अकबरपुर वन सर्किल के भीटी में पेड़ों की अवैध कटान जोरों पर
| - Rainbow News Network - Jul 8 2020 4:00PM

अनलॉक-02 लागू, कोरोना का कहर हो या फिर महामारी से लोग मर रहे हों, जीवन बचाने का संकट हो, आंधी तूफान के साथ मूसलाधार बारिश हो, मानसून अपनी जवानी पर हो, भूकम्प आये, घर गिरे.......आदि...आदि...आदि। कोरोना से बचाव के लिए हमेशा मास्क पहनो.........पर्यावरण संतुलित रखने के लिए वृक्ष (पौधा) लगाओ.........कुल मिलाकर मानव जीवन हर तरह से, हर क्षेत्र में सक्रिय है। किसान किसानी कर रहा है, वहाँ भी हाय-तौबा। अफसर अफसरी कर रहा है वहाँ भी लूटम-लूट.....। चोर चोरी कर रहा है पुलिस महकमे की चाँदी ही चाँदी। समस्त क्रियाएँ चाहे वह नैतिक हों अथवा अनैतिक जारी हैं। न किसी को मरने का गम है और न ही पाप-पुण्य का अन्तर ही मालूम। 

खैर! आइये असल मुद्दे पर आते हैं। सरकार द्वारा करोड़ो रूपये खर्च कर प्रतिवर्ष बंजर हो रही धरती को हरा-भरा रखने के लिए वनाच्छादित किया जाता है और इसके लिए पौध रोपण/वृक्षा रोपण जैसे कार्यक्रमों का आयोजन पूरे जोर-शोर से होता है। जिलों में महकमा-ए-जंगलात की स्थापना इसी लिए की गई है कि वन सम्पदा की संरक्षा के साथ-साथ वृक्षों का रोपण और उनकी देखभाल अच्छी तरह से हो सके। यह सब तो मोटे-मोटे ऐसे कार्य हैं, जिन्हें हर कोई आसानी से जान सकता है। इसके अलावा भी वन विभाग को आरा मिल संचालन एवं वृक्ष कटान हेतु परमिशन दिये जाने का भी अधिकार है। लाखों रूपए खर्च करके सरकार द्वारा वन विभाग में प्रभागीय वनाधिकारी, उप खण्ड अधिकारी, क्षेत्रीय वन अधिकारी, फारेस्टर (वन दारोगा), फारेस्ट गार्ड (वन रक्षक) और दर्जनों कार्यालयी कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। यह व्यवस्था देश के गणतन्त्र दिवस 26 जनवरी 1950 से ही चल रही है। परन्तु अच्छी पगार पाने वाले वन विभाग के मुलाज़िम अपने दायित्वों की सर्वथा अनदेखी करते हुए स्वहितार्थ धनोपार्जन में लगे हुए हैं। महकमे का मुलाज़िम वृक्षारोपण, वृक्ष कटान और अवैध आरा मिल संचालन के जरिये रातों-रात पैसे वाला, सुख-सुविधा सम्पन्न बनने की होड़ में लगा हुआ है। 

-सम्पादक

उत्तर प्रदेश के जनपद अम्बेडकरनगर के वन विभाग की हालत ठीक ऐसी ही है। इसके बारे में जितना कुछ कहा जाये कम ही होगा। उच्च अधिकारी से लेकर वन रक्षक तक सभी मानव जीवन के लिए उपयोगी वृक्षों के बारे में कम अपने जेब का वजन बढ़ाने में ज्यादा लगे हुए हैं। 4 सर्किलों में विभक्त अम्बेडकरनगर जिले का वन विभाग और इसमें नियुक्त/कार्यरत मुलाज़िम, दलालों, बिचौलियों, सफेदपोशों और कतिपय मीडिया परसन्स का याराना जग जाहिर है। प्रभागीय वनाधिकारी से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक सभी सुख-सुविधा सम्पन्न एवं वैभवशाली जीवन जी रहे हैं। 

पूरा लाकडाउन यानि बीता 100 दिन वन विभाग और ठेकेदारों के लिए वरदान साबित हुआ। धड़ाधड़ पेड़ कटे। ऊपर से आँधी, पानी और मानसून बरसात ने विशालकाय वृक्षों को जमींदोज कर दिया। बहाना अच्छा मिला। आरा मिल संचालक और ठेकेदार तथा वन विभाग के जिम्मेदारों की बन आई। गाँव से लेकर शहर तक, बाग से लेकर सड़कों तक धराशाई हुये वृक्षों के नाम पर अवैध रूप से अन्य वृक्षों की कटान ने रफ्तार पकड़ी। 

