सेन्ट पीटर्स स्कूल प्रबन्धतन्त्र के रवैय्ये से छात्र-अभिभावक परेशान
| - RN. Network - May 12 2020 3:46PM

समाजसेवी सूरज गुप्ता ने सी.एम. योगी से की विद्यालयों में फीस माफी की मांग

देश में कोविड-19 के संक्रमण से बचाव हेतु बीते मार्च माह के 25 तारीख से पूर्णतया लाकडाउन घोषित किया गया है, फलतः सभी शिक्षण संस्थाएँ और भीड़-भाड़ व महत्वपूर्ण सार्वजनिक निजी संस्थाओं/प्रतिष्ठानों में तालाबन्दी चल रही है। बीच-बीच में देश के कई राज्यों में कोरोना वायरस के प्रभाव के घटने-बढ़ने से लाकडाउन में ढील और सख्ती बरती जा रही है। बहरहाल! उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जनपद में लाकडाउन सख्ती से लागू है। 45 दिनों से कोरोना मुक्त रहने वाला यह जिला बीते दिवस कोरोना पॉजिटिव मरीजों के मिलने से अतिसंवेदनशील हो गया। लाकडाउन घोषणा के उपरान्त प्रदेश और केन्द्र सरकार द्वारा विभिन्न राज्यों में शिक्षण संस्थाओं में फीस व परिवहन शुल्क में छूट दिये जाने का निर्देश दिया गया था, साथ ही अन्य विभागीय, राजकीय देय राजस्वों की वसूली में ढिलाई बरते जाने की बातें कही गई थीं। 

लाकडाउन की स्थिति में काम-काज ठप्प, रोजी-रोटी की आपा-धापी, आर्थिक रूप से तंग लोगों के समक्ष दो वक्त की रोटी के लाले, लोग निर्माण इकाइयों के ठप्प होने की वजह से एकदम बेरोजगार से होकर पेट पर हाथ रखकर भूखों सोने को मजबूर। सर्वत्र हाहाकार......अब ऐसे में अम्बेडकरनगर जिले के समस्त शिक्षण संस्थाओं में बीते महीने की फीस वसूली किया जाना अत्यन्त शोचनीय बनता जा रहा है। नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया है। महंगे निजी प्रबन्धन के स्कूलों व मिशनरी कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से फीस व परिवहन शुल्क की वसूली किया जाना अवश्य ही चिन्ता का सबब बना हुआ है। महंगी फीस और परिवहन शुल्क ऊपर से लाकडाउन में आर्थिक तंगी ठीक उसी तरह जैसे कोढ़ में खाज। कोई सुनवाई नहीं, कोई राहत नहीं, सरकार का कोई स्पष्ट आदेश व निर्देश नहीं। आम आदमी अटकलों के बीच ही उलझा हुआ है। 

कभी बिजली का बिल तो कभी अन्य राजस्व देयों के बोझ को लेकर आम नागरिकों की कमर झुकने लगी है। यदि लाकडाउन ऐसे ही चलता रहा तो आदमी की कमर टूट जायेगी साथ ही आदमी ही विलुप्त होने की कगार पर पहुँच जायेगा। विद्यालयी समस्याओं को लेकर जिले का हर तबका परेशान हाल है। नया सत्र, फीस, नई पुस्तकें, इनके दाम बीते सत्र से कई गुना अधिक, बैग, यूनिफॉर्म आदि....आदि.......आदि खर्चों को लेकर आम आदमी खप्तुल हवाश।  कैसे पढ़ायें अपने पाल्यों को इन महंगे विद्यालयों में। 

