मानव और मानवता की सेवा में समर्पित ‘संकल्प’ का सूरज
| - RN. Network - May 23 2020 12:36PM

सामान्य दिन हो या संकट काल......गर्मी हो या जाड़ा या फिर घनघोर बरसात.....किसी भी मौसम की परवाह किए बगैर अपनी धुन में रहकर समाजसेवा में लीन रहने वाले युवक का नाम है सूरज। इस सूरज की प्रखरता का भान लोगों को तब हुआ जब पूरे विश्व में संकट उत्पन्न करने वाला कोरोना वायरस की वजह से देश में लाकडाउन लागू हो गया। और मजबूर व असमर्थ लोगों को उनकी जरूरतें समय पर पूरी होने के लिए किसी के सहारे की दरकार हो गई। सूरज- पूरा नाम सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता उम्र- लगभग 30 वर्ष, स्वस्थ शरीर, सामान्य कद-काठी। इस युवक के बारे में थोड़ा सा जान लिया जाये। 

जिस उम्र में एक युवा अपने हमउम्र विपरीत लिंग के लोगों के प्रति आकर्षण का रूझान रखता है उस उम्र में यह नवयुवक ऐसा कुछ भी न करके मानव एवं मानवता के रक्षार्थ अपने कृत्य से पुण्य लाभ कमा रहा है। यह कहीं से अतिश्योक्ति नहीं है और न ही बेवजह की तारीफ। सूरज नामक युवक उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जनपद का निवासी है। संकल्प मानव सेवा संस्था नामक समाज सेवी संगठन का संस्थापक है। इस संस्था के जरिये यह नित्य अपने संस्था सदस्यों के साथ जनसेवा करता देखा जा सकता है। इस समय लाकडाउन की स्थिति में कोरोना संकट से जूझते जनपद वासियों के रक्षार्थ संकल्प का यह युवा समाजसेवी अपने मानव सेवा जैसे कृत्य से कोरोना योद्धा होने का प्रमाण दे रहा है। इसके जोश और उत्साह को देखकर वीर रस के कवि पं0 श्याम नारायण पाण्डेय की रचना हल्दीघाटी की याद बरबस ही ताजा हो जाती है। 

बचपन में प्राथमिक शिक्षा के दौरान हमने वीर रस के महान कवि श्याम नारायण पाण्डेय द्वारा रचित हल्दीघाटी नामक कविता पढ़ा था, इस कविता के जरिये कवि ने महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की वीरता, पराक्रम और तेजी का बखूबी चित्रण किया था। जब एक जानवर पराक्रमी हो सकता है तो तब उसका स्वामी कितना पराक्रमी और वीर होगा इसका सहज ही अन्दाजा लगाया जा सकता है। ठीक उसी तरह आज के सन्दर्भ में जब वैश्विक महामारी कोविड-19 से मानव जाति त्रस्त है। देश में लाकडाउन चल रहा है, तब हल्दीघाटी के दो योद्धाओं महाराणा प्रताप और उनके घोड़े चेतक की याद ताजा हो गई। उनकी स्मृति में हम यहाँ कवि श्याम नारायण पाण्डेय द्वारा रचित कुछ पंक्तियाँ एक बानगी के तौर पर लिखेंगे। 

‘‘रण बीच चौकड़ी भर-भर कर, चेतक बन गया निराला था। राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा का पाला।। गिरता न कभी चेतक तन पर राणा प्रताप का कोड़ा था, वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर या आसमान पर घोड़ा था।’’ 

तात्पर्य यह कि अपने सर्वाधिक प्रिय घोड़े चेतक पर सवार होकर राणा प्रताप हल्दी घाटी के समर भूमि में दुश्मनों के छक्के छुड़ा रहे थे, उनके इस कार्य में चेतक का कितना योगदान था, उसे कवि ने कविता की पंक्तियों के माध्यम से बखूबी प्रस्तुत किया है। जिस तरह 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप और मुगलिया सल्तनत के अकबर की सेनाओं के बीच हुआ था, इस युद्ध में हल्दीघाटी के मैदान में राणा प्रताप अपनी भील सेनाओं के साथ चेतक पर बैठकर मुगल सेनाओं के छक्के छुड़ा रहे थे। ठीक उसी अन्दाज में आज जब कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने व जंग लड़ने की स्थिति आ गई है तब ऐसे में संकल्प के सूरज नामक युवक ने कोरोना योद्धा बनकर इस जंग में महाराणा प्रताप जैसी भूमिका निभाना शुरू कर दिया है।

