'अमृत-भोग' मिठाई की दुकान पर 60 दिन बाद बिक्री शुरू
| - RN. Network - May 21 2020 3:37PM

अमृतभोग मिठाई की दुकान को ग्राहकों का इंतजार

लगभग दो माह का एकान्तवास रखने वाले नागरिक एवं व्यवसाइयों की दिनचर्या अब सामान्य सी होने लगी है। मतलब यह कि कोविड-19 से बचाव के दृष्टिगत चल रहे देशव्यापी लाकडाउन की पीड़ा झेल चुके जनपदवासियों को सरकार के निर्देशानुसार लाकडाउन-04 में काफी सहूलियतें दी गईं हैं। फलतः लोग अपना कारोबार पूर्व की तरह करने की शुरूआत कर रहे हैं। गाँव से लेकर बाजार, कस्बा, शहर में चहल-पहल और रौनक दिखाई पड़ने लगी है। गाँव के किसान कृषि कार्य में व्यस्त होने लगे हैं, वहीं कारोबारियों ने अपने-अपने कारोबार को पुराने ढर्रे पर लाने का प्रयास शुरू कर दिया है। कुल मिलाकर यदि यह कहा जाये कि 60 दिन से ठहरी हुई जिन्दगी ने गति पकड़ना शुरू कर दिया है तो बेजा नहीं होगा।

हालांकि इन 60 दिनों में किसी भी व्यक्ति को जरूरत की चीजें मिलने में दिक्कत नहीं पेश आई, यह बात दीगर थी कि आम ग्राहकों से दुकानदारों ने लाकडाउन का हवाला देते हुए पैसे ज्यादा लिये। सूत्रों के अनुसार बड़ी मिठाई की दुकानों के मालिकों के घर से प्रतिदिन लाखों की सेल होती रही, और उनके कारखानों में ताजी मिठाइयाँ बनती रहीं। उनके कारखानों में काम करने वाले कारीगरों की संख्या भी दर्जनों बताई गई है। इन कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों द्वारा लाकडाउन के नियम, सोशल डिस्टैन्सिंग का पालन किया गया कि नहीं इस बावत स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता। कारखाने बड़े, धनी और प्रभावशाली लोगों की वजह से बन्द नहीं हुए। इन कारखानों में ताजी मिठाइयाँ जिन्हें मालिक व प्रबन्धक द्वारा टेलीफोन से आर्डर लिया जाता था का निर्माण कराकर सम्भ्रान्त ग्राहकों को होम डिलिवरी दी गई। कारखानों में काम करने वाले कारीगर व अन्य मजदूरों को देय वेतन भुगतान के पैसे आते रहे। यह बात दीगर है कि मिठाई कारखानों में काम करने वाले इन श्रमिकों को 60 दिनों का वेतन मिलता है कि नहीं।

इसी तरह सूत्रों ने बताया कि गुटखा, पान-मसाला, मिठाई एवं अन्य खाद्य पदार्थ, चिकन, मटन, अण्डा-आमलेट, कोल्ड ड्रिंक्स सब कुछ मिलता रहा। जिसके पास पैसा है उसे किसी भी तरह की कठिनाई नहीं हुई। बड़े एवं प्रभावशाली लोगों को जरूरत की हर चीजें पुराने कीमत पर ही मिलती रहीं। वह चाहे पान-मसाला, मिठाइयाँ या फिर अन्य सामान। हर धनी, प्रभावशाली एवं कथित बड़े लोगों के घरों में मोबाइल कॉल पर ही यह सब चीजें उपलब्ध होती रहीं। यह बात अलग है कि आम लोग अवश्य ही इससे वंचित रहे। ऐसा क्यों न हो, आखिर..........समरथ को नहिं दोष गोसाईं.............। 

