भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूबा खाद्य विपणन महकमा 
| - Rainbow News Network - Aug 3 2020 3:43PM

अम्बेडकरनगर। सरकारी राशन की खरीद कर उसे वितरण के लिए प्रदेश के मार्केटिंग विभाग को दिया जाता है| खरीद करने और भण्डारण करने की जिम्मेदारी फ़ूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया और स्टेट वेयर हाउस की होती है| जहाँ से जिलों में जरुरत के हिसाब से डिमांड के सापेक्ष ये राशन जिलों में मार्केटिंग विभाग (प्रदेश खाद्य आपूर्ति एवं विपणन विभाग) मंगाता है और अपने गोदामों में रखता है|

इन्ही गोदामों से ये राशन सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान (जिन्हें सामान्य भाषा में कोटेदार की दुकान कहते है), मिड डे मील आदि के लिए वितरित किया जाता है| मार्केटिंग विभाग के गोदाम में राशन सीधे नहीं खरीदा जाता है| खरीद फ़ूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया आदि एजेंसियां करती है और इन्हें पूर्ती करती हैं| इस पूरे प्रकरण में तीन प्रकार के बाहय खर्चे होते है|

पहला खर्चा राशन की कीमत का जो किसानो, धान मिल और चीनी तेल कम्पनियों आदि को भुगतान किया जाता है| दूसरा इस राशन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने का तहत तीसरा इनके भण्डारण का| राशन माफिया यानि “गरीबो के राशन चोरो” की नजर इन तीनो खर्चो पर होती है और इसमें भागीदारी इस पूरे तंत्र को चलाने वाले नौकरों की भी होती है। जो जनता के टैक्स से वेतन पाने वाले होते हैं।

खरीद का माल पहले फ़ूड कारपोरेशन या प्रदेश भण्डारण निगम की गोदाम में जाना चाहिए वहां से जिलों की मार्केटिंग गोदामों में| मगर पहला घपला यही शुरू होता है ये माल असल में व्यापारी/धान मिल स्वामी अपने कारखाने से सीधे इन मार्केटिंग गोदामों में ले जाता है और कागजो में फ़ूड कारपोरेशन या प्रदेश भण्डारण निगम के गोदामों को भेजने के कागज घोटाले की पहली कड़ी में तैयार करता है|

इस कड़ी में ट्रांसपोर्ट का ठेकेदार खाद्यान की ढुलाई का फर्जीवाड़ा करता है और फ़ूड कारपोरेशन के अधिकारी इस फर्जीवाड़े की काली आय में मुंह काला करते हैं| इसी प्रकार का घपला अम्बेडकरनगर जनपद में लंबे पैमाने पर हुआ इसकी उच्चस्तरीय जांच की जाए तो कई अधिकारियों के काले कारनामे उजागर हो सकते हैं।



Browse By Tags



Other News