जब मुंबई में खत्म हो गए थे अनुराग कश्यप के पैसे
| Agency - Sep 10 2020 3:33PM

सड़क किनारे सोकर बिताई थीं कई रातें

बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर अनुराग कश्यप लीक से हटकर फिल्में बनाने के लिए मशहूर हैं। उनकी फिल्में देखने वाले दर्शकों का एक अलग ही वर्ग है। अनुराग को फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। मुंबई पहुंचने के बाद जब पैसे खत्म हो गए थे तब उन्हें सड़कों पर रातें गुजारनी पड़ी थी। अनुराग का जन्म 10 सितंबर, 1972 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुआ था। आज वह अपना 48वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं।

इस खास मौके पर अनुराग से जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में जानते हैं। पिता की नौकरी की वजह से अनुराग का बचपन कई शहरों में बीता। उनकी शुरुआती पढ़ाई देहरादून के ग्रीन स्कूल और ग्वालियर के सिंधिया स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली के हंसराज कॉलेज में एडमिशन लिया। इस दौरान वह थिएटर ग्रुप 'जन नाट्य मंच' से जुड़े और स्ट्रीट प्ले करने लगे। अनुराग ने 1993 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई खत्म करने के बाद मुंबई जाने का फैसला किया। जेब में पांच हजार रुपये लेकर वह मुंबई पहुंच गए।

शुरुआत में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। धीरे-धीरे पैसे खत्म होने लगे तो उन्हें सड़कों पर भी सोना पड़ा। बताया जाता है कि 1998 में मनोज बाजपेयी ने बतौर लेखक के लिए अनुराग कश्यप का नाम राम गोपाल वर्मा को सुझाया था। दरअसल, राम गोपाल वर्मा ने अनुराग का काम देखा था जो उन्हें बहुत पसंद आया। इस तरह अनुराग को फिल्म सत्या के लिए सौरभ शुक्ला के साथ मिलकर कहानी लिखने का मौका मिला।

बता दें कि अनुराग ने पहली फिल्म पांच बनाई थी जो विवादों के चलते रिलीज नहीं हो पाई। उन्हें बड़ी पहचान साल 2012 में फिल्म गैंग ऑफ वासेपुर से मिली। इस फिल्म को उन्होंने दो पार्ट में बनाया था। यह फिल्म उनके करियर के टर्निंग पॉइंट साबित हुई थी। फिल्म के दूसरे में पार्ट में नवाजुद्दीन सिद्दीकी लीड रोल में थे। इस फिल्म के बाद वह रातोंरात स्टार बन गए।
 



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