कोरोना से ठीक होने के बाद जरूर करें आराम, वरना हो सकते है अन्य बीमारियों से परेशान
| Agency - Sep 3 2020 4:27PM

भारत में कोरोना संक्रमण काफी तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटों में 82000 से ज्यादा मामले सामने आए है। एक अच्छी बात यह है कि देश में कोरोना वायरस से ठीक होने वाले लोगों के आंकड़े 75% के आसपास है। लेकिन फिर भी लोगों के मन में भविष्य को लेकर चिंता है। दरअसल मामला यह है कि लोग यह सोच रहे है कि कोरोना से ठीक होने के बाद कहीं और दूसरी दिक्कत तो उन्हें नहीं होगी? कहने का मतलब यह भी है कि अगर कोई मरीज कोरोना से ठीक होता है तो आगे चलकर उसके फेफड़े में या किडनी में कोई और बीमारी तो नहीं होगी? इसको लेकर लोगों के मन में तरह-तरह की शंकाएं है। जो लोग इस संक्रमण से ठीक हो रहे है उन्हें भविष्य में किसी गंभीर बीमारी का खतरा होने का अंदेशा है। इसको लेकर डॉक्टर की भी अलग-अलग राय है।

कुछ डॉक्टर्स को यह लगता है कि हां भविष्य में कुछ समस्याएं आ सकती है जबकि कुछ डॉक्टर का यह मानना है कि अगर शरीर की यूम्निटी सही रही तो किसी बड़े बीमारी का खतरा नहीं है। हालांकि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि कोरोनावायरस होने के बाद हृदय संबंधी समस्याओं में वृद्धि देखी जा सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के बाद हृदय और फेफड़ों में सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। अगर इसका इलाज समय पर नहीं किया गया तो यह जानलेवा भी हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार ठीक होने के बाद भी मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है। ऐसे में उन्हें समय पर इलाज करा लेना चाहिए। इतना ही नहीं, फेफड़ों में भी इसका असर देखने को मिलता है। सबसे बड़ी बात यह है कि कई मरीजों में इसका असर हमेशा के लिए रह जाता है।

डॉक्टर का यह भी कहना है कि कोरोना संक्रमित मरीज कुछ दिन में ठीक हो जाते है तो इसका मतलब यह साफ है कि अब वायरस नहीं है। लेकिन यह वायरस शरीर के अंदर कितना नुकसान कर गया है इसका पता हमें बाद में ही चल पाता है। मरीज तो निगेटिव हो जाता है पर उसकी वजह से शरीर को हुए नुकसान को ठीक होने में समय लगता है। कोरोनावायरस सबसे ज्यादा असर ह्रदय, फेफड़ा और किडनी को पहुंचाता है। अगर कोई सामान्य में से ज्यादा सांस ले रहा है इसका साफ मतलब होना चाहिए कि उसे अब सांस लेने में दिक्कत हो रही है और इसका कारण कोरोनावायरस ही होगा। सांस ज्यादा लेने के कारण फेफड़े और हृदय पर असर पड़ता है। यही कारण है कि कोरोनावायरस से ठीक हुए मरीजों को ज्यादातर फेफड़े की निमोनिया से ग्रसित होना पड़ रहा है।

पर ऐसा नहीं है कि इससे बचा नहीं जा सकता है। कुछ डॉक्टर्स का कहना है कि जिस तरह कोरोना संक्रमण के दौरान मरीज आराम करता है, ठीक वैसा ही कोरोना से ठीक होने के बाद मरीज को कम से कम 14 दिनों तक आराम की जरूरत होती है। ऐसा इसलिए करना चाहिए क्योंकि इस वायरस का असर मरीज के अन्य अंगों पर भी हो जाता है। कुछ डॉक्टर्स का मानना है कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी मरीज का खून चेक किया जाना चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि मरीज के अन्य अंगों पर कोरोना का कितना असर हुआ है ताकि उसका बेहतर तरीके से इलाज किया जा सके। कुल मिलाकर हम यह कह सकते है कि कोरोनावायरस से ठीक होने के बाद भी हमें सख्त आराम की जरूरत होती है।



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