अकबरपुर के लोग कब तक खाते रहेंगे बासी, सड़ी-गली, कीड़ायुक्त मिठाइयाँ...?
| - RN. Network - May 30 2020 3:47PM

युवा समाजसेवी सूरज कुमार ने खाद्य सुरक्षा महकमे की कार्यप्रणाली पर जताया रोष

मौसम बहार स्वीट्स पर गोंद लड्डू में कीड़ा मिलने के बाद लोग हुए भयभीत

अम्बेडकरनगर। अकबरपुर के नई सड़क, शहजादपुर स्थित मौसम बहार स्वीट्स नामक मिठाई की दुकान पर बीते दिवस गोंद का लड्डू मिठाई में कीड़ा मिलने से यहाँ के प्रबुद्धवर्गीय और जागरूक उपभोक्ताओं में मिठाई की दुकानों पर बिक रही बासी, अखाद्य, प्रदूषित और कीड़ायुक्त मिठाईयों को लेकर चिन्ता की लहर देखी जा रही है। उधर खाद्य सुरक्षा महकमा प्रवासी मजदूरों के आगमन पर टेªन ड्यूटी में व्यस्त बताया जा रहा है। इस स्थिति में जिला मुख्यालय अकबरपुर के नागरिकों विशेषकर होटल एवं रेस्तराँ तथा मिठाई की दुकानों पर निर्मित और बिक्रीत खाद्य पदार्थों के खरीद व सेवन करने से डरने लगे हैं। जिला खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा खाद्य सामग्रियों विशेषतौर पर मिठाई, समोसे, चाट, चाउमिन, मोमोस आदि के बारे में सर्व साधारण हेतु कोई जानकारी देना भी जरूरी नहीं समझा गया। इससे लोगों में असमंजस्य की स्थिति पैदा हो गई है। 

पूरे जिले में कोविड-19 संक्रमण से बचाव को लेकर लाकडाउन-04 में सशर्त ढील दिये जाने के बाद 2 माह तक बन्द रही मिठाई की दुकानों के ताले खुले और मिठाइयों की बिक्री शुरू हो गई। 2 माह के लाकडाउन अवधि में इन दुकानों के शो-रूम में रखी मिठाइयाँ बासी होकर सड़ गईं। सूत्रों के अनुसार जैसे ही लाकडाउन-04 में दुकानों को सशर्त खोलने का जिला प्रशासन द्वारा आदेश जारी किया गया, वैसे ही इन दुकानदारों ने सड़ी व बासी मिठाइयों को नये तरीके से पुनः निर्मित कर शोरूम में रख दिया, और बेंचा जाने लगा। यही कारण रहा कि जल्दबाजी में बड़ी दुकानों पर मिठाई खरीद करने वाले ग्राहकों ने मिठाई ताजी है या बासी या फिर कीड़ायुक्त इसकी जानकारी लिये बगैर खरीदना शुरू कर दिया। 

26 मई 2020 को गोंद का लड्डू जिसमें कीड़ा पाया गया था, को एक ग्राहक जिसका नाम पंकज सिंह बताया गया है ने शहजादपुर नई सड़क स्थित बड़ी मिठाई की दुकान मौसम बहार स्वीट्स से 500 रूपए किलो में खरीदा था। अपने प्रतिष्ठान पर पहुँचकर पंकज सिंह द्वारा लड्डू का वितरण सहयोगियों, कर्मचारियों में किया गया। लड्डू का सेवन करने वाले लोगों ने स्वाद और गन्ध को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। लड्डू फोड़ा गया तो उसमें से कीड़ा रेंगता हुआ मिला। शेष बचे गोंद का लड्डू को लेकर पंकज सिंह मौसम बहार स्वीट्स के शो-रूम पर पहुँचे, और शिकायत करते हुए लड्डू में कीड़ा होने की बात कही। तथा लड्डू फोड़ कर दिखाया, जिसमें कीड़ा रेंग रहा था। इसकी वीडियो क्लिप बनाकर पंकज सिंह और उनके एक पत्रकार मित्र द्वारा सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। बताया गया कि काफी हीला-हवाली उपरान्त दुकानदार द्वारा लड्डू वापस लेकर पैसा लौटा दिया गया। 

