अम्बेडकरनगर के वन अधिकारी वी.के. मिश्र का प्रकृति प्रेम
| By- R.N. Associate - May 15 2020 4:41PM

क्षिति, जल, पावक, गगन, समीर.............इन पाँच तत्वों से मिलकर मानव शरीर की रचना हुई है। क्षिति यानि पृथ्वी, जल यानि पानी, पावक यानि अग्नि, गगन यानि आकाश तथा समीर यानि वायु ये पाँचो तत्व एक पिण्ड के रूप में जब पृथ्वी पर विद्यमान होते हैं, तब उन्हें मानव कहा जाता है। मानव सभ्य, शिक्षित समाज का निर्माण करता है और उसके इकाई के रूप में स्वयं को हर तरह से योग्य रखता है। पूरे संसार में मानव ही एक ऐसा प्राणी है जो शिक्षित और सभ्य कहा जाता है। 

वर्तमान में धरती पर विद्यमान मानव के ही इर्द-गिर्द सम्पूर्ण सृष्टि सिमटी हुई है। सभी व्यवस्थाएँ मानव कल्याण के लिए ही बनाई गई हैं। इन्हीं का कार्यान्वयन व क्रियान्वयन मानव समाज के अन्य क्षेत्र में जिम्मेदारों द्वारा किया जाता है। मानव व मानवता की रक्षा के लिए पृथ्वी पर अनेकों हिस्सों में भूखण्डों का विभाजन करके देश/प्रदेश की स्थापना की गई है। जहाँ मानव कल्याण हेतु व्यवस्थाएँ दी गई हैं, कायदे-कानून बनाये गये हैं। जिन पर अमल करके ही मानव के कल्याण व विकास के बारे में सभी कार्य किए जा रहे हैं। 

पृथ्वी- जिसका 3/4 (तीन चौथाई) भाग पानी और 1/4 (एक चौथाई) भाग जमीन होता है। इसी जमीन पर उपरोक्त पाँचों तत्वों से निर्मित मानव निवास करता है। मानव के लिए भोजन, पानी, वायु की अवश्यकता होती है, ठीक उसी तरह पूरी धरती को जीवित रखने के लिए पर्यावरण का संतुलित होना आवश्यक है। धरती के हर प्राणी का जीवन व अस्तित्व एक दूसरे का पूरक होता है। यदि ऐसा न होता तो शायद धरती पर जीवन ही न रहता। वह चाहे मानवों का हो या फिर पशु-पक्षियों का। मानव थलचर होता है। आकाश में उड़ने वाले जीव के नभचर या पक्षी कहा जाता है। 

ठीक इसी तरह जल यानि पानी के अन्दर रहने वाले जीव को जलचर कहते हैं। इन तीनों के अलावा धरती के उस भाग जिस पर हरे, भरे वृक्ष आच्छादित हों उसे वन कहा जाता है। जीवन के लिए प्राण वायु सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है, और यह हरे भरे वृक्षों से ही मिलती है। पर्यावरण सन्तुलन का अभिप्राय यह होता है कि धरती पर सभी प्राणी स्वस्थ हों और इनके जीवन के लिए महत्वपूर्ण तत्व की आपूर्ति करने वाले जीव-जन्तु, पेड़-पौधे भी जीवित व अस्तित्व में हों। यही प्रकृति है। जहाँ मानव, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, नदी-नाले, तरह-तरह के जीव-जन्तु एक दूसरे के पूरक बने स्वच्छन्द रह रहे हों। 

पृथ्वी पर रहने वाले छोटे से लेकर दीर्घकायी जन्तु, पेड़-पौधे, नभचर, जलचर के सामंजस्य से ही स्वस्थ प्राणी जीवनचक्र संचालित होता है। इस तरह की अवधारणा रखने वाले एक शिक्षित युवा व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी रूझान प्रकृति और इससे जुड़े जीव-जन्तुओं, पेड़-पौधों की तरफ कुछ ज्यादा ही है। जिसने अपने जीवन के इस पड़ाव पर पक्षी-प्रेम के वशीभूत प्रकृति को काफी करीब से देखना व अनुभव करना शुरू कर दिया है। जी हाँ! आइए अब आपकी जिज्ञासा को शान्त करते हुए बता दें कि वह स्मार्ट, हैण्डसम पर्सनैलिटी एक राजकीय ओहदेदार है और वन विभाग में वनाधिकारी है। 

उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले के वन विभाग में रेंजर के पद पर आसीन वी.के. मिश्रा इस समय जंगल और पशु-पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों को करीब से देखकर उनपर अध्ययन कर रहे हैं। प्रकृति प्रेम में डूबा यह युवा प्रकृति प्रेमी अपने आस-पास व अन्य जगहों जहाँ पर वह जाता हैं पक्षियों की चहचहाहट को अपने कैमरे में कैद करने लगते हैं। वी.के. मिश्रा के इस प्रकृति प्रेम को देखकर हर कोई सहज ही अन्दाजा लगा सकता है कि यह युवा, स्मार्ट, शिक्षित व्यक्ति कितना प्रकृति प्रेम के प्रति जुनूनी है।

