कोरोना ने बिगाड़ा 115 साल पुराना नवाबी जायका
| Agency - Jun 25 2020 2:46PM

लखनऊ। 115 साल से लखनऊ के जायके की शान रहे टुंडे के कबाबों का जायका भी कोविड-19 ने बदल दिया है। चौक के टुंडे कबाबी के यहां अब बड़े के बजाए चिकन के कबाब बिक रहे हैं। यही वजह है कि लॉकडाउन के बाद टुंडे की दुकान तो खुली पर लोगों की जुबान पर गलावटी कबाब का वह जायका नहीं लौटा।

चौक वाली टुंडे की दुकान के मालिक मोहम्मद उस्मान बताते हैं कि लॉकडाउन के बाद से शहर में बड़े का मांस बिकना बंद हो गया है, जिससे गलावटी कबाब बनाए जाते थे। ऐसे में पुरानी सिग्नेचर डिश को चिकन कबाब में बदलना पड़ा। दुकान पर आने वाले ग्राहकों ने इसे तफरीह में 'मजबूरी के कबाब' नाम दे दिया है। पहले के मुकाबले भीड़ बहुत कम है और मार्केट में भी लोग कम आ रहे हैं। लेकिन उस्मान को उम्मीद है कि जल्द ही सब सामान्य हो जाएगा और वह फिर अपनी सिग्नेचर डिश शौकीनों को परोस सकेंगे।

मुंह में घुल जाते थे

विक्टोरिया स्ट्रीट पर बजाजा निवासी समी अब्बास बताते हैं कि मुंह में घुल जाने वाले टुंडे के कबाब, अब पहले जैसे नहीं रहे। बड़े का मीट मसालों को अपने में जज्ब कर लेता था पर चिकन के मीट के साथ ऐसा नहीं होता।

मुगलई जायका कहीं खो गया

पीर बुखारा निवासी यशब हुसैन कहते हैं कि जिस दिन टुंडे के कबाब मिलना शुरू हुए, हम सभी दोस्त बेहद खुशी-खुशी कबाब खाने गए। लेकिन चिकन के कबाब में वह मुगलई जायका ही नहीं था।

दोगुनी हो गई कीमत

चौक वाली दुकान पर कबाब की एक टिक्की पहले तीन रुपये की मिलती थी, जो कि अब छह रुपये में बिक रही है। वजह साफ है, लॉकडाउन से पहले बड़े का मीट 150-160 रुपये किलो मिलता था। अनलॉक में बड़ा तो मिल ही नहीं रहा, चिकन 240 रुपये/ किलो है। बकरे के मीट का भाव तो 750-800 रुपये/ किलो है। ऐसे में वो तो कबाब के लिए इस्तेमाल होने से रहा।

टुंडे कबाबी की अहमियत शहर के गरीब आदमी को कम पैसे में जायकेदार खाना खिलाने के लिए भी है। पहले एक प्लेट कबाब (बड़े के) और एक पराठे की कीमत 25 रुपये बैठती थी। 30-35 रुपये में एक व्यक्ति का खाना हो जाता था। लेकिन अब यह खर्च 50-60 रुपये हो गया है। ज्यादा भीड़ न लगे इसलिए पराठा भी डबल ही बेचा जा रहा, इसलिए उसकी कीमत भी दोगुनी है।

पहली बार 90 दिन के लिए बंद हुई दुकान

115 साल में ऐसा पहली बार है जब टुंडे कबाब की दुकान 90 दिन तक बंद रही। विदेश तक में टुंडे के कबाब पार्सल होते थे।



Browse By Tags



Other News