[अति आवश्यक] स्कूली बच्चो के अभिभावकों के ध्यानार्थ 
| - RN. Network - Jun 2 2020 1:22PM

                                          सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता 

उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जनपद निवासी युवा समाजसेवी सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता जो संकल्प मानव सेवा संस्था के संस्थापक हैं प्रायः लोक सेवार्थ कुछ न कुछ किया करते हैं। इस समय वह यानि सूरज कुमार लाकडाउन की स्थिति में लगभग पंगु हो चली आर्थिक व्यवस्था से चिन्तित होकर आम आदमी को राहत दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। युवा समाजसेवी सूरज विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों को लेकर काफी चिन्तित हैं। समाजसेवी ने हमें एक ऐसा संकलित विचार भेजा है, जो वर्तमान परिस्थिति में प्रासंगिक होने के साथ-साथ समस्त अभिभावकों के लिए विचारणीय कहा जा सकता है। उक्त संकलन का हम यहाँ अक्षरशः प्रकाशन कर रहे हैं। 

अपने मासूम बच्चो को कोरोना के सामने अकाल मृत्यु का निवाला बनने से रोकिए, निजी स्कूलों के झांसे में आने से बचे, एक साल स्कूलों का बायकॉट कीजिये!! अब एक नया नाटक आरंभ होने जा रहा है। इस बार बलि के बकरे आपके हमारे बच्चे होंगे। प्रदेश में एक जुलाई से स्कूल खोलने की बात की जा रही है। अब स्कूल खोलने पर क्या होगा ,कितने भयावह परिणाम आपके और हमारे सामने आने वाले हैं ये कल्पना से परे है।

कौन सा स्कूल इन बच्चों की जान की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगा?? कौन सा स्कूल इन बच्चों को मास्क (वह भी ठीक से) पहनाकर रखेगा?? साबुन सैनिटाइजर का उपयोग बार बार करवाऐगा?? और फिजिकल डिस्टेंसिंग की तो बात करना ही नहीं चाहिए, कौन ध्यान रखेगा इनका? जब ये एक दिन की पिकनिक पर लापरवाही करते हैं, अपनी गपशप और फोन पर लगे रहते हैं तब रोज रोज की फिजिकल डिस्टेंसिंग, मास्क, सैनिटाइजर ये बच्चे सम्भालेंगे ऐसा सोचना हमारी नादानी होगी।

अपने बच्चों को अभी तो स्कूल भेजना उचित ही नहीं है, ये लोग एक्सपेरिमेंट बेसिस पर स्कूल खोलेंगे, *फीस लेंगे* और कोरोना के केसेस बढ़ने पर स्कूल सबसे पहले बंद करेंगे। दुर्भाग्यवश अगर कोई बच्चा कोरोना की चपेट में आ गया तो यह स्कूल वाले खबर लेने की कोशिश भी नहीं करेंगे। क्या ये बच्चों की जान की गारंटी लेंगे?

इतनी हड़बड़ी में, खासकर जब हम इस समय कोरोना इन्फेक्शन के पीक की प्रतीक्षा कर रहे हैं, हमारे नौनिहालों हमारे बच्चों को कोरोना का चारा बनाकर तमाशा देखना कहाँ की बुद्धिमानी है? यह तो स्पष्ट समझा जा सकता है कि यह मामला केवल फीस की रकम के अरबों की हेराफेरी से ही संबंधित है, वरना बच्चे यदि 4-6 महीने बाद स्कूल जायेंगे तो क्या अंतर पड़ना है।यह तो तय है कि कोरोना इस साल जाने वाला नहीं है। 

वैसे भी हमारा स्कूल सिस्टम बच्चों को विकट परिस्थितियों में बचना (जिंदा बचे रहना) कभी भी नहीं सिखाता है।यह तो बच्चों को हाथ कैसे धोना चाहिए अथवा दांतों पर ब्रश ठीक से कैसे करना है यह भी नहीं सिखाता है। स्कूल में lunch के पहले बच्चों को हाथ धोने की बात तक तो सिखाई नहीं जाती है?? पर यही स्कूल फीस लेनी हो तो बच्चों को कोरोना के सामने डालने से गुरेज नहीं करता है।

ये वायरस पहले स्कूली बच्चों में एक से दूसरे में फैलेगा,फिर बच्चा घर आकर घर के दूसरे बच्चों, माता पिता, फिर बुजुर्गों में इन्फेक्शन फैलाऐगा। और इस तरह से यह वायरस पूरे घर को अपने आगोश में ले लेगा। यह सच्चाई है,अगर हमने अपने बच्चों को बतौर Experiment स्कूल भेज दिया तो बहुत जल्दी अब हमें इस जानलेवा मुसीबत का भी सामना करना है। 

