जय हो! जय-जय मेरी मधुशाला!
| -RN. Feature Desk - May 13 2020 5:35PM

-रामविलास जांगिड़

जिन शराबियों को हमेशा तिरस्कृत किया जाता है उन सभी ने आज से देश की अर्थव्यवस्था की बागडोर अपने हाथों में ले ली है। रेड, ऑरेंज और ग्रीन सब प्रकार के जोन पर ये वाइन जोन भारी पड़ रहा है। लॉकडाउन 3.0 के नए वर्जन पर देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए महान शराबी गण रात 1:00 बजे से ही शराब की दुकानों के सामने बनाए गोल घेरों में सोशल डिस्टेंसिंग रखते हुए 15 किलोमीटर लंबी-लंबी कई लाइनों में मास्क लगाकर खड़े हो गए हैं। कब दुकान खुले और कब देश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दे दें, वे इसके लिए बेकरार हैं। जिन दुकानों पर सोशल डिस्टेंसिंग के गोल घेरे नहीं बने हुए हैं उनके सामने मोटरसाइकिल धारक उन बंद दुकानों के सामने देर रात से ही गोल चक्कर काट-काटकर दुकान खुलने की इंतजार में विरह की वेदना में तप रहे हैं।

सयाने कहते हैं कि कोरोना से बचने के लिए इम्यूनिटी पावर बढ़ाना चाहिए लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि आखिर इम्यूनिटी पावर बढ़ाएं किसका? सयाने यह भी कहते हैं कि शराब पीने से इम्यूनिटी पावर कम हो जाता है, लेकिन सरकार की अर्थव्यवस्था का इम्यूनिटी पावर बढ़ जाता है। इसलिए सरकारी कोरोना को मारने के लिए शराब का सेवन जरूरी है। कई शराब की दुकानों पर भीड़ लगी हुई है। एक मेला भरा हुआ है। पास में नमकीन, चिप्स, मीट आदि की व्यवस्था की अभी कमी है। क्या करें! इनसे अभी ज्यादा राजस्व नहीं मिलता है न! यह अच्छी बात है कि शराबी भाई अर्थव्यवस्था को बल देने के लिए बेताब हुए जा रहे हैं।

गरीब और मध्यम वर्ग के ये लोग शराब की दुकानों पर मक्खियों की तरह मंडरा रहे हैं। अपना लीवर खराब करते हुए देश का लीवर ठीक करने पर उतारू! अमीर शराबी तो पहले से ही महा लॉकडाउन और लॉकडाउन के बाप में भी दारू से भीतर-बाहर हर तरफ से अपना पूरा शरीर सैनिटाइज कर रहे थे। वे कभी लंबी लाइन का हिस्सा नहीं रहते, इसलिए उनको अतिरिक्त प्रणाम करने की जरूरत है। ये सेटिंग बाजी से अंगूर की बेटी दारू आदि मंगवा कर लगातार देश की अर्थव्यवस्था में बड़ी गोपनीयता से सहयोग दे रहे हैं। जरा एक बार और प्रणाम कर लूं इन्हें क्यों कि ये सज्जन दारू पीकर दारू नहीं पीने का टिकटॉक जरूर चेपेंगे।

वैसे सरकार को अब समस्त दारू शास्त्रियों को कोरोना वॉरियर के रूप में स्थाई मान्यता देनी चाहिए। इनका ताली बजाकर, ताली सजाकर, मोमबत्ती जलाकर, फूल उड़ाकर भारी मात्रा में स्वागत करना चाहिए। देश हित में दारू पीने के लिए जान जोखिम में डालकर, कोरोना की परवाह किए बगैर भारी भीड़ में घुसकर शराब का एक पव्वा लाने वाले वीर पुरुष को 'मधुविभूषण' देकर सम्मानित किया ही जाना चाहिए। किसी और मैं आंखें फैरूं दिखलाई देती मधुशाला! खाली पेट चौपट धंधा हाथ में बोतल और है प्याला! दारूखाना खुला हुआ और सभी पे है ताला! खाली पेट सजे चारों ओर नहीं पेट में एक निवाला! जय हो! जय हो! जय-जय मेरी मधुशाला!



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