भारतीय सेना की गोपनीयता भंग करती मीडिया
| -RN. Feature Desk - Aug 1 2020 5:40PM

कर्नल अशोक सिंह एक रिटायर्ड सेनाधिकारी हैं। उन्होंने बहुत महत्वपूर्ण सवाल किया है। सेना के हथियार ख़रीद सभी देशों का एक गुप्त रूप से किया जाने वाला काम है। कब ,कहाँ , कैसे, क्या आयेगा और कहाँ तैनात होगा, यह छिपाया जाता है टीवी पर चमकाया नहीं जाता। उन्होंने कहा “मिलिटरी और पुलिस में बुनियादी फ़र्क़ है सेना के सीक्रेट आम करना खुला देशद्रोह है”!

देश में क़रीब 1700 लड़ाकू विमान हैं। ज़्यादातर आयातित। फ़्रांस से  हम पहले ही मिराज ख़रीदे हैं जो अपने समय के आज के रफाल की तरह बड़े उन्नत विमान थे। रूसी विमानों की बहुलता भी है। सुखोई जब ख़रीदे गए थे तब वे सर्वश्रेष्ठ थे, अभी भी प्रलयंकारी हैं। पर देश में पहली बार एक संदिग्ध क़िस्म की अति मंहगी रफाल नाम के पाँच विमानों की ख़रीद पर मीडिया ने जो ड्रामा खड़ा किया गया है वह अकल्पनीय है।

ये विमान फ़्रांस ने बनाये हैं, उसके पास तो पहले से ही हैं तो इससे घबराकर क्या अफ़्रीका के किसी गरीब से गरीब देश ने खुद को फ़्रांस के हवाले कर दिया? या किसी युरोपीय देश ने फ़्रांस के आगे हथियार डाल दिये हों या दुनियाँ में कोई थर थर काँपने लगा हो? पर हमारे चैनलों के समाचारों के शीर्षकों की ध्वनि यही है और इस पर करतलध्वनि करने वाले मूर्खो का समुदाय बहुत विकराल है।

पता नही हम किस तरह के अनवरत मार्केटिंग कैम्पेन में डाल दिये गये कीड़े मकोड़े बन गये हैं? इस समय जो कुछ किया धरा जा रहा है उसकी क़ीमत सेना को बहुत मंहगी पड़ेगी। एयर फोर्स को अपने एसेट्स की तैनाती वहाँ से बदलनी पड़ेगी जहां टीवी चैनलों ने उसे सारी दुनिया को दिखला दिया है। इस काम की एक क़ीमत होती है जो बेवजह सिर्फ़ शो बाज़ी के चलते चुकानी पड़ेगी।

पहले सुनते थे कि फलां शहर में सेना के खूफिया कागजातों के साथ दुश्मन देश का एजेंट पकड़ा गया है। पर अब तो दुश्मन को हमारी व्यूह रचना की पल पल की सारी जानकारी बिना एक रुपया ख़र्च किये टीवी चैनलों पर मिल रही है। सारी दुनिया के सैन्य विशेषज्ञ यह तमाशा देखकर हतप्रभ हैं।
 

अभय सत्य है के एफबी वाल से साभार...



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