार्थ आदमी की जिंदगी पर इतना हावी होता जा रहा है त्याग बलिदान और कुर्बानी जैसे शब्द आदमी के व्यक्तित्व से गायब से होते जा रहे हैं। यही वजह है कि देश में आंदोलन तो बहुत हो रहे हैं पर जनांदोलन नहीं। मुट्ठीभर लोगों ने लोगों को रोजी रोटी में ऐसे उलझकर रख दिया है कि हमारे देश का 90 फीसद आदमी जिंदगीभर असुरक्षा की भावना लिए घुमता रहता है। राजनेताओं-पूंजीपतियों और नॉकरशाह ने अपने को सुरक्षित रखने के लिए लोगों को धर्म-जाति और पेशे के रूप में बांट है। किसी भी बात का कितना भी विरोध कर लो पर हो कुछ भी नहीं प् रहा है। न्याय देने वाले ही शोषक बने हुए हैं। कौन बनेगा कमजोर की आवाज ?

ऐसे में प्रश्न उठता है कि फिर किया क्या जाए ? व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि लड़ाई गरीब और अमीर के बीच की है। यदि किसी अमीर को गरीबों की लड़ाई लड़नी है तो उसे भी अभाव में जिंदगी में आने वाली परेशानियों को समझना होगा। समाज की यह बड़ी विडंबना है कि दो वक्त की रोटी मिलने वाले लोग भी अपने को अमीरों में जोड़ने लगे हैं। उन्हें भी गलत फहमी से निकलकर 90 फीसद में अपने को समझना होगा। अब समय आ गया है कि सड़कों पर उतरकर व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोला जाए। अब समय आ गया है कि पूंजीपतियों की संपत्ति में भी अपना हक़ माँगा जाए।

अब देश में असली समाजवाद लाना होगा। गैर बराबरी का डट कर विरोध करना होगा। राजनीति और समाजसेवा में विचारधारा से भटके लोगों को नकार कर अच्छे लोगों को आगे लाना होगा। जातिवाद-धर्मवाद और परिवारवाद को जड़ से खत्म करना होगा। जुझारू, चरित्रवान और ईमानदार लोगों को राजनीति में लाना होगा। किसान और मजदूर पृष्ठभूमि से जुड़े लोगों को विधानसभाओं और लोकसभा में पहुंचना होगा। किसान और मजदूर को उसका हक़ दिलवाना होगा। तब आएगा देश में असली समाजवाद लोहिया का समाजवाद। इसके लिए हम संघर्ष कर रहे हैं। यदि अभी भी नहीं सम्भले तो आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी।

-चरण सिंह राजपूत



Browse By Tags



Other News