वी.के. मिश्रा क्षेत्रीय वन अधिकारी का पक्षी प्रेम इस समय वन विभाग के सभी ओहदेदारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। मीडिया के इनके खासम-खास इनके इस प्रकृति व पक्षी प्रेम को अपने-अपने तरीके से आलेखबद्ध कर प्रकाशित व प्रसारित करने की होड़ में लग गये हैं। यहाँ हम वी.के. मिश्रा क्षेत्रीय वन अधिकारी अकबरपुर के द्वारा अपने कैमरे में कैद कुछ पक्षीयों के चित्रों को प्रकाशित कर रहे हैं। पाठक स्वयं अन्दाजा लगायें कि यह वन अधिकारी जो एक कर्तव्यनिष्ठ, कार्य-कुशल, युवा, हंसमुख, मिलनसार व्यक्ति हैं, प्रकृति के कितने करीब हैं और पक्षियों से कितना प्रेम करते हैं। 

यहाँ उनके कैमरे में कैद पक्षियों की फोटो बयाँ कर रही है उनका पक्षी प्रेम...

अमूमन यह देखा गया है कि वन विभाग में कार्यरत मुलाज़िम पौधरोपण, ट्री गार्ड, हरे वृक्षों की अवैध कटान, आरामशीनों का पंजीयन, कभी-कभार वन्य-जन्तुओं जैसे लोमड़ी, सियार, भेड़िया, नीलगाय, हिरन, अजगर, जंगली सुअर तथा तोता, मैना, बुलबुल आदि पक्षियों की सामान्य प्रजातियों तक ही सरोकार रखते हैं। राजकीय/विभागीय कार्यों के आधिक्य की वजह से वन विभाग के मुलाज़िमों को प्रकृति प्रेम जैसे अतिरिक्त कार्य की तरफ कम ही रूझान होता है, परन्तु इन सबसे इतर क्षेत्रीय वन अधिकारी वी.के. मिश्र का जुनून पक्षी प्रेम की तरफ है। उनके इस पक्षी प्रेम की व्यापक रूप से चर्चा होना भी स्वाभाविक है। 

हमने इस बावत क्षेत्रीय वन अधिकारी वी.के. मिश्र से बात किया और प्रकृति के बारे में उनका विचार जानना चाहा तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रकृति की व्याख्या करना किसी भी व्यक्ति के सामर्थ्य में नहीं। पहले तो बता दें कि हमारे यहाँ प्रति वर्ष 15 लाख हेक्टेयर वन नष्ट हो रहे हैं। जबकि प्रतिवर्ष वन लगाने यानि पौधरोपण की अधिकतम सीमा 3 लाख 26 हजार हेक्टेयर है। यही हाल रहा तो आगामी कुछ दशकों में हमारी धरती वन विहीन हो जायेगी और तब ऐसी स्थिति में हमारा प्रकृति प्रेम धरा का धरा रह जाएगा। हमें वन संरक्षण और पौधरोपण की तरफ विशेष ध्यान देने की जरूरत है। धरती को वन विहीन होने से बचाना अति आवश्यक है। 

हमें पर्यावरण पर विशेष ध्यान देना है इसे विषैली गैसों के आधिक्य से बचाना है। वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग हमारे लिए चिन्ता का विषय है। हालात यदि इसी तरह रहे, प्रकृति के मुख्य अंग वनों का नष्ट होना बन्द नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं, जब धरती पर जीव एक-एक बूंद पानी के लिए तरसने लगेगा। वी.के मिश्र ने तफ्शील से बताया कि तापमान में बढ़ोत्तरी, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण आसंतुलन नष्ट हो रहे वनों की वजह से हो रहा है। 

मिश्र ने कहा कि प्रकृति किसी के साथ भेदभाव या पक्षपात नहीं करती। इसके द्वार सबके लिए समान रूप से खुले हैं। जब हम प्रकृति से अनावश्यक खिलवाड़ करते हैं तब उसके कोप का भाजन बनना पड़ता है। भूकम्प, सूखा, बाढ़, सैलाब, तूफान आदि प्रकृति के क्रुद्ध होने का परिचायक है। प्रकृति से मनुष्य का सम्बन्ध अलगाव का नहीं है। प्रेम उसका क्षेत्र है, सचमुच प्रकृति से प्रेम हमें उन्नति की ओर ले जाता है। जब भी हम प्रकृति से अलगाव की तरफ होते हैं तब हमारे सभी कार्यों की अधोगति होती है। बेहतर यही है कि हम प्रकृति से प्रेम करें। हर जीव-जन्तु, पेड़-पौधों के महत्व को समझें। पर्यावरण सन्तुलन पर विशेष ध्यान दें, वन सम्पदा के महत्व के साथ ही पशु-पक्षियों का भी महत्व समझें। 



Browse By Tags