उ.प्र.: अम्बेडकरनगर के अशरफपुर किछौछा न0पं0 के कोटेदार पर गरीबों को राशन न देने का आरोप
| - Rainbow News Network - Jul 3 2020 3:54PM

खबर प्रकाशन पर बौखलाये दबंग और पहुँच वाले कोटेदार ने पत्रकार पर लगाये गम्भीर आरोप

देश में 80 प्रतिशत किसान हैं, जिन्हें सम्मान देने के लिए अन्नदाता जैसे आदरसूचक शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। इसी के साथ देश में गरीबों की संख्या जिनका वास्तविक आंकड़ा नहीं प्राप्त होने की वजह से उनके प्रतिशत के बारे में स्पष्ट कह पाना थोड़ा मुश्किल है। भारत देश की जनसंख्या 1 अरब 35 करोड़ से अधिक है, इसी आबादी में अन्नदाता भगवान स्वरूप किसान और लगभग 68.8 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनके पास जठराग्नि बुझाने के लिए घरों में अन्न के दानों की मोहताजी है। बहरहाल इन सब पर न जाकर इतना कहना है कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में देश वासियों को रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकार द्वारा व्यवस्था दी गई है। योजनाएँ बनाई गई हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य देश में सभी को अन्न और मकान तथा आर्थिक रूप से मजबूती प्रदान करना है। 

आपदा काल में देश की जनता के प्रति चिन्ताग्रस्त सरकारें पूर्व से चल रही गरीब हितकारी योजनाओं के अलावा अन्य ऐसी योजनाएँ संचालित करती है, जिससे देश के अन्तिम छोर से शीर्ष तक रहने वाले हर आम आदमी की जरूरतें पूरी हो सकें। इस समय देश में कोरोना संकटकाल चल रहा है। कोविड-19 के कहर से जहाँ पूरा विश्व कराह रहा है वहीं भारत देश भी इससे जूझ रहा है। देश में मार्च महीने से लाकडाउन लागू है। जनमानस पंगु सा हो गया है। इसके दृष्टिगत केन्द्र व प्रदेश सरकारों ने आम आदमी के लिए ऐसी योजनाएँ लागू की है, जिससे उनकी जिन्दगियां तबाह न हो सकें। लाकडाउन में अमूमन श्रमिक व गरीब तबका काफी प्रभावित है। इसके सामने आर्थिक तंगी तो है ही साथ ही खाने की मोहताजी ने भी सुरसा जैसा मुँह फैला रखा है। गरीब, मजदूर, असहाय और सरकारी इमदाद की पात्रता वाले लोगों के लिए लाकडाउन में केन्द्र व प्रदेश की सरकार ने निःशुल्क राशन वितरण किये जाने का आदेश जारी कर रखा है। इसके अन्तर्गत गरीब, मजदूर श्रमिक और पात्र राशन कार्ड धारकों को राशन दिये जाने का प्रावधान है। 

कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी का कहर, देश में लाकडाउन की स्थिति, सरकारी योजना के तहत गरीबों तक पहुँचाया जाने वाला उनके मुँह का निवाला कदाचारियों और भ्रष्टाचारियों की जेबों की वजन बढ़ाने लगा है। देश/प्रदेश के तमाम हिस्सों से ऐसी खबरें मिलती रहती हैं जिसके अनुसार सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गरीबों के साथ सम्बन्धित लोगों द्वारा विभिन्न तरह के खेल खेले जा रहे हैं। मसलन- पूर्ति विभाग और कोटेदार तथा अन्य प्रभावशाली बिचौलियों का गठजोड़, गरीबों के निवालों का सदुपयोग स्वहितार्थ करना। यानि इस संकट काल में भी लूटम-लूट। इस तरह के कृत्यों में संलिप्त लोगों को देखकर ऐसा नही प्रतीत होता कि इस कोरोना काल, जिसे अनिश्चित कहा जा सकता है में कब क्या हो जाये कुछ भी कहना मुश्किल है। प्राण संकट में है, लोग पैसा कमाने में जुटे हुए हैं। न तो उन्हें अपने ईष्ट-अभीष्ट का डर है और न ही उनमें रंच मात्र नैतिकता ही दिखाई पड़ती है। तात्पर्य यह कि सामान्य दिनों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली से सरोकार रखने वाले जिम्मेदारों की कार्य प्रणाली में रंच मात्र भी तब्दीली नहीं आई है। अपितु इस समय धन कमाने की होड़ और बढ़ गई है। साधारण भाषा शैली में यदि यह कहा जाये कि इस समय शहरी और ग्रामीण स्तर पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जिम्मेदारों द्वारा गरीबों के हक पर डाका डाला जा रहा है तो कतई गलत नहीं होगा। 

रेनबोन्यूज को उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जिले से मिलने वाली खबरों से पता चला है कि राशन कोटेदारों द्वारा पात्र लाभार्थियों के साथ अमानवीय व्यवहार करना आम बात हो गई है। विरोध करने वालों की शिकायतों का विभागीय अधिकारियों द्वारा अनदेखी किया जाना जैसी पुरानी परम्परा यहाँ अब भी कायम है। कोरोना काल में गरीबों की शिकायतों की अनदेखी करना सरकारी अहलकारों के लिए कोई बड़ी बात नहीं है। सरकारी अहलकार और राशन कोटेदार तथा प्रभावशाली बिचौलियों का गठजोड़ इतना मजबूत है कि इसे खोल या तोड़ पाना बड़ा ही मुश्किल है। इसके अलावा ये लोग मनमानी,  भ्रष्टाचार को छुपाने एवं उच्च स्तरीय जाँच की आँच से बचने के लिए सत्तारूढ़ दलों से साठ-गांठ बनाये रखते हैं। 