ये कोरोना अब बच्चों के माध्यम से हमारे घरों में आकर फैलेगा। जुलाई का महीना बरसात के मौसम का प्रारंभ है, बारिश और उमस के कारण वायरस और बैक्टीरिया बड़ी तेजी से फैलते हैं, कोरोना का ये वायरस इस सीजन में कितना भयानक रूप लेगा ये अकल्पनीय है। ये सच है कि हर माता पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन बच्चों का भविष्य तो हम सब तब देखेंगे जब वह सुरक्षित होंगे। कोरोना लहर के सामने अपने बच्चों को स्कूल में  झोंक देने का अर्थ नरभक्षी जानवर के सामने बच्चों को लड़ने भेजने जैसा है।

यदि आप अभी भी अपने बच्चों को जल्दी स्कूल भेजना चाहते हैं तो स्वयं से कुछ प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास करें:

क्या आपको लग रहा है कि कोरोना वायरस का संक्रमण कम हो रहा है?
क्या आप ये मानते हैं कि कोरोना बच्चों पर रहम कर देगा ?
क्या ऑटो, टेंपो पर लटकते हुए बच्चों में फिजिकल डिस्टेंसिंग रह पायेगी?
क्या स्कूल बस कोरोना संक्रमण से अछूती रह सकती है? 

क्या स्कूल के टीचर, आया बाई, चपरासी, बस ड्राइवर, कंडक्टर, गार्ड सभी कोरोना टेस्ट में नेगेटिव साबित होने के बाद ही बच्चों के सामने लाए जायेंगे?
एक एक कक्षा में जहां 40-50-60 बच्चे होते हैं वहां क्या 1-1 मीटर की दूरी बनाए रखी जाएगी?
क्या बच्चे इस दूरी का  8-9 घंटे पालन कर पाऐंगे?? 
प्रार्थना स्थल पर तथा छुट्टी के समय जब बच्चे आपस में टकराते हुए निकलते हैं तब क्या यह दूरी बनाए रखी जा सकेगी?
लगातार मास्क पहनने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी (17%तक) देखी गई है, बच्चों को ऑक्सीजन की ज़रूरत हमसे ज़्यादा होती है, क्या बच्चे 8-9 घंटे मास्क लगा कर रह पाऐंगे?? 

समय समय पर मास्क कैसे उतारना, पुन: कैसे पहनना, पानी पीने व टिफिन खाते समय मास्क कैसे हटाना, उसके बाद हाथ  सैनिटाइजर से या सोप से कितनी देर तक कैसे धोना (रगड़ना) यह सब कौन बताएगा??

क्या पहले से काम के बोझ में दबा शिक्षक/शिक्षिका या स्कूल प्रबंधन आपके पैसे से कोई नया कोरोना सुपरवाइजर नियुक्त करेगा?
क्या बच्चों में कोरोना मॉरटालिटि कम होना आपके हिसाब से काफी है???

क्या बच्चे के इन्फेक्शन होने की अवस्था में स्कूल या शासन कोई जिम्मेदारी लेगा ?

इलाज के लाखों रूपए में कितना हिस्सा स्कूल या शासन वहन करेगा ?
कल को जब केसेस बढ़ेंगे, जो लगातार बढ़ रहें हैं, तब आपके गली मुहल्ले में होने वाली मौत आपको बच्चों समेत सेल्फ क्वाराईन्टिन को विवश कर देगी तब आपके बच्चे की पढ़ाई का साल और स्कूल में पटाई जा चुकी फीस का क्या होगा?

आपसे अनुरोध है कि एक जागरूक जनता और जिम्मेदार माता पिता बने और अपने बच्चों को कोरोना का ग्रास बनने न भेजें। तब तक जब तक कि स्थितियां पूरी तरह सामान्य ना हो जाऐं। 

आप किसी भी धर्म को मानने वाले हों या किसी भी राजनीतिक पार्टी के समर्थक हों, इतनी जल्दी स्कूल खोलने का विरोध करें। बच्चे हमारी सम्पदा से बढ़कर हैं, उन्हें हम दॉव पर नहीं लगा सकते हैं। जिन्हें पैसे कमाने हैं उन्हें कमाने दीजिए, परन्तु इसके लिए हमारे बच्चे गोटियां नहीं बनेंगे। आइए कोशिश करें कि स्कूल अभी न खोलें जाएं, हम सब मिलकर विरोध करेंगे तभी बात बनेगी। यदि आपको इस पोस्ट में कुछ सही लगता है तो इसे दूसरे पैरेंट्स को ज़रूर फारवर्ड करें।

संकलक- सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता 



Browse By Tags



Other News