चित भी मेरी और पट भी मेरी...
| -RN. Feature Desk - Aug 13 2020 1:31PM

-डॉ० शिबन कृष्ण रैणा

कश्मीर के आईएएस अधिकारी शाह फैसल तब सुर्खियों में आये थे जब कुछ वर्ष पूर्व वे सरकारी सेवा को त्याग राजनीति में उतरे थे और अपनी एक नई पार्टी 'जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट' का गठन किया था।

इधर, राज्य में हुए राजनीतिक बदलाव के चलते उनकी राजनीतिक महत्वांक्षाएँ ध्वस्त हो गईं और आशाओं पर पानी फिर गया।अब सुना है कि वे वापस नौकरी में आना चाहते हैं। राजनीति में उतरने वाले सरकारी कर्मचारी को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए था।

सरकारी कर्मचारी के लिए कोड ऑफ कन्डक्ट यही कहता है। अगर बर्खास्त नहीं किया है तो सरकार अब करे। अच्छी मिसाल क़ायम होगी और दूसरों के लिए भी नसीहत होगी। यह तो वही बात हुई 'चित भी मेरी और पट भी मेरी'। या फिर 'दोनों हाथों में लड्डू रखना।'

कोई रियायत नहीं शाहजी को। सीधा बाहर का रास्ता दिखाया जाय। असामाजिक, अवज्ञाकारी अथवा खुराफाती तत्वों से सख्ती से पेश न आने की वजह से और उनके प्रति उदारता बरतने से ही कश्मीर में हालात बिगड़ते रहे हैं।



Browse By Tags



Other News