एक युवा पत्रकार ने अम्बेडकरनगर जिले के बसखारी ब्लाक से प्रकाशनार्थ एक संवाद भेजा है। जिसमें उसने जिक्र किया है कि कोरोना काल में सरकारी फरमान के बावजूद योजनाओं का लाभ पात्रों को नहीं मिल रहा है। पत्रकार ने लिखा है कि दीन-हीन दशा में जिन्दगी काट रहे अनेकों गरीब परिवारों ने अपनी दयनीय दशा को दिखाते हुए व्यथा-कथा कही है। उक्त पत्रकार ने लिखा है कि अशरफपुर किछौछा नगर पंचायत के मलिक मखदूम नगर निवासी कई गरीबों, पात्रों को बीते 3 माह से अनाज का एक दाना सरकार के योजना आदेश अनुसार नहीं मिला है। प्रेषित संवाद/आलेख में पत्रकार असलम अब्बास ने लिखा है कि अशरफपुर किछौछा का कोटेदार मो0 राशिद वार्ड नम्बर 2 के गरीब वासिन्दों को न तो निःशुल्क मिलने वाला अनाज ही दिया है और न ही सामान्य ढंग से मिलने वाला प्रतिमाह का राशन। पीड़ित जब अपना राशन मांगते हैं तब दबंग कोटेदार मो0 राशिद उन्हें डांटकर भगा देता है। इसके अलावा वार्ड के सभासद शिवपूजन भी इन पीड़ितों की कोई सुनवाई नहीं करते हैं। कोटेदार मो0 राशिद सीधे तौर पर कहता है कि जाओ, तीन महीने बाद राशन मिलेगा। 

पत्रकार असलम अब्बास (ग्राम व पोस्ट- बेला परसा, थाना बसखारी, अम्बेडकरनगर (उ.प्र.), 8429555923) ने लिखा है कि अशरफपुर किछौछा (नगर पंचायत) सीमा क्षेत्र के मलिकपुर मखदूम नगर, बसखारी में रहने वाले राजकुमार, राम कुमार आदि लाभार्थी पात्रों की हालत दयनीय हो चुकी है। ये लोग सरकारी योजना के तहत निःशुल्क राशन सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से नहीं पा रहे हैं। इसी तरह की शिकायत इसी नगर पंचायत के वार्ड नम्बर-2 निवासी दिलीप कुमार ने भी किया है। दिलीप कुमार का कहना है कि उक्त वार्ड का सभासद मयाराम उनकी सुनता ही नहीं। कोटेदार मो0 राशिद की बात ही दीगर है। इन दोनों के अलावा उनकी फरियाद नगर पंचायत के जिम्मेदारों द्वारा भी नहीं सुनी जाती। पूर्ति महकमे की बात कौन कहे। 

इस बावत मो0 राशिद से जब वार्ता की गई, तो उन्होंने रेनबोन्यूज को बताया कि पत्रकार असलम अब्बास द्वारा जो भी कुछ कहा जा रहा है वह सर्वथा गलत है। उसने पत्रकारिता का धौंस दिखाकर दो बोरा राशन और 5 हजार रूपए नकद की मांग किया था। मेरे द्वारा नहीं दिये जाने पर वह पत्रकार मेरे ऊपर झूठा आरोप लगाकर इधर-उधर कहता फिर रहा है। तथा खबरें वायरल करवा रहा है। वह यह काम पिछले 5 वर्षों से कर रहा है। यह पत्रकार क्षेत्र वासियों के लिए सिर दर्द बना हुआ है। कोटेदार मो0 राशिद ने यह भी कहा कि जिन लोगों का नाम पत्रकार द्वारा लिया जा रहा है, उन लोगों का नाम हमारी दुकान पंजिका में दर्ज ही नहीं हैं। दूसरी तरफ पत्रकार असलम अब्बास का कहना है कि अशरफपुर किछौछा का कोटेदार मो0 राशिद बड़ा दबंग और फांदेबाज है। वह किसी से डरता भी नहीं है। वह खबर के प्रकाशन से तिलमिला गया है। अपने बचाव में और कुछ न कहकर मुझ पर राशन और नकद पैसा मांगने का आरोप लगा रहा है। कई लोगों से मेरी पीठ पीछे मेरे बारे में अनर्गल बातें करते हुए मुझे देख लेने की धमकियाँ भी दीं। 

पत्रकार और कोटेदार के बीच क्या चल रहा है, क्या नहीं यह तो अम्बेडकरनगर जनपद के स्थानीय प्रशासन व सम्बन्धित महकमे के जिम्मेदार पदाधिकारियों द्वारा जाँच का विषय है। रेनबोन्यूज का इस पर कुछ भी नहीं कहना है। हाँ यदि अशरफपुर किछौछा वार्ड नम्बर 2 निवासी दिलीप कुमार और मलिकपुर मखदूम नगर (बसखारी) निवासी राज कुमार, राम उजागिर वास्तविक रूप से पात्र और पीड़ित हैं तो उनके साथ न्याय होना चाहिए। 



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