...और मास्टर जी मेंगनियां गिनने लग गए
| -RN. Feature Desk - Jun 2 2020 2:40PM

-रामविलास जांगिड़

पुलिस आई और शिक्षक को गिरफ्तार करके ले गई। असरकारी विद्यालय का सरकारी शिक्षक! शिक्षक पर पुलिस ने यह आरोप लगाया कि यह शिक्षक आज प्रातः 11:00 बजे स्कूल में पढ़ाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। बैरक में बंद। बिखरे बाल। लटका चेहरा। शिक्षक बेचारा जैसे कोई हो मजदूर बेसहारा। गिरफ्तार कर लिया गया। थानेदार जिसकी तोंद गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से धरती में मिलकर जमीन पर पसरी हुई गर्जना कर रही थी। थानेदार की टांगों को शरीर के ऊपरी सिरे से जोड़े रखने में बेल्ट की सांसें वेंटिलेटर पर चल रही थी।

थानेदार ने डंडा फटकारा- 'तो मास्साब! तुम स्वीकार करते हो कि तुमने पढ़ाने का जुर्म किया है। जब सरकार ने तुझे टिड्डी गिनने का काम दिया, तो तुमने इसे ठीक से अंजाम नहीं दिया। जब गली मोहल्ले की गाय-भैंसों को गिन कर उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग में चलने के लिए तुम्हारी ड्यूटी लगाई तो तुमने हिन-हिनाते हुए इसे बड़ी मुश्किल से किया। जब तुम्हें कहा गया कि गांव-गली में हो रही शादियों में लॉकडाउन की पालना कराने के लिए तुम्हें लाउडस्पीकर से मुनादी करानी है, वह तुमने मरे-मरे किया।

जब गली के मक्खी मच्छरों को कोरोना से बचाने के लिए तुम्हें आदेशित किया, तो तुम यह सब करते हुए उछल-उछलकर पढ़ाने जैसे गंदे काम में लग गए। बताओ अब तुम्हारे साथ क्या किया जाए?' पुलिस वाले का 5 किलोमीटर लंबा बयान सुनकर शिक्षक जी की बची-खुची सांसें उखड़ने लगी। बैरक में मक्खी मच्छर और दुर्गंध के बीच मास्टर जी घुटनों के बल बैठ गए।

मास्टर जी ने अपने दोनों बिखरे हाथों को जैसे-तैसे इकट्ठा किया। उन्हें आपस में कुहनी तक जोड़ा। पांवों को आपस में सिकोड़ा। भर्राए गले से भिनभिनाती आवाज में कहा- 'हे कानून के देव! माता च पिता त्वमेव! प्लीज हेल्प मी एंड सेव! यह सच है कि मैंने पढ़ाने का जुर्म किया है। मैं कर्तव्य के चक्कर में आ गया और ऐसा कर बैठा। प्लीज मुझे माफ कर दें। मैं अब ऐसा नहीं करूंगा। प्लीज! मेरे पास है चांदी का एक कड़ा। है यह बहुत सड़ा।

बरसों पहले ससुर जी ने दहेज में मेरे हाथ में जड़ा। इसे मैं आपको बतौर उपहार भेंट करता हूं। प्लीज आप उसे ग्रहण कीजिए। मुझे घर जाने की शीघ्र ही आज्ञा दीजिए। अब कभी नहीं पढ़ाऊंगा मुझ पर पूरा विश्वास की कीजिए।' कहकर मास्टर जी ने थानेदार की ओर चांदी का कड़ा उछाला। थानेदार ने कड़े को अपनी जेब में जमा किया और फिर से डंडा फनफनाया। मामले की गहराई तक जाने का प्रवचन सुनाया- 'ए मास्टर! तूने यह जुर्म किया है। ये तो तुझे कबूल है, लेकिन मैं इस जुर्म की जड़ तक पहुंचना चाहता हूं।

मैं इस पढ़ाने वाली गैंग के बॉस तक पहुंचकर इस सारे मामले का पर्दाफाश करूंगा। तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई पढ़ाने की। आज एक मास्टर ने पढ़ाया कल सारे मास्टर पढ़ाने लगेंगे तो इस देश का क्या होगा? पढ़ा-पढ़ा कर लोगों को बेरोजगार बनाने की साजिश! कोरोना को लात मारकर इस दुनिया से भगाना, गधों की गणना करना, कुत्तों की वास्तविक संख्या बताना, कौवे किधर से आए इसकी तस्दीक करना जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों को छोड़कर यह पढ़ाने का गंदा काम आखिर तुम किस बॉस के इशारे से कर रहे हो।

मुझे इसकी तह तक जाना है। सच बता मास्टर वरना तेरा रिमांड ले लूंगा।' कहकर थानेदार जी पूरे शरीर से फट पड़े। रोम-रोम से उसका उनका बदन पुलिस की सरकारी ड्रेस से बाहर निकल कर पूरे कायनात में फैल गया। मास्टर दीनानाथ सपने से एकदम जग गए। उठे। चले। और बकरियों की मेंगनियां गिनने के सरकारी काम में असरकारी ढंग से लग गए।

-रामविलास जांगिड़, 18, उत्तम नगर, घूघरा, अजमेर (305023) राजस्थान
 



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