यह तो रही मौसम बहार स्वीट्स नामक बड़ी एवं प्रतिष्ठित मिठाई की दुकान की बात, जिस पर बिकने वाली कीड़ा युक्त, प्रदूषित, बासी मिठाई की वजह से यह कहा जा सकता है कि ऊँची दुकान, जहर पकवान.......। ऊपर वाला रहम करे, खैर करे, यदि पैसा कमाने का ऐसा ही शौक रहा तो वह दिन दूर नहीं जब मौसम बहार स्वीट्स और इसी की तरह बड़ी मिठाई की दर्जनों दुकानों के स्वामी लाकडाउन 5 में पुरानी, बासी प्रदूषित कीड़ायुक्त मिठाइयाँ, बेंचकर लाखों रूपए का कथित घाटा पूरा कर लेंगे। यह बात दीगर है कि उनके ऐसा करने से मिठाई के सेवनकर्ताओं का स्वास्थ्य कोरोना संक्रमण से नहीं अपितु उनकी मिठाइयों के सेवन से प्रभावित होगा। अकबरपुर, शहजादपुर स्थित दर्जनों बड़ी एवं प्रतिष्ठित मिठाई की दुकानों पर इस समय ऐसी मिठाइयों की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। 

जिला खाद्य सुरक्षा महकमा के जिम्मेदार ओहदेदारों ने सिर्फ मौसम बहार स्वीट्स पर इस खबर के वायरल होने के उपरान्त दो दिन तक छापेमारी कर मात्र गोंद का लड्डू के सैम्पुल लेने की औपचारिकता पूरी की। रही बात अन्य बड़ी और प्रतिष्ठित तथा भव्य शो-रूम वाली मिठाई की दुकानों की तो वहाँ जाना महकमा के लोगों को गवारा नहीं। इसका कारण पाठकगण स्वयं जान सकते हैं। उधर खाद्य सुरक्षा महकमा के 2 दिनी छापेमारी और सैम्पलिंग से परेशान मौसम बहार स्वीट्स के स्वामी/साझीदार संजय कुमार ने रेनबोन्यूज को बताया कि जो गोंद का लड्डू उसने ग्राहक को बेंचा था, उसी बैच का अन्य लड्डू फोड़कर दिखाया गया जिसमें कोई कीड़ी नहीं पाया गया, फिर भी ग्राहक और उसके मित्र द्वारा कीड़ा पाने का ढिंढोरा पीटते हुए वीडियो वायरल किया गया था। बस इतना ही काफी था खाद्य सुरक्षा महकमा के लिए। यह महकमा सक्रिय हो गया, और उसकी दुकान और कारखाने/गोदाम पर मीडिया से अपना बचाव करते हुए 26 व 27 मई 2020 को छापेमारी कर गोंद का लड्डू की सैम्पलिंग की गई। खाद्य सुरक्षा महकमे की इस कार्रवाई से संजय कुमार काफी आहत हैं। 

रेनबोन्यूज ने जब इस आशय का संवाद प्रकाशित किया, तो खाद्य सुरक्षा महकमे के अभिहीत अधिकारी राजवंश श्रीवास्तव ने सम्पादक रीता विश्वकर्मा के व्हाट्सएप्प नम्बर को ब्लॉक कर दिया। ठीक उसी तरह जैसे- रात के अन्धेरे में सड़क पर शिकारियों से बचने के लिए खरगोश आँखें मूंद लेता है। परिणाम क्या होता है यह सर्वविदित है। अब तो अभिहीत अधिकारी (खाद्य सुरक्षा) द्वारा रेनबोन्यूज की कोई कॉल भी स्वीकार नहीं की जाती। अकबरपुर के खाद्य सुरक्षा अधिकारी अखिलेश मौर्या ने तो बहुत पहले से ही पत्रकार रीता विश्वकर्मा के नम्बर को ब्लॉक कर रखा है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के.के. उपाध्याय ही एक ऐसे जिम्मेदार ओहदेदार हैं, जो फोन कॉल्स रिसीव करते हैं। शेष अन्य अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग ही अलाप रहे हैं। इस विभाग के दर्जनों ओहदेदारों को देखकर लगता ही नहीं कि ये सब जनस्वास्थ्य के प्रति गम्भीर हैं और सरोकारी है। 

