काश! सभी डॉ. नवीन जॉन जैसी सोच वाले हो जाते तो.......
| - RN. Network - Jun 27 2020 4:41PM

डॉ. नवीन जॉन

लाकडाउन अवधि में पूर्ण फीस माफी की मुहिम रहेगी जारी: सूरज कुमार

पैन्डेमिक कोविड-19 का कहर और देश में लागू लाकडाउन, इसके शुरूआती दिनों यानि मार्च के अन्तिम और अप्रैल के प्रथम सप्ताह से ही विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के फीस माफी को लेकर संघर्षरत। जी हाँ! ऐसा हम मार्च महीने के अन्त से ही देख रहे हैं। मीडिया, सोशल मीडिया के जरिये विद्यालयी प्रबन्धतन्त्र से फीस माफी की अपील करने वाला नौजवान और कोई नहीं अम्बेडकरनगर जिले का समाजसेवी, संकल्प मानव सेवा संस्था का संस्थापक सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता है। बता दें कि इसी के साथ इस समाजसेवी ने अपनी संस्था के लेटर हेड पर अपील-पत्र प्रेषित कर सभी विद्यालय संचालकों, प्रबन्धकों/प्रधानाचार्यों से छात्र-छात्राओं की फीस माफी की मांग भी की जा चुकी है। सूरज कुमार ने पत्र में सभी विद्यालयों के प्रमुखों से मांग किया है कि अप्रैल, मई, जून (लाकडाउन) की पूरी फीस माफ की जाये। 

समाज सेवी द्वारा की गई इस अपील पर कई विद्यालयों ने फीस माफी की घोषणा भी किया है। फीस माफी जैसे मुद्दे पर अपना ध्यान केन्द्रित कर आम अभिभावकों की आर्थिक समस्या को किसी हद तक कम करने का प्रयास करने वाले सूरज कुमार ने कई विद्यालयों के प्रबन्धकों व प्रधानाचार्यो से मिलकर फीस माफी की मांग जैसी अपील भी की। इसी क्रम में इस समाजसेवी ने अकबरपुर के प्राचीनतम अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय सेन्ट जॉन्स स्कूल के प्रबन्धक से मुलाकात कर छात्र-छात्राओं और उनके आर्थिक रूप से परेशान अभिभावकों की समस्याओं से अवगत कराया। 

सेन्ट जॉन्स स्कूल, अकबरपुर के प्रबन्धक डॉ. नवीन जॉन ने संकल्प के संस्थापक युवा समाजसेवी सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता की बातों को बड़े गौर से सुना और इस पर गहन विचार करते हुए कहा कि- उन्होंने किसी भी अभिभावक से फीस की मांग नहीं किया है, और न ही इस आशय का कोई मैसेज बजरिये मोबाइल प्रेषित किया है। उनके विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के माता-पिता व अभिभावक आकर जब भी शुल्क जमा करने की बात करते हैं तो उनका उत्तर होता है कि जब तक जिला प्रशासन का कोई निर्देश नहीं मिलता है तब तक हम फीस नहीं लेंगे।

प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी डॉ. जॉन ने कहा कि वह हृदयहीन नहीं हैं। जिस तरह समाजसेवी होकर सूरज कुमार हर आम नागरिक की बेहतरी के लिए प्रयासरत हैं ठीक उसी तरह वह भी हैं। उनका विद्यालय बच्चों का ठीक उसी तरह का आंगन है जैसा कि वह लोग अपने माता-पिता, अभिभावक के द्वारा निर्मित कराये गये मकान/घर में रहते हैं। जब तक बच्चा विद्यालय में होता है उसके हर तरह के देखभाल की जिम्मेदारी उनकी होती है। हमारा विद्यालय अपने स्थापना का 50वाँ वर्ष पूरा करने जा रहा है। हमारा ध्यान बच्चों, अभिभावकों के साथ-साथ शैक्षणिक कार्य करने वाले समस्त विद्यालयी अध्यापक/अध्यापिकाओं की समस्याओं पर है। हमारा पूरा प्रयास रहता है कि किसी भी छात्र-छात्रा और उनके अभिभावक को हमसे कोई शिकायत न हो। 

यह तो रही डॉ नवीन जॉन सर की बात। परन्तु इसी बीच हाई कोर्ट के फैसले ने अन्य महंगे विद्यालयों के प्रबन्धकों के हौंसले बुलन्द कर दिये। हाई कोर्ट ने फीस माफी सम्बन्धी दायर याचिका की सुनवाई करते हुए कहा है कि विद्यालयी प्रबन्धतन्त्र द्वारा ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था कराई जा रही है ऐसे में तीन माह तक की फीस माफी की मांग करना उचित नहीं है। उधर प्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने भी फीस माफी की मांग पर गम्भीरता पूर्वक विचार नहीं किया है।

इन दोनों कारणों से सामान्य हैसियत वाले अभिभावकों, माता-पिता को अवश्य ही आर्थिक संकट झेलना पड़ेगा। सूरज कुमार गुप्ता ने फिर भी हिम्मत नहीं हारी है। सोते-जागते यह युवा समाज सेवी बस एक ही बात सोचता रहता है कि महंगे विद्यालय में सामान्य जन हितार्थ प्रबन्धतन्त्र को लाकडाउन के तीन संकटकालिक महीनों (अप्रैल, मई, जून) की फीस माफ करनी चाहिए। उसका कहना है कि काश अन्य विद्यालयों के प्रबन्धक/प्रधानाचार्य एवं संचालक भी सेन्ट जॉन्स स्कूल अकबरपुर के प्रबन्धक डॉ. नवीन जॉन की तरह सोच पाते। 

रेनबोन्यूज से विस्तृत वार्ता करते हुए युवा समाजसेवी सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता ने कहा कि ऊपर वाला सबको सद्बुद्धि दे। लोग संवेदनशील बनें। उच्च और सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीष भी आर्थिक रूप से तंगहाल चल रहे आम आदमी के कष्ट को महसूस कर सकें। प्रदेश सरकार के मुखिया को भी आर्थिक तंगी झेल रहे आम आदमी की बेबसी महसूस हो, उनमें भी संवेदनशीलता आये। यदि ऐसा हो जायेगा तो अवश्य ही लाकडाउन अवधि तीन महीने (अप्रैल, मई, जून) की फीस माफ हो जायेगी। इन्हीं सब उधेड़ बुन में पड़ा अन्दर से छटपटाहट लिये बेताब युवा समाजसेवी सूरज कुमार गुप्ता ने अपने अभियान के सकारात्मक परिणाम की उम्मीद को संजो रखा है। 

-रीता विश्वकर्मा



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