कोरोना वैक्‍सीन न बन सकी तो? फ‍िर ऐसे काबू में आएगी ये महामारी
| Agency - Jul 10 2020 2:03PM

कोरोना वायरस महामारी को काबू करने के लिए वैक्‍सीन बनाने की प्रक्रिया युद्धस्‍तर पर चल रही है। 19 वैक्‍सीन ऐसी हैं जो क्लिनिकल ट्रायल या उससे आगे के स्‍टेज में हैं। HIV/एड्स और मानव जीनोम पर शानदार रिसर्च कर चुके अमेरिकन साइंटिस्‍ट विलियम हेजलटीन का मानना है कि साल के आखिर तक कोविड-19 वैक्‍सीन आने के लिए डेवलपमेंट का हर एक स्‍टेप परफेक्‍ट होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि ऐसा होना दुर्लभ है।

बतौर विलियम, इंसानों पर टेस्‍ट हो रही वैक्‍सीन के साइड इफेक्‍ट्स सामने आ रहे हैं। उनमें जो ताकतवर इन्‍ग्रीडिएंट्स यूज हो रहे हैं, वे वैक्‍सीन को बेहतर काम करने में मदद करते हैं मगर उनकी वजह से हेल्‍थ इश्‍यूज भी हो सकते हैं। विलियम हेजलटीन ने सीएनएन में लिखा है कि अगर कोरोना की कोई सेफ वैक्‍सीन डेवलप नहीं हो पाती तो भी एक उम्‍मीद है कि ये महामारी जल्‍द दूर हो जाएगी।

विलियम के मुताबिक, कोरोना मरीजों को ठीक करने के लिए ऐंटी-कोविड दवाएं डेवलप हो सकती हैं। इनसे न सिर्फ मरीजों का इलाज हो सकेगा, बल्कि ये नए लोगों को बीमारी से भी बचाएंगी। दुनियाभर में जिन ड्रग्‍स पर रिसर्च चल रहा है, उनमें से दो ने उम्‍मीद जगाई है।

ऐंटीवायरल दवाएं कर रहीं कोरोना पर वार

ऐंटीवायरल ड्रग्‍स ने SARS-CoV-2 पर असर दिखाया है और उसे उसकी कॉपी बनाने से रोक रही हैं। ऐंटीवायरल दवाएं आमतौर पर उन एंजाइम्‍स को टारगेट करती हैं जिनकी मदद से वायरस अपना जीनोम कॉपी करता है। कोरोना एक प्रोटीन का इस्‍तेमाल अपनी कॉपीज बनाने के लिए करता है। पिछले महीने साइंस मैगजीन में छपी एक रिसर्च में दो ऐसे ड्रग्‍स की खोज का ऐलान किया गया था जो SARS-CoV-2 प्रोटीन को कंट्रोल करते हैं। अभी इंसानों पर इसका टेस्‍ट नहीं हुआ है मगर कुत्‍तों और चूहों पर टेस्‍ट में दवा प्रभावी भी रही है और नॉन-टॉक्सिक भी।

दूसरी तरह के ड्रग जो कोरोना पर असरदार साबित हो रहे हैं, वे हैं मोनोक्‍लोनल ऐंटीबॉडीज। ये लैब में तैयार की गईं वे ऐंटीबॉडीज हैं जो SARS-CoV-2 के स्‍पाइक प्रोटीन को हमारे शरीर के सेल रिसेप्‍टर्स से अटैच होने से रोक देती हैं। ऐसा कर ये ऐंटीबॉडीज इन्‍फेक्‍शन की संभावना को ही खत्‍म कर देती हैं। जून में छपी एक रिसर्च में दो ऐंटीबॉडीज की पहचान की गई थी। यह दोनों अलग-अलग भी असरदार हैं मगर इनका कॉम्बिनेशन कोरोना पर और कहर ढा सकता है।

इंसानों पर टेस्‍ट की जाएंगी डबल ऐंटीबॉडीज

अमेरिका में इसी हफ्ते ऐलान किया गया है कि डबल ऐंटीबॉडी कॉकटेल का 2,000 इंसानों पर टेस्‍ट किया जाएगा। इससे यह चेक किया जाएगा कि वे इन्‍फेक्‍शन रोकने और कोविड-19 की शुरुआती स्‍टेज वाले मरीजों को ठीक करने में कितनी कारगर हैं। ऐसी ऐंटीबॉडीज पहले भी उन वायरस पर असरदार साबित हुई हैं जो SARS-CoV-2 से मिलते-जुलते हैं।

कई वैक्सीन के शुरुआती नतीजे अच्‍छे रहे हैं मगर उनमें बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। क्‍योंकि जरा सी चूक पूरी मानव जाति के लिए भयंकर खतरा बन सकती है। वैसी ही सावधानी इन दवाओं की टेस्टिंग में भी बरतनी होगी। हालांकि वैक्‍सीन के मुकाबले इन दवाओं की टेस्टिंग बेहद कम समय में पूरी हो जाती है। ऐंटीवायरल और मोनोक्‍लोनल ऐंटीबॉडीज का वायरस पर कैसा असर होता है, यह कुछ दिन में पता लगाया जा सकता है। अगर वैक्‍सीन बनाने में वक्‍त लगता है तो हम इन दवाओं का इस्‍तेमाल शुरू कर सकते हैं ताकि जिन्‍हें सबसे ज्‍यादा खतरा है, उन्‍हें इन्‍फेक्‍शन से बचाया जा सके और बीमारों को ठीक किया जा सके।



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