चेतक की भूमिका में कोई एक नहीं उसके अनेको अनन्य मित्र उसका भरपूर साथ दे रहे हैं। परिणाम यह है कि संकल्प मानव सेवा संस्था का यह वीर युवक कोरोना वायरस से लड़ी जा रही जंग में मानव और मानवता के रक्षार्थ सब कुछ समर्पित करने लगा है। आर्थिक इमदाद हो, खाद्यान्न वितरण हो, रक्तदान हो, या फिर जरूरतमन्दों की कोई अन्य जरूरतें, उसे बड़ी ही तत्परता के साथ पूरा करने में सूरज नामक वीर योद्धा हमेशा आगे रहता है। इस समय पूरे विश्व में कोरोना वायरस महामारी के रूप में फैला हुआ है। इसका संक्रमण भारत देश में भी शुरू हो गया है। सरकार ने लाकडाउन घोषित किया है। पूरा सरकारी तन्त्र कोरोना की जंग में कोविड-19 को परास्त करने में जुटा हुआ है। सूरज ने संकल्प की तरफ से कोरोना काल में जरूरतमन्द लोगों की इमदाद किया है, और हर उस व्यक्ति को पुष्पाहार पहनाकर उसका सम्मान व उत्साहवर्धन किया है जो कोरोना योद्धा बनकर इस संकटकाल में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। 

सूरज के नेतृत्व में संकल्प टीम के सदस्यों द्वारा रक्तदान जैसा महादान करने के साथ-साथ सरकारी चिकित्सकों, पुलिसजनों एवं स्वच्छता कर्मियों को पुष्पाहार पहनाकर सम्मानित किया गया। इसी तरह समय-समय पर इस समाजसेवी द्वारा मास्क, सैनिटाइजर, खाद्यान्न, सब्जियाँ, मोमबत्ती-मचिस आदि का भी वितरण किया गया। सूरज और संकल्प टीम द्वारा की जाने वाली गरीबों, असहायों, मजदूरों, दिव्यांगों व अन्य जरूरतमन्दों की यथासम्भव मदद करने का सिलसिला अभी भी जारी है। लाकडाउन के शुरूआती दिनों में अनेकों चेहरे समाजसेवा का भाव लेकर इस जंग-ए-मैदान में उतरे, और धीरे-धीरे विलुप्त हो गये। वहीं कच्छप गति से चलने वाले युवा समाजसेवी सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता अपने संकल्प टीम के सदस्यों के साथ मानव और मानवता की सेवा में जुटे हुए हैं। 

इस युवा समाजसेवी की एक खासियत यह है कि आधुनिक समाजसेवियों की तरह प्रचार और प्रसार में कम विश्वास रखता है। सेल्फी एवं अन्य छायांकन से परहेज करता है। सूरज का यह मानना है कि किसी भी तरह की सेवा करके पुण्य कमाने वाला यदि उसका प्रचार कर देता है तो वह सुफल का हकदार नहीं होता। इसलिए संकल्प के सदस्यों द्वारा भी छायांकन यानि फोटोग्राफी/सेल्फी से दूरी बनाकर रखी जाती है। नारी का सम्मान केवल भाषणों में नहीं, अपितु इसे हकीकत में तब्दील करके दिया जा सकता है। सूरज का मानना है कि वह ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहता जिससे किसी व्यक्ति के स्वाभिमान को ठेस पहुँचे। वह चाहे गरीब हो, वृद्ध हो, दिव्यांग हो या फिर महिला हो। 

इस समय लाकडाउन-04 चल रहा है। हर आम आदमी आर्थिक रूप से तंगी का शिकार हो गया है। ऐसे में सूरज कुमार ने एक अति आवश्यक पहल की है। वह जिले के महंगे विद्यालयों के प्रबन्धतन्त्र से फीस माफी की अपील कर रहे हैं। उनका मानना है कि महंगे अंग्रेजी माध्यमों के विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। वह चाहते हैं कि अप्रैल, मई व जून तीन महीने की पूरी फीस विद्यालयों द्वारा माफ की जाये। ऐसे हो जाने से अभिभावकों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कुछ कम होगा। कुल मिलाकर सूरज कुमार की सोच मानव और मानवता की सेवा हेतु बहुत कुछ सकारात्मक कर गुजरने की है।



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