रेनबोन्यूज को मिली खबर के अनुसार जिले के थाना भीटी क्षेत्र के गाँव बनगाँव में इस समय हरे पेड़ों की अवैध कटान चल रही है। यह कटान फारूख नामक एक ऐसे व्यक्ति द्वारा कराई जा रही है जो अयोध्या जनपद के हैदरगंज का निवासी और पुराना पेड़ कटवा ठेकेदार है। फारूख हैदरगंज भीटी से सटा हुआ है इसलिए इस जिले की सीमा और भीटी क्षेत्र के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़ काटने का धन्धा करता है। पूरे भीटी तहसील क्षेत्र में फारूख ठेकेदार पेड़ काटने के लिए मशहूर हैं। यह वन विभाग का प्यारा-दुलारा और खास सहयोगी माना जाता है। 

रेनबोन्यूज ने इस खबर के सम्बन्ध में क्षेत्रीय वन अधिकारी वी.के. मिश्र से दूरभाष पर सम्पर्क करना चाहा तो उन्होने कॉल ही रिसीव नहीं किया। ऐसा नहीं कि वह पहली बार इस तरह कर रहे हों। ऐसा करना उनकी पुरानी आदत है। वह रेनबोन्यूज की कोई कॉल स्वीकार ही नहीं करते हैं। उनके जीवन का फण्डा ही कुछ दूसरा है। बड़े-बड़े लोगों, बड़े मीडिया घरानों से सम्बद्ध मीडिया परसन से इनका याराना जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। इन्हें विभाग का मुखिया यानि डी.एफ.ओ. ही माना जाता है। चर्चाओं के अनुसार पूरे जिले में वन विभाग से सम्बन्धित कार्यों की निगरानी और स्वीकृति इन्हीं के इशारे पर होती है। 

क्षेत्रीय वन अधिकारी के कॉल रिसीव न करने के बाद फारेस्टर (वन दारोगा) श्रीनाथ पाल से भीटी बनगाँव में फारूख ठेकेदार द्वारा कटवाये जा रहे पेड़ के बावत बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में नहीं है। इसके उपरान्त उक्त क्षेत्र के फारेस्ट गार्ड मनीराम से सम्पर्क किया गया। दूरभाष पर बात करते हुए फारेस्ट गार्ड ने बताया कि हाँ एक पेड़ है उसे फारूख कटवा रहा है। वह पेड़ पुराना है और बनगाँव के निवासी एक ठाकुर की सम्पत्ति है। 

अकबरपुर हो या भीटी..........टाण्डा, जलालपुर, आलापुर सभी क्षेत्रों में पेड़ों की अवैध कटान पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। मीडिया में बोलचाल की भाषा में यह लिखा जाता है कि वन विभाग और पुलिस की मिली भगत से हरे वृक्षों की कटान जोरों पर है। बार-बार घिसा-पिटा, पुराना शब्द-वाक्य इस्तेमाल न करके बस इतना ही कहना है कि प्राणवायु (आक्सीजन) प्रदत्त करने वाले वृक्षों की कटान पर नियंत्रण लगाये जाने की आवश्यकता है।

यदि क्षेत्रीय वन अधिकारी वी.के. मिश्रा जैसा अधिकारी इस तरह के संवाद करने और सुनने से परहेज करता है तो जाहिर सी बात है कि यह दुःखद स्थिति है। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। और दोनों पहलुओं पर निगाह डालकर वर्तमान परिस्थिति का आंकलन करना जरूरी है। वी.के. मिश्र एक सुशिक्षित एवं जिम्मेदार वन अधिकारी हैं। इनके इस तरह के अप्रत्याशित व्यवहार से रेनबोन्यूज को अवश्य ही आश्चर्य होता है कि वह युवा, अनुभवी मिश्रा जी कहाँ हैं जो पूर्व में गाहे-बगाहे दिन हो या रात इसकी परवाह किये बगैर कॉल व मैसेज करके हाल-चाल लिया करते थे। चीयरफुल मूड में अपनी बातें शेयर करके अपनत्व का एहसास कराते थे।  



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