पुलिस को नहीं है एनकाउंटर का अधिकार
| -RN. Feature Desk - Jul 10 2020 5:57PM

क्या पुलिस किसी एनकाउंटर में इतनी आसानी से इतने कुख्यात अपराधी को मार सकती है? क्या पुलिस किसी अपराधी को अदालत में पेश करने की बजाय एनकाउंटर कर सकती है? यह तमाम ऐसे सवाल है जो विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद एक बार फिर हमारे जहन में उठने लगे है। तो एक बात आपको स्पष्ट कर दें कि रूल ऑफ लॉ में एनकाउंटर की कोई भी जगह नहीं है। पुलिस सेल्फ डिफेंस यानी कि आत्मरक्षा के तहत ही कार्रवाई कर सकती है।

जाहिर सी बात है विकास दुबे के मामले में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। पुलिस ने आत्मरक्षा के लिए ही उसे एनकाउंटर में मार गिराया। एनकाउंटर और छानबीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में ऐतिहासिक फैसला दिया था। कोर्ट ने इस से जुड़ा हुआ एक गाइडलाइंस भी जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले वरिष्ठ वकील संजय पारीक ने बताया कि सेल्फ डिफेंस में अगर कोई पुलिस गोली चलाने या हथियार चलाने की कार्यवाही करता है तो उसे यह साबित करना होगा कि उसने यह कार्यवाही सेल्फ डिफेंस में की है।

कानून की किताब पुलिस को कतई एनकाउंटर का अधिकार नहीं देता है। सेल्फ डिफेंस के तहत आम आदमी भी अपनी जान बचाने के लिए बल का प्रयोग कर सकता है। सीआरपीसी की धारा 46 में यह लिखा गया है कि जब पुलिस किसी आरोपी को गिरफ्तार करते है और उस समय अगर वह आरोपी पुलिस बल पर हमला करता है तो पुलिस जान बचाने के लिए हथियार चला सकती है।

एनकाउंटर को लेकर एनएचआरसी के तत्कालीन चेयरमैन जस्टिस रंगनाथ मिश्रा ने सिफारिश की थी कि अगर कोई एनकाउंटर होता है तो मामले में धारा 302 के तहत केस दर्ज किया जाना चाहिए। वही सुप्रीम कोर्ट ने एनकाउंटर मामले में छानबीन पर जोर दिया था और कहा था कि अगर एनकाउंटर के दौरान पुलिस गोली चलाती है या चलानी पड़ती है और उससे मौत होती है तो एफआईआर दर्ज की जाएगी।

इसकी छानबीन किसी थाने की पुलिस करेगी या सीआईडी करेगी या अन्य जांच एजेंसी भी कर सकते हैं। आईपीसी हो या फिर सीआरपीसी, कही भी एनकाउंटर के लिए पुलिस को अधिकार नहीं दिया गया है। संविधान में एक आरोपी तब तक दोषी नहीं होता है जब तक उसके अपराध साबित ना हो जाए। ऐसे में उसे एनकाउंटर में मारे जाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। 

-रीता विश्वकर्मा



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