मौसम बहार स्वीट्स के कीड़ा युक्त गोंद लड्डू की खबर से क्षुब्ध अभिहीत अधिकारी ने पत्रकारों को किया ब्लॉक
| - RN. Network - Jun 1 2020 4:05PM

अभिहीत अधिकारी                मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी

अपनी प्रशंसा सभी को अच्छी लगती है। जब तक कोई प्रशंसा कर रहा है, तब तक वह लोगों की गुडबुक में होता है। प्रशंसा भले ही झूठी अथवा चापलूसी वाली हो। यदि किसी ने सिक्के के दोनों पहलू की तरह व्यक्ति की अच्छाई व बुराई बयां कर दी, तब उसी समय से वह खटकने लगता है। एक समय ऐसा आता है जब कटु सत्य से साविका होने पर झूठी प्रशंसा पाकर खुश रहने वाला व्यक्ति पुराने सम्बन्धों तक का परित्याग कर देता है। कुछ इसी तरह अम्बेडकरनगर जिले के खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहीत अधिकारी एवं अन्य जिम्मेदार विभागीय ओहदेदार करने लगे हैं। 

अम्बेडकरनगर। ताजा प्रकरण के अनुसार अभिहीत अधिकारी (खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, अम्बेडकरनगर) राजवंश श्रीवास्तव ने जिले के वरिष्ठ नागरिक/पत्रकार भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी के व्हाट्सएप्प नम्बर 9454908400 को ब्लॉक कर अपना आक्रोश जताया है। इसी तरह मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के.के. उपाध्याय द्वारा प्रकाशित खबर से नाराज होकर पत्रकार गर्गवंशी का यह नम्बर बहुत पहले ही ब्लॉक किया जा चुका है, साथ ही के.के. उपाध्याय द्वारा यह भी लिखा जा चुका है कि भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी द्वारा लिखित संवाद पीत पत्रकारिता की पराकाष्ठा है। ऐसा लिखकर के.के. उपाध्याय ने अपना क्षोभ व्यक्त करते हुए व्हाट्सएप्प के सभी ग्रुपों में वायरल किया था। 

उस समय मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के इस कृत्य को पत्रकार गर्गवंशी ने सहज रूप से लिया था और अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि- महकमे में वरिष्ठ और उच्च ओहदे पर नियुक्त के.के. उपाध्याय ने अपने प्रभावशाली अन्दाज में ऐसा किया है, इससे उन्होंने यह प्रदर्शित किया है कि वह एक अत्यन्त धनी, अहंवादी, भौतिक सुख-सुविधा सम्पन्न व्यक्ति हैं। उल्लेखनीय है कि व्हाट्सएप्प नम्बर ब्लॉक करने के क्रम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी अकबरपुर अखिलेश कुमार मौर्या द्वारा अर्सा पहले ही दैनिक समाचार-पत्र ‘‘मान्यवर’’ की जिला संवाददाता/रेनबोन्यूज की सम्पादक रीता विश्वकर्मा का व्हाट्एप्प नम्बर- 8765552676 ब्लॉक किया जा चुका है। इसी तरह अभिहीत अधिकारी ने गत दिवस 26 मई को ही मौसम बहार स्वीट्स की खबर प्रकाशन उपरान्त रीता विश्वकर्मा के व्हाट्सएप्प नम्बर को ब्लॉक कर दिया था। खैर! बात आई-गई हो गई। बीते मई माह के अन्तिम दिनों में अम्बेडकरनगर के नई सड़क, शहजादपुर स्थित मौसम बहार स्वीट्स की दुकान से लिये गये गोंद लड्डू में कीड़ा मिलना और ग्राहक तथा दुकानदार में तू-तू, मैं-मैं प्रकरण काफी चर्चा का विषय बन गया। 

यह मामला 26 मई 2020 का है। वीडियो वायरल होते ही खाद्य सुरक्षा विभाग के जिम्मेदारों की कुम्भकर्णी नींद टूटी और दो एफ.एस.ओ. ने मौसम बहार स्वीट्स की दुकान पर जाकर गोंद का लड्डू नामक मिठाई का नमूना लिया और जाँच के लिए भेजा। दुकानदार संजय कुमार द्वारा बताया गया कि खाद्य सुरक्षा महकमे के अधिकारियों ने उसकी दुकान और कारखाने पर 26 व 27 मई को छापेमारी कर गोंद का लड्डू का नमूना संकलित किया था। जिला अभिहीत अधिकारी राजवंश श्रीवास्तव इसी कार्रवाई को शायद सबसे बड़ी कार्रवाई मानते हैं। आरोप है कि खाद्य सुरक्षा महकमे की कृपा से पूरे जिले में सड़ी-गली, बसी, कीड़ा एवं दुर्गन्धयुक्त मिठाइयों की बिक्री जोरों पर चल रही है। जिसे खाकर लोग तरह-तरह की बीमारियों का शिकार होने लगे हैं।