इन सब समस्याओं को लेकर चिन्तित जिले के युवा समाजसेवी सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता ने रेनबोन्यूज से बात करते हुए कहा कि कोरोना वायरस के कारण लाकडाउन की वजह से प्रदेश के सभी स्कूलों को यह निर्देश दिया जा चुका है कि वह अभिभावकों पर फीस लेने का दबाव न बनायें, वहीं सरकार ने यह भी निर्देशित किया था कि परिवहन शुल्क भी न वसूला जाये। बावजूद इसके शिकायतें आ रही हैं कि स्कूलों के प्रबन्धतन्त्र व परिवाहन चालक अभिभावकों से फोन और व्हाट्सएप्प के जरिये संदेश भेजकर शुल्क (फीस) देने का दबाव बना रहे हैं। हालांकि इस तरह की खबरों के बारे में संज्ञान लेते हुए प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा (उ.प्र.) आराधना शुक्ला ने सवाल उठाया था कि जब स्कूल खुले ही नहीं है और बच्चे विद्यालय जा ही नहीं रहे हैं ऐसे में परिवहन शुल्क लेने का ख्याल कहाँ से आया। 

इसी के साथ प्रमुख सचिव ने सभी जिलाधिकारियों व जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि फीस व परिवहन शुल्क वसूली करने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। समाज सेवी सूरज गुप्ता ने कहा कि प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला ने बीते माह ही कहा था कि लाकडाउन की अवधि में अभी सभी निजी व सरकारी स्कूल बन्द हैं, ऐसे में जब छात्र-छात्राएँ स्कूल जा ही नहीं रहे हैं तो इस तरह के संदेश भेजकर उनसे शुल्क उगाही कैसे की जा सकती है। बन्टी गुप्ता ने कहा कि प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला ने कई बार स्कूल से फीस न मांगने की बात भी कही है। समाजसेवी के अनुसार जिलाधिकारियों व डी.आई.ओ.एस. को दिये गये निर्देश में प्रमुख सचिव ने लिखा है कि स्कूल फीस न देने के कारण यदि किसी छात्र व छात्रा को उक्त विद्यालय ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित रख रहा है तो उस स्कूल को नोटिस जारी कर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाये। 

विद्यार्थी केन्द्र जहाँ मिलती हैं सेन्ट पीटर्स की पुस्तकें

जिले के प्रमुख समाजसेवी संगठन संकल्प मानव सेवा संस्था के संस्थापक सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता ने रेनबोन्यूज से बच्चों, अभिभावकों और विद्यालयी प्रबन्धतन्त्रों के बीच चल रही रस्सा कशी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होने कहा कि बीते माह अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) महेन्द्र देव ने भी उत्तर प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से एक रिपोर्ट मांगी थी जिसमें पूछा गया है कि इन स्कूलों में कितने बड़े व छोटे वाहन हैं, इनकी संख्या क्या है व इनकी फीस कितनी है? अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) द्वारा प्रेषित पत्र में लिखा गया है कि विद्यालयों द्वारा फीस कितने समय में ली जाती यानि प्रतिमाह या तीन महीने में...आदि......आदि......आदि। 

सूरज गुप्ता ने कहा कि इन सबके बावजूद शासन के आदेश को धता बताते हुए निजी विद्यालयों द्वारा महंगी फीस, परिवहन शुल्क वसूला जा रहा है साथ ही महंगी पुस्तकें छात्र-छात्राओं को स्वयं द्वारा बेंची जा रही हैं। अम्बेडकरनगर जिला मुख्यालय शहर अकबरपुर स्थित अंग्रेजी माध्यम के सर्वाधिक महंगे सेन्ट पीटर्स स्कूल की बात ही दीगर है। इस स्कूल द्वारा नये सत्र के शुरूआत से ही महंगी पुस्तकों की बिक्री शुरू करा दी गई है। सूरज गुप्ता (युवा समाज सेवी) ने कहा कि फीस वसूली के लिए सेन्ट पीटर्स स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं व उनके अभिभावकों के मोबाइल नम्बरों पर संदेश भेजा जा रहा है।

