खाद्य सुरक्षा विभाग की फ्लोर (आटा) मिलो पर क्यों नहीं पड़ रही नजर?
| - Rainbow News Network - Sep 19 2020 1:36PM

रिपोर्ट- ज्ञान प्रकाश पाठक

अम्बेडकरनगर। नगर में खाद्य पदार्थो में मिलावट का धंधा जोरों पर है।आटा  और बेसन में बड़े स्तर पर मिलावट कर लोगों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। सुरक्षित खानपान को लेकर बेहद चौकन्ना रहने की जरूरत है। वजह खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। बाजार से खरीदारी और इसे प्रयोग करने से पहले परखना आवश्यक है।

विभाग की ओर से संदेह के आधार पर संकलित किए गए 98 फीसद नमूनों की प्रयोगशाला जांच कराने पर मिलावट मिली है। इसे मानव जीवन के लिए खतरा माना गया है। आरोपितों पर मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही अर्थदंड का चाबुक भी चल रहा है। बाजारों में मिलावटी, अधोमानक और असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री होने की गवाही खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के आंकड़े देने को काफी हैं।

अगस्त 2011 से लागू नये नियम के अनुसार जांच में अधोमानक पाये जाने पर जुर्माना का प्रावधान किया गया है। इसका मुकदमा अपर जिलाधिकारी की अदालत में चलेगा। दूसरा खाद्य वस्तु में हानिकारक मिलावट पाये जाने पर तीन वर्ष की सजा हो सकती है। ऐसे मामलों का मुकदमा एसीजेएम प्रथम की अदालत में दायर होगा।

तीसरे नमूने में मानव जीवन को खतरा पैदा करने वाली वस्तु की मिलावट पाये जाने पर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान किया गया है।  जबकि आटा मिलो द्वारा गेहूं के अलावा अन्य अनाजों की पिसाई कर उसमें मिश्रित कर बाजार में धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। इसके पश्चात भी खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा जनपद में चल रही आटाफ्लोर मिलो की जांच नहीं की जा रही है।



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