कब सुधरेगी कांग्रेस पार्टी
| -RN. Feature Desk - Aug 31 2020 12:13PM

-रमेश सर्राफ धमोरा

कांग्रेस कार्यसमिति की बहुप्रतीक्षित बैठक संपन्न हो चुकी है। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को आगे भी अध्यक्ष पद पर काम करते रहने का प्रस्ताव पारित किया जा चुका हैं। कांग्रेस कार्यसमिति पार्टी में सर्वोच्च नीति निर्धारण समिति मानी जाती है। इस समिति में लिया गया निर्णय अंतिम होता है। अब सोनिया गांधी आगे भी कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्य करती रहेगी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कांग्रेस कार्यसमिति की अध्यक्ष व उनके साथ पार्टी के 21 अन्य वरिष्ठ नेता सदस्य हैं।

कांग्रेस कार्यसमिति सदस्यों में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी व पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पार्टी के लोकसभा में नेता अधीर रंजन चैधरी, पार्टी कोषाध्यक्ष अहमद पटेल, पार्टी महासचिव व राज्यसभा में पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद, उप नेता आनंद शर्मा, पार्टी के महासचिव (प्रशासन) मोतीलाल वोरा, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री एके एंटोनी, पार्टी महासचिव अंबिका सोनी, आसाम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी महासचिव ओमान चांडी, पार्टी महासचिव मलिकार्जुन खड़गे, गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी महासचिव लुईजिन्हो फलेरो, पार्टी महासचिव व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, पार्टी महासचिव मुकुल वासनिक, पार्टी के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल, छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, राजस्थान के पूर्व मंत्री रघुवीर मीणा एवं मणिपुर के पूर्व उपमुख्यमंत्री गईखंगम गंगमेई सदस्य के तौर पर शामिल है। इसके अलावा कार्यसमिति में 15 स्थाई आमंत्रित व 11 विशेष आमंत्रित सदस्य भी शामिल है।

कांग्रेस कार्यसमिति में शामिल सोनिया गांधी, राहुल गांधी व अधीर रंजन चौधरी ही लोकसभा के सदस्य हैं। मनमोहन सिंह, अहमद पटेल, एके एंटोनी, अंबिका सोनी, आनंद शर्मा, गुलाम नबी आजाद, केसी वेणुगोपाल, मलिकार्जुन खड़गे राज्यसभा के सदस्य हैं। कांग्रेस कार्यसमिति में शामिल मनमोहन सिंह, मोतीलाल वोरा, तरुण गोगोई, एके एंटोनी 80 साल से अधिक की उम्र पार कर चुके हैं। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, अहमद पटेल, अंबिका सोनी, गुलाम नबी आजाद, हरीश रावत, मलिकार्जुन खड़गे, ओमन चांडी, ताम्रध्वज साहू, गईखंगम गंगमेई 70 साल से अधिक की उम्र के हैं। आनंद शर्मा 67 वर्ष, लुईजिन्हो फलेरो 69 साल के हो चुके हैं। अधीर रंजन चैधरी 64 वर्ष, मुकुल वासनिक 61 वर्ष, रघुवीर मीणा 61 वर्ष के हैं। राहुल गांधी 50 वर्ष, अजय माकन 56 वर्ष, केसी वेणुगोपाल 57 वर्ष व प्रियंका गांधी 48 वर्ष की उम्र की कार्यसमिति सदस्य हैं।

इस तरह देखा जाए तो कांग्रेस के कार्यसमिति के ज्यादातर सदस्यो की उम्र अधिक होने के कारण वे ज्यादा भागदौड़, मेहनत नहीं कर पाते हैं। कांग्रेस कार्यसमिति में जमीनी आधार वाले नेता भी नहीं है। सोनिया गांधी राहुल गांधी व अधीर रंजन चैधरी ही लोकसभा सदस्य है। कांग्रेस कार्यसमिति में शामिल कई नेताओं का तो राज्यसभा में लगातार चैथा, पांचवा, छठा कार्यकाल चल रहा है। कांग्रेस कार्यसमिति में शामिल पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, अंबिका सोनी, आनंद शर्मा तो कभी लोकसभा चुनाव जीत ही नही सकें। ये हर बार राज्यसभा के रास्ते ही संसद में आते रहे हैं। कांग्रेस के सबसे शक्तिशाली कोषाध्यक्ष अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद, मोतीलाल वोरा, मुकुल वासनिक, एके एंटोनी को भी चुनाव लड़े जमाना बीत गया है।