समाज सेवी के अनुसार इस समय जबकि कोविड-19 के कहर से बचने के लिए अम्बेडकरनगर जिले में लाकडाउन और भी सख्त कर दिया गया है, साथ ही सभी शिक्षण व अन्य महत्वपूर्ण संस्थान/प्रतिष्ठान बन्द हैं और लोग सोशल डिस्टैन्सिंग नियम का पालन करने के लिए अपने-अपने घरों में कैद हैं तब ऐसे में सेन्ट पीटर्स स्कूल अकबरपुर के प्रबन्धतन्त्र, प्रधानाचार्य और अन्य मुलाज़िमों द्वारा अभिभावकों को संदेश भेजकर फीस की डिमान्ड करना कहाँ तक उचित है। समाजसेवी ने कहा कि अब तक बहुत से ऐसे अभिभावकों के बारे में पता चला है जो सेन्ट पीटर्स स्कूल द्वारा फीस वसूली के सम्बन्ध में भेजे गये संदेशों को पढ़कर डिप्रेशन (अवसाद) में आ गये। 

अम्बेडकरनगर के प्रमुख समाज सेवी संगठन संकल्प के सूरज गुप्ता उर्फ बन्टी गुप्ता ने बताया कि सेन्ट पीटर्स स्कूल द्वारा एक पुस्तक केन्द्र खोला गया है, जिस पर विद्यालय और बोर्ड पाठ्यक्रम की पुस्तकें मुँह मांगी कीमत पर छात्र-छात्राओं व अभिभावकों को बेंची जाती हैं। अकबरपुर के बी.एन.इण्टर कॉलेज के ठीक सामने विद्यार्थी केन्द्र नाम से पुस्तक और स्टेशनरी की दुकान संचालित होती है, जिस पर सेन्ट पीटर्स स्कूल की पुस्तकें, कॉपियाँ तथा अन्य स्टेशनरी महंगी कीमत पर बेंची जा रही है। इस तरह के कारोबार पर आज तक नियंत्रण नहीं लग सका है। जबकि मीडिया के जरिये अनेकों बार सेन्ट पीटर्स स्कूल अकबरपुर द्वारा किये जा रहे इस तरह के शोषण की खबरें प्रकाशित व प्रसारित की जा चुकी हैं। 

सूरज गुप्ता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जोरदार मांग की है कि लाकडाउन की स्थिति में बन्द चल रहे समस्त विद्यालयों की शिक्षण व परिवहन फीस माफ किये जोन सम्बन्धी एक आदेश अविलम्ब जारी किया जाये। इस आदेश की प्रति प्रदेश के समस्त जिलाधिकारियों, डी.आई.ओ.एस. तथा विद्यालयी प्रबन्धतन्त्र को प्रेषित किया जाये साथ ही इस आदेश को सर्वसाधारण के सूचनार्थ प्रिन्ट मीडिया व अन्य माध्यमों के जरिये प्रकाशित/प्रसारित करवाया जाये। उनके द्वारा किया गया यह कार्य जनहित में होगा, यही समय की मांग हैं।

इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से समाजसेवी सूरज गुप्ता ने आग्रह किया है कि सेन्ट पीटर्स जैसे सर्वाधिक महंगे अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय में की जा रही अनापेक्षित फीस वसूली, वाहन शुल्क वसूली, पुस्तकों की महंगी बिक्री के बारे में गहन जाँच कराई जाये। यह जाँच किसी बड़ी व तटस्थ एजेन्सी द्वारा कराई जानी आवश्यक है तभी सेन्ट पीटर्स स्कूल द्वारा की जा रही मनमानी वसूली के बावत दूध का दूध और पानी का पानी होगा, तदुपरान्त आवश्यक एवं कड़ी कार्रवाई किये जाने पर आम अभिभावकों छात्र-छात्राओं को न्याय व राहत मिलेगी। 

सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता, संस्थापक- संकल्प मानव सेवा संस्था, अम्बेडकरनगर (उ.प्र.) 



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