कोरोना की छाया में विश्व शांति की तलाश
| -RN. Feature Desk - Sep 21 2020 1:34PM

-डा. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

        इस साल सोमवार 21 सितंबर को दुनिया के देश कोरोना की छाया में अंतरराष्ट्रीय वैश्विक शांति दिवस मना रहे हैं। वैश्विक शांति के सामने अब हिंसा प्रदर्शन के साथ ही कोरोना महामारी से नई परिस्थितियां आ गई है। कोरोना के कारण दुनिया के देशों के हालात विकट है तो इसके कारण जनजीवन थम जाने से स्थितियां और भी मुश्किल भरी हो गई है। कोरोना महामारी केवल और केवल मौत का तांडव लेकर ही नहीं आई है अपितु सब कुछ बदल कर रख दिया हैं। कोरोना के कारण आर्थिक संकट का दौर आ गया है, उद्योग धंधें बंद हुए तो नागरिकों के रोजगार छिने है तो वेतन-भत्तों में कटौती तो आम है। इससे दुनिया के देशों की सरकारों को एक साथ कई मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ रहा है।

          स्थितियां यह लगने लगी है कि कोरोना के कम्यूनिटी संक्रमण की संभावनाओं के बावजूद सरकारों की कुछ समय के लिए सब कुछ बंद करने की हिम्मत नहीं हो पा रही है। यह भी साफ हो गया है कि 2020 तो पूरी तरह से कोरोना को भेंट चढ़ गया हैं वहीं 2021 में भी हालात सामान्य हो जाएंगे यह आज की तारीख में कहना मुश्किल भरा है। अन्य कारणों को अलग भी कर दिया जाए तो दुनिया के देशों में अशांति का बड़ा कारण यह कोरोना और उसका दुष्प्रभाव होने वाला है। यह अपने आप में गंभीर चेतावनी और चुनौती है दुनिया के देशों के सामने। हांलाकि कोरोना की छाया में ही अमेरिका में आम चुनाव होने जा रहे हैं और मास्क का उपयोग होना या नहीं होना व कोरोना से निपटने के प्रयास अमेरिका की दोनों ही पार्टियों के चुनाव प्रचार का मुख्य मुद्दा बनता जा रहा है।

        विश्व शांति पहली आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यूएनओं ने दिवस के रुप में मनाने का निर्णय किया। अतंरराष्ट्रीय वैश्विक दिवस का आगाज 1982 से हुआ है और पहले सितंबर माह के तीसरे सप्ताह के मंगलवार को इसका आयोजन किया जाता रहा है। 2001 से तीसरे मंगलवार के स्थान पर अब 21 सितंबर को अंतरराष्ट्रृीय वैश्विक शांति दिवस का आयोजन किया जाने लगा है। अंतरराष्ट्रीय संघ के मुख्यालय में इस दिन शांति की प्रतीक घंटी बजाई जाती है तो सफेद कबूतर उड़ाकर शांति का संदेश दिया जाता है। इस साल की थीम का संदेश साफ है कि विश्व शांति के लिए समन्वित प्रयास किए जाए। दुनिया के देशों में शांति व्यवस्था को लेकर रेंकिंग भी की जाती है और इस रेंकिंग में जहां आइसलैण्ड शीर्ष पर है तो न्यूजीलैण्ड, पुर्तगाल, आस्ट्र्यिा और डेनमार्क पहले पांच देशों में शामिल है। भारत 139 वें नंबर पर है तो अमेरिका की स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं मानी जा सकती। अमेरिका 121वें स्थान पर है।

       दुनिया के 163 देशों में अफगानिस्तान सबसे अंशात देश माना गया है। रेंकिंग के अनुसार 81 देशों में कुछ सुधार है तो 80 देशों की रंेकिंग मंे गिरावट देखी गई है। विचारणीय यह है कि अशांति के चलते बहुत कुछ गवाना पड़ता है। जो पैसा और समय विकास कार्यों व अन्य रचनात्मक गतिविधियों में लगना चाहिए वह समय और पैसा अशांति को नियंत्रण में करने में लग जाता है। आज आए दिन अमेरिका में कहीं ना कहीं यकायक चाकूबाजी या गोलीबारी के समाचार आने लगते हैं तो फ्रांस भी समस्या से जुझता रहा है। घरों में हथियारों का जखिरा एकत्रित हो रहा है तो हिंसात्मक हथियार चाकू, रिवाल्वर आदि आम होते जा रहे हैं। आंतकवादी गतिविधियां हो रही है वह अलग तो सरकारों के खिलाफ प्रदर्शन और उनका भी हिंसात्मक रुप लेना गंभीर चिंता का विषय है।

       अमेरिका में अश्वेत नागरिक की पुलिस कार्यवाही के कारण मौत के बाद जिस तरह से उग्र प्रदर्शन हुए या फ्रांस में हिंसात्मक गतिविधियां देखने को मिली या आए दिन दुनिया के दूसरे देशों में हिंसात्मक गतिविधियां हो रही है, यह अपने आप में चिंता का विषय है। हमारे देश में ही जिस तरह की घटनाएं दिल्ली में हुई और जिस तरह से कोरोना के बावजूद प्रदर्शन हो रहे हैं वह चिंता का बड़ा कारण है। इन प्रदर्शनों के हिंसात्मक रुप लेते ही जिस तरह से सार्वजनिक व निजी संपत्ती का विनाश होता है और जिस तरह से पूरी मशीनरी को शांति के लिए जुटना पड़ता है वह विकास में बाधक ही बनती है।

        कोरोना के साइड इफेक्ट में जिस तरह से बेरोजगारी बड़ी है, आय के साधन सीमित हुए हैं, लोगों में निराशा और कुंठा फैली है] उद्योग धंधें प्रभावित हुए हैं, यह अशांति का बड़ा संकेत है। इन हालातों से निपटने के लिए अभी से सरकारों को लोगों को मानसिक रुप से तैयार करना होगा। लोगों की मानसिकता बदलनी होगी। यह नहीं भूलना चाहिए कि कोरोना के साइड इफेक्ट के रुप में यह बड़ा नकारात्मक प्रभाव आने वाला है जिससे निपटने की तैयारी दुनिया के देशों को अभी से करनी होगी। लोगों में सकारात्मकता बढ़ाने के साथ ही आशा का संचार करना होगा तभी जाकर दुनिया के देशों में शांति कायम हो सकेगी।



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