कभी नहीं आएगी कोरोना की वैक्‍सीन : साइंटिस्‍ट
| Agency - May 22 2020 3:54PM

अमेरिकी HIV साइंटिस्‍ट ने दी चेतावनी, Isolation ही अकेला इलाज!

वॉशिंगटन। पूरी दुनिया में इस कोरोना वायरस की वजह से 334,915 लोगों की मौत हो चुकी है और 5,212,172 लोग इससे प्रभावित हुए हैं। 100 से ज्‍यादा साइंटिस्‍ट्स इस महामारी की वैक्‍सीन तलाशने में लगे हैं। लेकिन इस बीच एक टॉप अमेरिकी वैज्ञानिक ने चेतावनी दी है कि फिलहाल कोरोना वायरस की वैक्‍सीन नहीं आने वाली और हो सकता है कि इसकी वैक्‍सीन कभी ईजाद ही न हो पाए। जिस अमेरिकी साइंटिस्‍ट ने दुनिया को इस बात के लिए आगाह किया है वह एचआईवी जैसी बीमारी पर रिसर्च कर चुके हैं।

अमेरिकी वैज्ञानिक विलियम हेसलटाइन की कैंसर और एचआईवी पर हुई रिसर्च काफी चर्चा में रही है। न्‍यूज एजेंसी रॉयटर्स के साथ बातचीत में उन्‍होंने इस बात की आशंका जताई है कि शायद महामारी की दवा कभी आ ही नहीं पाएगी। उनसे इंटरव्‍यू में पूछा गया था कि कोविड-19 की वैक्सीन कब और कितनी जल्‍दी डेवलप हो सकती है? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उन्‍हें इसका इंतजार बिल्‍कुल नहीं है क्योंकि इतनी जल्दी में यह संभव है। हेसलटाइन ने साफ कहा है कि कोरोना महामारी को रोकने के लिए ज़रूरी है कि मरीजों की बेहतर पड़ताल की जाए, उन्हें सही तरीके से ढूंढा जाए और जहां संक्रमण फैलता दिखे, वहीं उसे सख्त आइसोलेशन के जरिए रोका जाए।

उन्‍होंने बताया कि कोरोना वायरस के लिए पहले जो वैक्सीन तैयार की गई हैं, वो नाक को संक्रमण से सुरक्षा देने में विफल रही है जहां से वायरस के शरीर में दाखिल होने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है। विलियम हेसलटाइन ने कहा है कि बिना किसी प्रभावी इलाज या फिर वैक्सीन के भी कोरोना वायरस को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्‍होंने आइसोलेशन को ही कोरोना की रोकथाम का सबसे प्रभावी तरीका बताया। उन्‍होंने कहा कि जो लोग संक्रमित हैं उन्हें आइसोलेशन में रखा जाएा। हाथ धोते रहें, मास्क पहनें और सबसे अधिक प्रयोग होने वाली चीजों और जगहों को साफ रखें तो भी इसमें काफी कमी आ सकती है।

विलियम हेसलटाइन मानते हैं कि चीन और कई अन्य एशियाई देशों ने इस वैकल्पिक रणनीति को बहुत प्रभावशाली तरीके से लागू किया है जबकि अमेरिका में ऐसा नहीं देखा गया कि जो लोग वायरस से संक्रमित हो गए हों उन्हें सख्त आइसोलेशन में रखा गया हो। हेसलटाइन के मुताबिक चीन, दक्षिण कोरिया औरताइवान इस तरीके से कोरोना वायरस की संक्रमण दर को कम करने में सफल रहे हैं जबकि अमेरिका, रूस और ब्राजील इसमें नाकाम रहे।

सीरम हो सकता है बेहतर इलाज 

हेसलटाइन के मुताबिक जानवरों पर कोविड-19 के रिसर्च वैक्सीन आजमाने से अब तक यह तो पता चला है कि इनसे मरीज के शरीर में, खासतौर से फेफड़ों में संक्रमण का असर कम होता देखा गया है। कुछ दवा कंपनियां अब इसी थेरेपी के मद्देनजर बेहतर और रिफाइंड सीरम तैयार कर रही हैं। प्रोफेसर विलियम भी इस विधि के सफल होने की काफी संभावना मानते हैं. उनका कहना है कि यह भविष्य में इसका पहला इलाज साबित हो सकता है क्योंकि ये एटी-बॉडी जिन्हें हाइपरइम्यून ग्लोब्यूलिन कहा जा रहा है, मानव शरीर के हर सेल में जाकर उसे वायरस को चित करने की क्षमता देती हैं।



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