मजीठिया वेजबोर्ड अवमानना के फैसले के साथ ही रद्द किये जाये बर्खास्तगी और तबादले के मामले
| Rainbow News - Jun 15 2017 2:23PM

केंद्र सरकार ने मजीठिया वेजबोर्ड को लेकर 16 जून को बैठक बुलाई है। देश भर के कामगार आयुक्तों को बैठक में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार की यह बैठक इस और इशारा कर रही है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जो फैसला सुरक्षित रखा है वह प्रिंट मीडिया कर्मियों के पक्ष में आने वाला है। केंद्र सरकार जानती है कि प्रिंट मीडिया मालिकों के खिलाफ अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को भी कटघरे में खड़ा करेगा। इससे पहले सरकार मामले में सख्ती दिखाकर अपना पक्ष मजबूत कर लेना चाहती है।

इसमें दो राय नहीं कि अब प्रिंट मीडिया कर्मचारियों के दिन बदलने वाले हैं। इन सबके बीच प्रश्न उठता है कि मजीठिया वेजबोर्ड की लड़ाई लड़ने वाले जिन कर्मियों की बर्खास्तगी या फिर तबादले कर दिए गए उनका क्या होगा? आज की तारीख में भी मजीठिया न देने की नीयत पाले बैठे मीडिया मालिक बड़े स्तर पर कर्मचारियों की बर्खास्तगी और तबादले कर रहे हैं। अब मजीठिया तो मिलना तय है ही पर उससे पहले जरूरी है कि मजीठिया वेजबोर्ड के हिसाब से वेतन देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जितने भी कर्मचारियों की बर्खास्तगी और तबादले हुए हैं वे सब रद्द किये जाएं, जिससे देश में हक़ के लिए लड़ने के लिए एक अच्छा सन्देश जाए। वैसे भी बर्खास्त कर्मचारियों को मजीठिया वेजबोर्ड का फायदा तभी मिलेगा जब ये लोग अपने काम पर लौटेंगे।

हम लोगों ने सभी साथियों की लड़ाई लड़ी है और सभी साथियों को मजीठिया वेजबोर्ड का फायदा मिलना चाहिए पर जो लोग हम लोगों बेवकूफ और अपने को होशियार समझते रहे हैं उन्हें कुछ न कुछ तो संदेश तो जरूर मिलना चाहिए। निश्चित रूप से यह लड़ाई किसान और मजदूरों की लड़ाई से भी बड़ी लड़ाई लड़ी जा रही है। जो साथी नौकरी गंवा कर अखबार मालिकों के खिलाफ लड़ रहे हैं उन्हे मैं दिल से सलाम करता हूं। मैं भलीभाँति समझ सकता हूं कि किन-किन परिस्थितयों का सामना करके यह लड़ाई लड़ी जा रही है। जिस दिन मजीठिया वेजबोर्ड के अवमानना मामले में फैसला आएगा वह दिन निश्चित रूप से ऐतिहासिक दिन होगा।

-चरण सिंह राजपूत



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