जिला कृषि अधिकारी पर खाद-बीज की दुकानों से मनमाना वसूली का आरोप
| - Rainbow News Network - Aug 5 2020 4:23PM

कार्यालय का पुराना व चर्चित बाबू इनका प्रतिनिधि बनकर करता है वसूली

किसानों के लिए गठित कृषि विभाग और इसमें तैनात जिम्मेदार/उच्च ओहदेदार जब किसानों से सीधे मुँह बात न करें तब इससे बड़ी विडम्बना और क्या हो सकती है। कुछ इसी तरह के आरोप जिला कृषि अधिकारी पद पर तैनात डॉ धर्मराज सिंह पर लग रहे हैं। डॉ. सिंह पिछले एक लम्बे अर्से से जिला कृषि अधिकारी के पद पर उत्तर प्रदेश के जिला अम्बेडकरनगर में तैनात हैं। लोगों ने इन्हें अंगद का पाँव कहना शुरू कर दिया है। इनके बारे में यह कहा जाता है कि ये बड़े ही अक्खड़ स्वभाव के कृषि अधिकारी हैं। अपने स्वभाव के चलते ये जिले के किसानों को कमतर आंकते हैं। सत्तापक्षीय पहुँच की वजह से इनके क्रिया-कलापों की अनदेखी की जाती रही है। स्वजातीय माननीयों और मीडिया कर्मियों से मैत्रीभाव होने की वजह से डॉ. धर्मराज सिंह मनमाने ढंग से जैसा चाहते हैं वैसा करते हैं। खास बात यह है कि इनके विभागीय कार्यालय में काम करने वाले अधीनस्थ इनकी हुकुम उदूली करने से भी भय खाता है। 

अम्बेडकरनगर। जनपद में लंबे समय से तैनात जिला कृषि अधिकारी के ऊपर विभागीय उत्तरदायित्वो के निर्वहन में शिथिलता समेत अन्य कई गम्भीर आरोपो से घिरे धर्मराज सिंह पर कार्यवाई न होना योगी सरकार की कार्यप्रणाली पर ही गम्भीर सवाल खड़ा कर रहा है।  जिला कृषि अधिकारी द्वारा लाइसेंस के नवीनीकरण और बनवाने के नाम पर अवैध वसूली की जाती है यह बात दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।

जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में तैनात लिपिक चंद्रकेश द्वारा खाद व बीज की दुकानों से वसूली करते हैं। उनकी मांगे पूरी न करने वाले दुकानदारों के खिलाफ नोटिस देकर उन्हें विभिन्न तरीके से परेशान किया जाता है। कृषि विभाग जिले भर में खाद व बीज की दुकान शुरू करने के लिए लाइसेंस देता है। लाइसेंस का नवीनीकरण व दुकानों की जांच की जिम्मेदारी जिला कृषि अधिकारी धर्मराज सिंह की है।

दुकानदारों का आरोप है कि दुकानों के नवीनीकरण व लाइसेंस आदि को लेकर कृषि अधिकारी के संरक्षण में अवैध वसूली की जाती है। लिपिक चंद्रकेश का स्थानांतरण फैजाबाद के लिए  हुआ था परंतु फिर दोबारा इस जिले में अपनी तैनाती करा ली गई। जिला कृषि अधिकारी को मैनेज करने के लिए ऑफिस में तैनात बाबुओं की अहम भूमिका होती है।

लाइसेंस नवीनीकरण और बनवाने के लिए अगर दुकानदार ने सुविधा शुल्क देने से इंकार किया तो कृषि अधिकारी ने छापामार कर दुकान को सीज कर दिया जाता है।सवाल यह है कि क्या जिले के साथ ही प्रदेश स्तर पर भी  कृषि विभाग भ्रष्टाचार की चादर ओढ़े बैठा है। क्या वँहा भी भ्रष्टाचार की जड़े इतनी गहरी हो चुकी है जिसमे ऐसे अधिकारी पुष्पित व पल्लवित हो रहे है। फिलहाल देखना यह है कि योगी सरकार की नजर कब इस भ्रष्टाचारी अधिकारी के ऊपर पड़ती है और कार्यवाई होती है।

Report- ज्ञान प्रकाश पाठक, ब्यूरो चीफ भिनगा टाइम्स, अम्बेडकरनगर



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