पीलीभीत में बने फिल्म सिटी, 1 रुपये 111 पैसे में माली बनने को तैयार
| Agency - Sep 22 2020 1:38PM

लखनऊ। योगी सरकार के फिल्म सिटी के निर्माण के घोषणा पर ऐक्टर राजपाल यादव ने भी खुशी जताई है। इसी के साथ राजपाल यादव ने पीलीभीत में फिल्म सिटी बनाने की अपील की है। राजपाल यादव ने अपने फेसबुक पेज में गोमती नदी के किनारे पीलीभीत के तराई वाले इलाके की तुलना जल जंगल, जमीन, पर्यावरण और पर्यटन से करते हुए 36 हजार एकड़ जमीन रंगऔरा यूनिवर्स बनाने की इच्छा जाहिर की। राजपाल यादव ने फेसबुक पर विडियो शेयर करते हुए बताया कि इस जमीन पर 11,000 एकड़ में खेल सिनेमा और 25,000 एकड़ में बच्चों और बुजुर्गों के लिए रंगारंग सफारी बनाने के लिए वह सरकार से अपील करते हैं। यही नहीं राजपाल यादव ने कहा कि वह इस फिल्म सिटी का माली बनने के लिए भी तैयार हैं।

राजपाल बोले- ऐसी जगह बने फिल्म सिटी

अभिनेता ने कहा कि बचपन से ही उनका पीलीभीत से जुड़ाव रहा है। उत्तर प्रदेश उनकी जन्मभूमि है। राजपाल यादव ने कहा, 'आज 36 साल हो गए हैं मुझे अभिनय कला में। कुछ ऐसा सपना था कि उत्तर प्रदेश में ऐसा संसार बनाया जाए तो कला का संसार हो। इसी के लिए मैं एक मशविरा देना चाहता हूं।' उन्होंने कहा, 'फिल्म सिटी वहां होनी चाहिए, जहां जल जंगल जमीन पर्यावरण, पर्यटन सबका संगम हो, वहां कला निवास करती है, जहां शांति निवास करती है, जहां प्रदूषण रहित वातावरण हो।'

'एक रुपये में फिल्म सिटी का माली बनने को तैयार'

राजपाल यादव ने कहा कि उत्तराखंड के बनबसा से लेकर पीलीभीत के माधोटांडा, गोमती तट और लखीमपुर खीरी ही नहीं बल्कि नेपाल बॉर्डर तक जल, जंगल, जमीन और पक्षियों का अद्भुत मिश्रण है। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार चाहे तो मैं एक रुपया 111 पैसा लेकर इस फिल्म सिटी का माली बनने को तैयार हूं। उन्होंने कहा कि यहां स्वर्ग नहीं है लेकिन स्वर्ग से कम भी नहीं है।'

'फिल्म सिटी के लिए सबसे ज्यादा संभावना यूपी में'

बता दें कि सीएम योगी ने यूपी में देश की सबसे खूबसूरत और हाईटेक फिल्म इंडस्ट्री बनाने का घोषणा की है। साथ ही उन्होंने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे पर जमीन तलाशने के निर्देश दिए हैं। यूपी में फिल्म शूट कर चुके डायरेक्टर, प्रॉड्यूसर व फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि मुंबई के अलावा अगर फिल्म इंडस्ट्री के लिए कहीं सबसे ज्यादा संभावना है तो वह केवल यूपी ही है।

'फ्रेंडली शूटिंग माहौल जरूरी'

वोदका डायरी के डायरेक्टर और मध्यप्रदेश में बन रही फिल्म सिटी के पैनलिस्ट कुशल श्रीवास्तव बताते हैं कि फिल्म सिटी बनाने से पहले शूटिंग फ्रेंडली माहौल बनाना होगा। इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू हो। सरकार एक असोसिएशन बनाए और उसकी निगरानी में लोकल लाइन प्रॉड्यूसर, कास्टिंग डायरेक्टर, प्रॉडक्शन टीम का रजिस्ट्रेशन हो। तकनीकी रूप से लोगों को मदद मिले। अभी मुंबई में ज्यादातर टेक्निशन नार्थ के हैं। फिल्म सिटी बनाने के साथ हमको तकनीकी रूप से सशक्त होने की जरूरत होगी।

'प्रॉडक्शन यूनिट का निर्माण हो'

कई इंटरनैशनल फिल्म फेस्टिवल में अपने यूनीक फिल्मी सब्जेक्ट से अलग पहचान बनाने वाले गोंडा के प्रॉड्यूसर व डायरेक्टर ध्रुव हर्ष कहते हैं कि हमारे यहां का टैलंट मुंबई के साथ अन्य प्रदेशों में रोजगार के लिए भटक रहा है। यहां फिल्म सिटी के साथ प्रॉडक्शन यूनिट का निर्माण हो। इसमें साउंड, कैमरा, लाइट की व्यवस्था हो। अभी शूटिंग के लिए सब चीजें मुंबई से मंगवानी पड़ती हैं। अगर यहां प्रॉडक्शन यूनिट बनेगी तो यही पर शूटिंग और पोस्ट प्रॉडक्शन दोनों होगा। फाइनेंशल सपोर्ट भी जरूरी है। सब्सिडी देने में पारदर्शिता हो।

'हाईटेक स्टूडियो की ज्यादा जरूरत'

उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष गौरव द्विवेदी का कहना है कि 2017 से लेकर अब तक करीब 200 से अधिक फिल्में शूट हो चुकी हैं। मुंबई से यहां शूट करने वालों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना पहला लक्ष्य होना चाहिए। लालफीताशाही नहीं होनी चाहिए। सब्सिडी देने का समय निर्धारित होना चाहिए। अभी वीएफएक्स, स्पेशल इफेक्ट वाले स्टूडियो की अधिक जरूरत है। मेरा हिसाब से फिल्म सिटी की ज्यादा जरूरत नहीं है। दरअसल, लोग अभी रियलिस्टिक लोकंशस पर ही शूट करते हैं। ऐसे में फिल्म सिटी की यूटिलिटी ज्यादा नहीं है। अगर आप लाना चाहते हैं तो टेक्नोलॉजी लाएं। सिंगापुर जैसे हाईटेक स्टूडियो यहां बनाएं।

अनुभव सिन्हा को पसंद आया सरकार का आइडिया

फिल्मकार अनुभव सिन्हा ने कहा, 'उत्तर प्रदेश को फिल्म प्रोडक्शन के लिए एक इंड्रस्टी के रूप में स्थापित करने का विचार बहुत अच्छा है। विशेष रूप से क्षेत्रीय सिनेमा को सहयोग और अच्छे बुनियादी ढांचे की जरूरी है।'



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