राज्यसभा में यह मेरा आखिरी स्पीच हो सकता है : गुलाम नबी
| Agency - Sep 29 2020 1:05PM

किसान बिल पर संसद में नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने में असफल रही कांग्रेस संसदीय दल नेतृत्व बदलाव की आहट के बीच पार्टी के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद के बयान ने सबको चौंका दिया है। सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले 'G-23' में शामिल आजाद ने कहा राज्यसभा में एक बहस के दौरान कहा कि यह सदन में उनका आखिरी संबोधन हो सकता है। ऐसा भी कहा जा रहा है कि अगले सत्र में कांग्रेस के संसदीय नेतृत्व में बड़ा बदलाव हो सकता है और इसमें राहुल गांधी की छाप दिखेगी।

दरअसल, राज्यसभा में खराब व्यवहार के कारण सभापति ने 8 सांसदों को निलंबित कर दिया था। राज्यसभा को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने से एक दिन पहले सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, 'सदन में यह मेरा आखिरी भाषण हो सकता है।' बता दें कि आजाद ने कांग्रेस के 23 नेताओं के साथ मिलकर कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी से संगठन में बड़े बदलाव की मांग वाली एक चिट्ठी लिखी थी। इस पत्र के बाद काफी बवाल मचा था। आजाद ने सदन में कहा कि अगर कोरोना महामारी 5 महीने से ज्यादा चली तो वह फिर सदन में नहीं दिखेंगे।

आजाद का राज्यसभा का कर्यकाल अगले साल फरवरी में खत्म हो रहा है और उसके बाद राज्यसभा के लिए कोई चुनाव नहीं होने हैं और उनके बयान को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि जब आजाद के बयान पर चेयरमैन वेंकैया नायडू पूछा कि आखिर वह ऐसा क्यों कह रहे हैं तो कांग्रेस नेता ने उनके सवाल को अनदेखा कर किसान बिल पर सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया।

आजाद के बयान के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को आजाद की जगह विपक्ष का नेता बनाया जा सकता है। खड़गे को जून में राज्यसभा भेजा गया था। कई लोग खड़गे के नामांकन को आजाद के पत्र लिखने से भी जोड़कर देख रहे थे। हालांकि, कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, अभी आजाद को कम करके आंकना भूल होगी।

कांग्रेस के इस दिग्गज नेता ने गांधी परिवार के चार पीढ़ियों के साथ काम किया है। अगर जम्मू-कश्मीर विधानसभा का चुनाव उनके कार्यकाल खत्म होने से पहले होता है तो उनके ऊपरी सदन में आने की उम्मीदें हैं। यह भी हो सकता है कि किसी कांग्रेस शासित राज्य से कोई सदस्य इस्तीफा दे दे और उनकी जगह आजाद को राज्यसभा भेजा जाए।



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