खाद्य सुरक्षा विभाग सैम्पल लेकर करता है अपने दायित्वों की इतिश्री: सूरज गुप्ता

जनस्वास्थ्य को लेकर चिन्तित तथा समाजसेवा में लीन युवा समाजसेवी सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता (संस्थापक-संकल्प मानव सेवा संस्था) मौसम बहार स्वीट्स पर कीड़ायुक्त मिठाई की बिक्री तथा खाद्य सुरक्षा महकमा की कार्यप्रणाली को लेकर चिन्ता व्यक्त किया है। सूरज कुमार ने कहा कि नमूना लिया जाना यह खाद्य सुरक्षा महकमे की पुरानी परम्परा है, जिस पर विश्वास किया जाना बेमानी ही कहा जायेगा। क्योंकि नमूना ताजे और शुद्ध मिठाइयों के ही लिये जाते हैं, जो प्रयोगशालाओं की जाँच में सही पाये जाते हैं। और विक्रेता दुकानदार न्यायिक कार्रवाई से बच जाता है। ठीक ऐसा ही गोंद का लड्डू जो मौसम बहार स्वीट्स मिठाई की दुकान से लिया गया है उसके साथ भी होगा। रही बात बासी, प्रदूषित, कीड़ायुक्त मिठाई की बिक्री की तो पूरे जिले में 60 दिन उपरान्त एकाएक खुलने वाली सभी मिठाई की दुकानों पर लगभग ऐसा ही हो रहा है। 

पूरे जिले में संचालित होने वाली मिठाई की दुकानों के अलावा अन्य खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वाले प्रतिष्ठानों की चेकिंग होनी चाहिए वह भी ईमानदारी के साथ। संकल्प के सूरज ने कहा कि वह ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि यदि खाद्य सुरक्षा महकमा कोरोना काल में महज औपचारिकता निभायेगा तो जनस्वास्थ्य के साथ न्याय नहीं होगा। चाहिए यह कि इस संकट की घड़ी में लाखों, करोड़ों कमाने की भूख रखने वाले धन्ना सेठों से खाद्य सुरक्षा महकमा के लोग अपना याराना कुछ कम करें। यदि ऐसा होता है तभी खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा की जाने वाली कार्यवाही पारदर्शी कही जायेगी, अन्यथा अन्य कालों की तरह धन्ना सेठों के साथ गठजोड़ ही माना जायेगा। 

समाजसेवी बन्टी गुप्ता ने आश्चर्य व्यक्त किया है कि जिला खाद्य सुरक्षा विभाग के जिम्मेदार ओहदेदार सच एवं सच्चाई से रूबरू नहीं होना चाहते यही कारण है कि वह रेनबोन्यूज जैसे मीडिया स्तम्भ की फोन कॉल्स रिसीव नहीं करते। युवा समाजसेवी ने खाद्य सुरक्षा महकमा के अभिहीत अधिकारी और अन्य खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से उम्मीद की है कि वे लोग भविष्य में मीडिया द्वारा की गई कॉल्स को नजरन्दाज नहीं करेंगे साथ ही रेनबोन्यूज द्वारा दी गई या प्रकाशित की गई खबरों को गम्भीरता से लेंगे। उनके द्वारा ऐसा करना ही जनस्वास्थ्य के दृष्टिगत होगा। सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता ने जिला प्रशासन से मांग किया है कि वह कोरोना काल में प्रदूषित, बासी, मिलावटी, अखाद्य, सड़ी-गली एवं कीड़ायुक्त मिठाइयों की बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाये। 



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