हाल ही में कांग्रेस के महासचिव बनाए गए अजय माकन नई दिल्ली से पिछले दो लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। अजय माकन के दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते चुनावों में कांग्रेस जीरो पर आउट हो गयी थी। इस बार उन्हें पार्टी ने विधानसभा का चुनाव लड़ने को कहा था। मगर बीमारी का बहाना कर वह चुनाव लड़ने से कन्नी काट गए थे। यही हाल मुकुल वासनिक का भी है। 2014 में लोकसभा का चुनाव भारी मतों से हार गए थे। 2019 में तो उन्होंने हार के डर से चुनाव ही नहीं लड़ा था। महाराष्ट्र में उनकी परम्परागत रामटेक सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी किशोर उत्तमराव गजभैया शिवसेना के कृपाल तुम्हाने से चुनाव हार गये थे।

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणु गोपाल ने भी केरल की अपनी परंपरागत अलाप्पुझा लोकसभा सीट से इस बार चुनाव नहीं लड़ा। उनके स्थान पर कांग्रेस की टिकट पर लड़ने वाले कांग्रेस प्रत्याशी सनीमोल उस्मान माकपा के एएम आरिफ से चुनाव हार गये थे। केसी वेणुगोपाल राजस्थान से राज्यसभा सदस्य बन चुके हैं। कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य रघुवीर मीणा भी राजस्थान के उदयपुर सीट से लगातार दो बार लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। उन्हें राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से निकटता के चलते कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य बनाया गया था।

कांग्रेस महासचिव व कार्यसमिति सदस्य हरीश रावत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहते खुद दो सीटो पर विधानसभा चुनाव लड़कर हार गए थे। अब प्रदेश में उनका भी जनाधार कमजोर हो गया है। इसी के चलते उनको प्रदेश की राजनीति से दूर कर दिया गया है। मोतीलाल वोरा 93 साल की उम्र में भी महासचिव बने हुए हैं। एक जमाने में बोरा मुख्यमंत्री, राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं। लेकिन चुनाव लड़े उन्हें भी जमाना बीत चुका है। कांग्रेस महासचिव मलिकार्जुन खड़गे 2014 से 2019 तक लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता रह चुके हैं। मगर वो पिछला लोकसभा चुनाव हार गए थे। पिछले महीने उनको कर्नाटक से राज्यसभा में लाया गया है। गांधी परिवार से निकटता के चलते उनको गुलाम नबी आजाद के स्थान पर राज्यसभा में पार्टी का नेता बनाया जा सकता है। प्रियंका गांधी के उत्तर प्रदेश की प्रभारी महासचिव रहते लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को अपने परंपरागत अमेठी सीट से हार का मुंह देखना पड़ा था।

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से पूर्व ही पार्टी के 23 बड़े नेताओं ने पार्टी का स्थाई अध्यक्ष बनाने की मांग को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा था। जिसको लेकर कांग्रेस पार्टी में आंतरिक गुटबाजी चरम पर है। पत्र लिखने वालों में कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, मुकुल वासनिक शामिल है। इस पत्र पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा, पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री राजेंद्र कौर भट्ठल, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एम वीरप्पा मोइली, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान, लोकसभा सदस्य मनीष तिवारी, शशि थरूर, राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल, विवेक तन्खा, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर, अरविंदर सिंह लवली, कौल सिंह ठाकुर, मिलिंद देवड़ा, पूर्व केन्द्रीय मंत्री रेणुका चौधरी, जितिन प्रसाद, पीजे कुरियन, हरियाणा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष योगानंद शास्त्री, पूर्व सांसद संदीप दीक्षित, अजय सिंह, अखिलेश प्रताप सिंह के भी हस्ताक्षर है।

कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र की बहाली को लेकर पत्र लिखने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी नाराजगी व्यक्त कर चुके है। कांग्रेस के बड़े नेता इन 23 नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं। वही गुलाम नबी आजाद अपनी बात पर डटे हुए हैं तथा बार-बार कह रहे हैं कि हमारा उद्देश्य पार्टी को मजबूत करना है। हम चाहते हैं कि पार्टी में बड़े पदों के लिए सीधे चुनाव हो तथा चुने हुए लोग ही संगठन के पदाधिकारी बने। इससे पार्टी और अधिक मजबूत होगी।

कांग्रेस के  वरिष्ठ नेताओं द्वारा लिखे गए पत्र के बहाने कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अब जनाधार वाले युवा नेताओं को संगठन में जिम्मेदारी सौंपनी चाहिये। वर्षों से संगठन में महत्वपूर्ण पदों पर काबिज राज्यसभा के रास्ते सांसद बनने वाले नेताओं को बड़ी जिम्मेदारियों से मुक्त करना चाहिये। ताकि आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी मजबूत होकर उभर सके। यदि आने वाले समय में कांग्रेस पार्टी के संगठन में आमूलचूल परिवर्तन नहीं किया जाता है तो कांग्रेस पार्टी के लिए अपना मौजूदा जनाधार भी बरकरार रख पाना मुश्किल होगा।



Browse By Tags



Other News