पान-मसाला, गुटखा, जर्दा, ब्राण्डेड जर्दा और इससे सम्बन्धित सामानों की बिक्री करने वाले प्रमुख व्यवसाईगण सरकार द्वारा प्रतिबन्ध और लाकडाउन के नियमों का हवाला देते हुए यह करते सुने गये कि उनकी दुकान से जिला हाकिम, वर्दी हाकिम, जज साहब और अनेकों माननीयों, जनप्रतिनिधियों को उनके घरों में ब्राण्डेड सामान भेजा जाता है। माल बचता नहीं, इन सभी से पैसे टनाटन मिलते हैं। ऐसा कहकर आम ग्राहकों से कई गुना अधिक कीमत वसूली गई, और यह क्रम अब भी जारी है। आम आदमी की क्या मजाल कि वह लाकडाउन में ऐसे प्रभावशाली व्यवसाई/दुकानदार का विरोध कर सके, जिसके ग्राहक बड़े-बड़े हाकिम, जज और माननीय तथा बाहुबली हों। -सम्पादक

अम्बेडकरनगर। 20 मई 2020 से जिले के जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र द्वारा जारी आदेश के अनुसार लाकडाउन के नियमों का पालन करते हुए शहर एवं ग्रामीणांचल में सभी छोटी-बड़ी दुकानों, होटल, रेस्तराँओं, नाई की दुकान के साथ-साथ अन्य जरूरत के सामानों की दुकानें खुलने लगी हैं। इसी क्रम में अकबरपुर के सबसे बड़े मिष्ठान विक्रेता अमृत भोग नामक प्रतिष्ठान भी पूर्व की तरह खुलने लगा है। हालांकि 60 दिन तक इस प्रतिष्ठान के बन्द रहने से मिठाई खाने के शौकीन विशेष रूप से सामान्य जन परेशान रहे, परन्तु अब जब डी.एम. के निर्देशानुसार दुकानें खुलने लगी हैं तब अमृत भोग के शोरूम (अकबरपुर-टाण्डा मार्ग निकट बस स्टेशन) में कारखाने से बनकर मिठाइयाँ ठेलों पर लदकर आने लगी हैं।

लाकडाउन के नियम का पालन करते हुए अमृतभोग के संचालक रवि चन्दानी स्वयं काउण्टर संभालते हैं। सहयोगी के रूप में उनके युवा सुपुत्र रतन चन्दानी ग्राहकों की डीलिंग में हाथ बंटाते हैं। हालांकि अभी ग्राहकों की भीड़ देखने को नहीं मिल रही है, फिर भी अमृतभोग के मालिक रवि चन्दानी को यह विश्वास है कि आगामी दिनों में स्थिति सामान्य हो जायेगी और उनकी दुकान पर मिठाई खरीददारों की भीड़ उमड़ेगी। अभी एक-दो दिन जिले के लोगों को यह जानकारी लगने में लगेगा कि मिठाई की दुकान यानि उनका अमृतभोग भी खुलने लगा है। रवि चन्दानी एक सुलझे हुए व्यवसाई हैं।

अमृत भोग नामक इनके प्रतिष्ठान की लोकप्रियता दूर-दूर तक है। आम से लेकर खास तक मिठाई खाने वाले इनके दुकान के ग्राहकों की संख्या अनगिनत है। वैसे 2 दिन से रवि चन्दानी अपने इर्द-गिर्द के साथियों के साथ अमृत भोग प्रतिष्ठान के बाहर बैठे देखे जाते हैं। उन्हें भी ग्राहकों का बेसब्री से इन्तजार है। उनकी यह बेसब्री जायज है। उनके आवास स्थित मिठाई कारखाने से बनकर ताजी-ताजी मिठाइयाँ ठेले पर लदकर आना शुरू हो गई हैं। हर देखने वाले के मुँह में पानी आने लगा है। बहुतेरे ऐसे हैं जो फोन द्वारा अमृत भोग के स्वामी रवि चन्दानी का हाल-चाल ले रहे हैं। कई तो ऐसे हैं जो इस व्यवसाई से सटकर अपने अन्दाज में हमदर्दी दिखा रहे हैं। 



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