कहने वालों का कहना है कि यदि बासी, कीड़ायुक्त, दूषित, अखाद्य मिठाइयों तथा अन्य खाद्य सामग्रियों की बिक्री पर प्रभावी स्तर से नियंत्रण नहीं लगाया गया तो इन दिनों पड़ रही भयंकर गर्मी एवं प्रतिदिन हो रहे मौसम के उतार-चढ़ाव से तरह-तरह की बीमारियों का संक्रमण शुरू हो जायेगा। जो लोग लगभग 2 महीने से ऊपर लाकडाउन की स्थिति में अपने-अपने घरों में कैद थे अब वे ही लोग इस लाकडाउन-05 (अनलॉक-01)  में निर्भय होकर बाजार की चीजें खरीदकर सेवन करने लगे हैं। जनपद के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के ग्राहक इस समय खाने-पीने और मिठाई की दुकानों पर ही देखे जा रहे हैं। जाहिर है कि ऐसे में लोग वही सामान पायेंगे जो दुकानदारों द्वारा उन्हें अच्छी कीमत पर दिया जायेगा। 

ऐसा ही कुछ अकबरपुर/शहजादपुर के दर्जनों मिठाई की बड़ी दुकानों पर हो रहा है, जिसे खाद्य सुरक्षा महकमा जानते हुए भी अनदेखा किये हुए है। यह अनदेखी क्यों और कैसे? इसके बारे में ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नही है। कहावत है कि- वर मरै या कन्या, कर्मकाण्डी को अपनी दक्षिणा से ही मतलब है। ठीक इसी तरह खाद्य सुरक्षा महकमा कर रहा है। उसे जनस्वास्थ्य की क्या पड़ी है। धन्ना सेठों और खाद्य सुरक्षा महकमे का याराना इस जिले के संदर्भ में जगजाहिर है। 

अभिहीत अधिकारी राजवंश श्रीवास्तव ने भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी द्वारा व्हाट्सएप्प पर अग्रेसित- ‘‘अकबरपुर के लोग कब तक खाते रहेंगे बासी, सड़ी-गली, कीड़ायुक्त मिठाइयाँ’’ शीर्षक से रेनबोन्यूज में प्रकाशित संवाद को पढ़ा होगा या नहीं यह तो स्पष्ट नहीं कहा जा सकता फिर भी उन्होंने अपनी टिप्पणी में लिखा था कि- आप लोग विभाग द्वारा की गई कार्रवाई तो पोस्ट नहीं करेंगे, मुझे पता है धन्यवाद। और इतना लिखने के बाद अभिहीत अधिकारी ने भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी के उक्त व्हाट्सएप्प नम्बर को ब्लॉक कर दिया। 

प्रश्न अब यह उठता है कि अखिकार अभिहीत अधिकारी ने उक्त टिप्पणी करके थैंक्स कहकर वरिष्ठ पत्रकार का व्हाट्सएप्प नम्बर ब्लॉक क्यों कर दिया। क्या वह नहीं चाहते कि कोई भी सूचना या खबर प्रकाशित की जाये जिसमें उनकी और अन्य अधिकारी/कर्मचारियों की निगेटिव ऐक्टिविटी का जिक्र हो। शायद वह सच्चाई से रूबरू होना नहीं चाहते। यदि मीडिया में उनके या विभाग के प्रति निगेटिव ऐक्टिविटी का जिक्र हो गया तो सम्भवतः वह उनके डिप्रेशन का सबब बनता होगा। यही कारण हो सकता है कि बगैर कुछ उत्कृष्ट किए मीडिया प्रबन्धन करके अपनी व विभाग की प्रशंसा ठीक उसी तरह करते हैं जैसे बगैर कुछ किये स्वयं ही अपनी पीठ थपथपा ली जाती है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का हो स्थानान्तरण: सूरज गुप्ता 

खाद्य सुरक्षा महकमा अम्बेडकरनगर के बारे में जिले के युवा समाजसेवी संकल्प मानव सेवा संस्था के संस्थापक सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता का कहना है कि इस विभाग के सभी ओहदेदार मात्र खानापूर्ति करते हैं। गरीब तबके के दुकानदारों के यहाँ पहुँचकर उन्हें डरवाकर बताशा, गट्टा आदि का नमूना लेते हैं। मौसम बहार स्वीट्स और इसी तरह की संख्या में कई दर्जन मिठाई की दुकानों को इस विभाग द्वारा अभयदान दिया जा चुका है।

सूरज ने कहा कि जब भी ऊपर से दबाव पड़ता है तब खाद्य सुरक्षा महकमा के लोग बड़ी दुकानों के संचालक को बता देते हैं कि उनके यहाँ दिखावे के तौर पर छापेमारी की जायेगी, और नमूना संकलित किया जायेगा। दिन, समय के बावत जानकारी देकर विभाग के लोग नियत समय पर बड़ी दुकानों के शो-रूम और कारखानों पर जाकर छापेमारी की औपचारिकता पूरी करते हैं। सैम्पल भी उन्हीं मिठाइयों का लिया जाता है जो शुद्ध और ताजे निर्मित कराये गये होते हैं।

संकल्प के सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता ने रेनबोन्यूज से कहा कि मौसम बहार स्वीट्स पर खाद्य सुरक्षा महकमे द्वारा की गई कार्रवाई भी महज खानापूर्ति और औपचारिक ही थी। एक तरह से यदि यह कहा जाये कि छापेमारी जैसा कार्य प्रायोजित और पूर्व नियोजित होता है तो गलत नहीं होगा। सूरज गुप्ता ने कहा कि जिला खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग में कार्यरत सभी ओहदेदार अपने धनबल से अंगद का पाँव बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार को चाहिए कि इस महकमे के सभी कर्मचारियों/अधिकारियों का स्थानान्तरण अविलम्ब करें। 



Browse By Tags



Other News